बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी के नियम से भ्रम
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जीएसटी के नियम से भ्रम

रॉयटर्स / नई दिल्ली July 27, 2017

देश में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मकसद 2 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का एकीकरण करना और कंपनियों के लिए राज्य को बीच कारोबार को आसान बनाना था। एक महीने बीतने के बाद तमाम कारोबारियों को लग रहा है कि कारोबार करना पहले की तुलना में और जटिल हो गया है। एक जुलाई से लागू कई कर दरों  जीएसटी  के अस्पष्ट नियमों की वजह से कंपनियां भ्रमित हैं कि वे अपने उत्पादों के दाम किस तरह से तय करें। कर के जटिल ढांचे में चार प्रमुख दरें 5 से 28 प्रतिशत तक हैं, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है। आगामी महीनों में इससे आर्थिक वृद्धि दर और सरकार के राजस्व पर असर पडऩे का भी जोखिम है।
 
उदाहरण के लिए विमानन कंपनियां इस बात को लेकर अनिश्चिता से जूझ रही हैं कि प्रीमियम इकनॉमी सीटों को इकनॉमी में रखेंं या बिजनेस क्लास में जिन पर क्रमश: 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत जीएसटी है। इसी तरह की समस्या ऑटो रिपेयर की दुकानों के सामने हैं क्योंकि विभिन्न कामों के लिए जीएसटी दरें अलग अलग हैं। दक्षिण दिल्ली में वर्कशॉप चलाने वाले सुरिंदर पॉल ने कहा, 'लोग अपने काम के लिए या तो कम पैसे ले रहे हैं या ज्यादा पैसे ले रहे हैं।'
 
यहां तक कि कंप्यूटर विनिर्माता एचपी इंक, जो लैपटॉप उत्पादों की मार्केटिंग छोटे कारोबारियों को नई कर व्यवस्था के अनुपालन के लिए कर रही है, स्पष्टता चाहती है। जीएसटी के तहत डेस्कटॉप और लैपटॉप पर 18 प्रतिशत कर लगाया गया है, जबकि मल्टी फंक्शन प्रिंटर और मॉनिटर पर 28 प्रतिशत कर लगाया गया है। हिमाचल प्रदेश में कर अधिकारी पूनम महाजन का कहना है, 'मॉनिटर, सीपीयू और कंप्यूटर के अन्य उपकरण का आयात एकल इकाई के रूप में होता है।' 'ऐसी स्थिति में हम किस दर से कर लगाएं- 18 या 28 प्रतिशत?' 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार कहे जाने वाले जीएसटी ने केंद्र, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के अलग अलग करों का एकीकरण किया है और देश को एक बाजार में बदल दिया है। 
 
इस तरह की समस्याओं की पहले से उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कुछ अधिकारी एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। जनवरी मार्च तिमाही में वार्षिक वृद्धि दर घटकर 6.1 प्रतिशत रह गई, जो पिछले 2 साल में सबसे कम वृद्धि दर है। अगर आगे वृद्धि दर सुस्त रहती है तो रााजकोष पर दबाव बढ़ेगा। बड़ी परीक्षा सितंबर मेंं होने वाली है, जब मासिक जीएसटी दाखिल करने छूट की अवधि खत्म हो जाएगी।
 
टैक्स सॉफ्टवेयर प्रदाता टेली सॉल्यूशंस के एक सर्वे के मुताबिक 40 प्रतिशत से ज्यादा छोटे कारोबारी अभी नहीं जानते कि जीएसटी किस तरह से काम करता है और दो तिहाई ने अब तक इसके अनुपालन के लिए सॉफ्टवेयर नहीं लिया है। केंद्र सरकार ने कंपनियों को जानकारी देने के लिए कार्यक्रम चलाए हैं और नए कर के विभिन्न प्रावधानोंं की जानकारी दी जा रही है। यह कवायद नए कर ढांचे की विसंगतियों की वजह से कर अधिकारियों के लिए भी अध्ययन का विषय बन गया है। 
 
अधिकारियों ने पाया कि हॉलिडे टूर ऑपरेटर न सिर्फ भारत में दी जा रही सेवाओं पर नया कर ले रहे हैं बल्कि विदेशी टूर पर भी कर लिया जा रहा है। सब्जियों के बीज पर कर नहीं है, वहीं धान, मोटे अनाज और मक्के के बीज पर अब 5 प्रतिशत कर लगाया गया है। इससे मोनसैंटो जैसी कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ा है, जिनके स्थानीय बीज बिक्रेताओं को कर भुगतान का कोई अनुभव नहीं है। 
 
मॉनसेंटो के एशिया व अफ्रीका में कराधान देखने वाले अरिंदम लाहिड़ी ने कहा, 'ऐसे समय में जब सामान्यतया बिक्री तेज होती है, हमारी बिक्री प्रभावित हुई है।' उन्होंने कहा कि यह अस्पष्टता जल्द से जल्द दूर किए जाने की जरूरत है। जीएसटी के मामले देख रहे राजस्व सचिव हसमुख अढिय़ा ने इस सप्ताह ट्वीट कर कहा था कि करीब 80 लाख कारोबारियों ने कर भुगतान के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने लिखा, 'सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है।' इस मसले पर मांगी गई जानकारी पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 
 
लेकिन कुछ कंपनियों में सब कुछ ठीक ठाक नहींं चल रहा है। तंबाकू फर्मों जैसे आईटीसी लिमिटेड जीएसटी लागू होने के बाद  किए गए कर बदलाव की वजह से बेहाल है। पिछले सप्ताह सिगरेट पर सरकार ने अचानक उपकर बढ़ा दिया, जिससे इन फर्मों का स्टॉक मार्केट में भाव  7 अरब डॉलर से ज्यादा गिरा है। इसके अलावा कुछ राज्यों ने स्थानीय कर बढ़ा दिए हैं या नए अधिभार लगा दिए हैं, जो प्रधानमंत्री के एक राष्ट्र एक कर के मंत्र को चुनौती दे रहे हैं। मूल रूप से यह परिकल्पना की गई थी कि जीएसटी लागू होने से भारत की अर्थवव्यवस्था 2 प्रतिशत बढ़ेगी, लेकिन अब तमाम अर्थशास्त्रियों ने अपनी उम्मीद घटा दी है। जेफरीज में विश्लेषकों ने एक नोट में कहा है कि मौजूदा प्रारूप मे जीएसटी कर दरों को आसान करने में विफल रहा है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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