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भूषण स्टील में जेएसडब्ल्यू स्टील की क्यों है रुचि

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता July 25, 2017

भूषण स्टील में जेएसडब्ल्यू स्टील की दिलचस्पी के पार्थ जिंदल के बयान के काफी पहले सज्जन जिंदल के नियंत्रण वाली कंपनी ने लेनदारों के सामने करीब 22,000 करोड़ रुपये के इसके कर्ज के अधिग्रहण के लिए अनापेक्षित पेशकश की थी। जनवरी के आखिर में जेएसडब्ल्यू ने एक प्रस्ताव के साथ लेनदारों से संपर्क किया था, जिसमें भूषण स्टील के कर्ज के एक हिस्से का अधिग्रहण शामिल है। भूषण स्टील पर वित्त वर्ष 2016 में 44,477 करोड़ रुपये कर्ज था। आरबीआई की एस4ए योजना के तहत लेनदारों से कर्ज पुनर्गठन पर बातचीत कर रहे भूषण स्टील के प्रबंधन ने हालांकि प्रस्ताव सामने नहीं रखा। इसके बाद से काफी बातें हो चुकी हैं।

 
आरबीआई ने आईबीसी के तहत दिवालिया प्रक्रिया के लिए भूषण स्टील समेत 12 दबाव वाले खाते की सिफारिश की है। भूषण स्टील का मामले पर अब नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में सुनवाई हो रही है। लेकिन जिंदल स्टील ने स्पष्ट किया है कि वह कंपनी के लिए बोली लगाने में दिलचस्पी रखती है। जेएसडब्ल्यू स्टील के लिए भूषण स्टील पर आकर्षक दांव आखिर क्या होगा? पार्थ जिंदल ने हाल में कहा था कि भूषण स्टील को प्राथमिकता इसकी अवस्थिति के चलते दी जा रही है।
 
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कॉरपोरेट रेटिंग प्रमुख जयंत रॉय ने कहा, भूषण स्टील का परिचालन लाभ 2016-17 की दूसरी छमाही में 20 फीसदी था, जो गैर-एकीकृत कंपनी के लिहाज से अच्छा है। इसके अतिरिक्त खनिज के मामले में संपन्न ओडिशा में इसकी मौजूदगी और वाहन तथा टिकाऊ उपभोक्ता उद्योगों में साख वाले ग्राहकों की उपस्थिति संभावित खरीदार के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकता है। हाल में संपन्न नीलामी में कंपनी को ओडिशा में लौह अयस्क की खदान मिली है।
 
भूषण स्टील की 2015-16 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी मारुति सुजूकी, टाटा मोटर्स, होंडा, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, अशोक लीलैंड की लंबी अवधि की आपूर्तिकर्ता कंपनी है। वास्तव में 1990 के दशक में वाहनों के लिए आउटडोर स्किन पैनल की आपूर्ति करने वाली यह पहली कंपनियों में से एक है, जब इसका मोटे तौर पर आयात होता था। टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र में इसकी ग्राहकों में एलजी, सैमसंग, वीडियोकॉन व हायर शामिल हैं।
 
भूषण के सूत्र ने कहा, टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र में इसकी बाजार हिस्सेदारी 80 फीसदी है, वहीं ऑटो ग्रेड स्टीव में इशकी बाजार हिस्सेदारी 40 फीसदी होगी। इन फायदों के अलावा भूषण के पास ओडिशा स्पंज आयरन ऐंड स्टील लिमिटेड की खासी हिस्सेदारी है, जिसके पास उच्च गुणवत्ता वाली लौह अयस्क खदान है। इस खदान का फंडार 12.2 करोड़ टन का है और आयु करीब 15 साल की। मोनेट इस्पात ऐंड एनर्जी लिमिटेड पर भी जेएसडब्ल्यू की नजर है और इसकी भी ओडिशा स्पंज में हिस्सेदारी है।
 
ओडिशा स्पंज की शेयरधारिता पर हालांकि मोनेट इस्पात और ओडिशा स्पंज के निदेशक मंडल के बीच विवाद है और यह मामला नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में है। जेएसडब्ल्यू की हालिया सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी की रणनीति में बैकवार्ड इंटीग्रेशन और कच्चे माल की सुरक्षा हमेशा ही महत्वपूर्ण रही है। कंपनी ने नीलामी प्रक्रिया में मोइत्र कोकिंग कोल ब्लॉक हासिल किया है। इस खदान में करीब 3 करोड़ टन कोयले का भंडार है और यह विकास के अग्रणी चरण में है।
 
जेएसडब्ल्यू ने भी कर्नाटक में नीलामी में सी श्रेणी की पांच खदान हासिल की है। इनमें से दो खदान 2017-18 की पहली छमाही में परिचालन में आ जाएगी और बाकी तीन वित्त वर्ष 2017-18 के आखिर तक। सभी पांच खदानों से सालाना 47 लाख टन अयस्क का उत्पादन होगा। ओडिशा स्पंज आयरन की खदान इन सभी मिलाकर बड़ी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह देखना बाकी है कि जब भूषण के लिए बोली की प्रक्रिया शुरू होती है तो जेएसडब्ल्यू के अलावा उसमें कौन बोली लगाती है। एसबीआई कैप्स लेनदारों की तरफ से दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से पहले से ही संभावित निवेशकों की तलाश कर रही है।
Keyword: bhusan steel, भूषण स्टील और अग्रणी बैंकर भारतीय स्टेट बैंक,
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