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एफपीआई के भरोसे से इस साल नकदी बढ़ी

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा / मुंबई/नई दिल्ली July 26, 2017

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने वर्ष 2017 के कैलेंडर साल में अब तक 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि भारत के शेयर और डेट बाजारों में लगाई है। नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई की तरफ से भारतीय बाजार में झोंकी गई 25.5 अरब डॉलर राशि में से 16.8 अरब डॉलर ऋण बाजार में लगाए गए हैं। इसके अलावा एफपीआई निवेशकों ने इस साल अब तक शेयर बाजार में 8.7 अरब डॉलर का निवेश किया है। 

 
एनएसडीएल के मुताबिक इस निवेश राशि की गणना करते समय एफपीआई और विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) की तरफ से भारतीय शेयर बाजार (प्राथमिक एवं द्वितीयक बाजार) में किए गए सभी तरह के कारोबार के अलावा विलय एवं अधिग्रहण संबंधी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। इस अवधि में घरेलू म्युचुअल फंडों ने शेयर और डेट बाजारों में 268,088 करोड़ रुपये लगाए हैं। डेट संवर्ग में इनका शुद्ध निवेश 221,302 करोड़ रुपये रहा है जबकि इक्विटी बाजार में घरेलू म्युचुअल फंडों का योगदान 46,786 करोड़ रुपये रहा है।
 
भारतीय बाजार में अतिशय तरलता की स्थिति का असर सूचकांकों की तीव्र वृद्धि के रूप में सामने आया है। इस साल अभी तक एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी50 सूचकांक दोनों ही करीब 22 फीसदी का उछाल हासिल करने में कामयाब रहे हैं। स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीष बालिगा का कहना है कि वैश्विक तरलता सामान्य तौर पर अच्छे प्रदर्शन वाले उभरते बाजारों का रुख करती है और ऐसा लगता है कि भारत इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए एकदम माकूल स्थिति में है। बालिगा कहते हैं, 'घरेलू बाजार को देर से यह अहसास हुआ कि इक्विटी की तुलना में किसी अन्य परिसंपत्ति संवर्ग का उतना रिटर्न नहीं है लिहाजा उसने बड़े पैमाने पर इस संवर्ग में निवेश करना शुरू कर दिया।'
 
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी भारत स्थिर राजनीतिक माहौल, अर्थव्यवस्था में तेजी, नीतिगत सुधारों और कंपनियों की आय में सुधार होने की उम्मीद से विदेशी निवेशकों के साथ ही घरेलू निवेशकों का भी भरोसा कायम रखने में सफल रहेगा जिसके चलते निवेश की मात्रा बढ़ेगी। हालांकि निकट भविष्य में हालात इसके उलट भी हो सकते हैं जो बाजार के रणनीतिक बदलावों के लिहाज से एक सामान्य प्रक्रिया है।
 
हालांकि कुछ चिंताएं भी हैं। मिझुहो बैंक के भारतीय रणनीतिकार तीर्थंकर पटनायक पिछले तीन महीनों में भारतीय निर्यात में आई गिरावट को लेकर चिंतित हैं। वह कहते हैं कि निर्यात में कमी आने से समग्र आर्थिक प्रगति के अलावा निवेश पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। भारतीय बाजार में निवेश का स्तर बरकरार रखने के लिए कंपनी आय भी बढऩे की जरूरत होगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार खुदरा निवेशकों से नकदी प्रवाह बढऩे पर अपनी तेजी कायम रख सकता है।
Keyword: FPI, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई),
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