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हमारी असल परीक्षा अब होगी : नवीन कुमार

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना /  07 24, 2017

बीएस बातचीत

नवीन कुमार तनाव में नहीं दिख रहे, भले ही सोमवार से सभी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) करदाताओं की इनवाॅइस की अपलोडिंग शुरू हो गई है। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के चेयरमैन ने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना से नए कर के दौर के विभिन्न पहलुओं पर बात की। प्रमुख अंश :

आप इनवाॅइस अपलोडिंग के लिए किस तरह तैयार हो रहे हैं?

हमारी प्रक्रिया पहले से ही चल रही है, लेकिन यह आम लोगों के लिए नहीं है। यह अभी सुविधा प्रदाताओं, बिटा टेस्टिंग का हिस्सा बने लोगों, कु छ कर अधिकारियों के लिए था। इस सप्ताह से सबके लिए यह खुल गया। अगर कोई समस्या होगी तो हम उसे दुरुस्त करेंगे। 4,000-5,000 लोग इसके लिए लगे हैं। यह भी देखना हैकि जीएसपी (जीएसटी सुविधा प्रदाता) किस तरह काम कर रहे हैं, क्योंकि सभी बड़े करदाता इनके माध्यम से आ रहे हैं। हमने बुधवार को उनके साथ बैठक की थी। हमने पाया कि वे हर चीज के लिए तैयार हैं, लेकिन जीएसटी से कनेक्टिविटी नहीं हो पा रही है। छोटे और मझोले कारोबारी कह रहे हैं कि उन्हें पंजीकरण मेंं दिक्कत हो रही है। 

कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने लॉगिन की कोशिश की लेकिन अन्य करदाता का ब्योरा खुल रहा है? 

ऐसा उन मामलों में हो रहा है, जहां कर सेवा प्रदाता कई लोगों के आंकड़े दे रहे हैं। अगर एक व्यक्ति से ज्यादा के आंकड़े एक सेशन में एक ही ब्राउजर से एंटर किए जाते हैं तो उसके लिए प्रक्रिया है। जब आप पोर्टल से कनेक्ट होते हैं तो फाइल कंप्यूटर पर डाउनलोड हो जाती है, जिसे कुकीज कहा जाता है। यह आंकड़े संग्रहीत हो जाते हैं। ऐसे में जब आप पहले व्यक्ति का काम पूरा करते हैं और दूसरे व्यक्ति आंकड़ों की प्रविष्टि करने लगते हैं और कुकीज नहीं साफ किया होता है तो वही आंकड़ा नजर आता है।

छोटे और मझोले कारोबारियों का कहना है कि उनके पास कनेक्टिविटी और बिजली नहीं है, ऐसे में वे कैसे कंप्यूटर चला सकते हैं?

पुरानी कर प्रणाली में ये 80 लाख लोग कैसे रिटर्न फाइल करते थे? इनमें से 67-68 लाख लोग सिर्फ राज्य स्तर के मूल्यवर्धित कर में थे। वैट के दौर में 37 प्रतिशत करदाता सीमा से नीचे थे। यह सीमा सिर्फ 5 लाख रुपये थी, उन्होंने स्वैच्छिक पंजीकरण कराया था। पुरानी व्यवस्था में भी एसएमई किसी की मदद से कर फाइल करते थे। जो लोग कर कानून, कंप्यूटर चलाना जानते हैं तो खुद कर दाखिल कर सकते हैं और अगर नहीं जानते हैं तो दूसरे की मदद लेते हैं।

क्या वैट के तहत मैनुअल रिटर्न दाखिल होता था?

कोई मैनुअल फाइलिंग नहींं होती। वैट में केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक करों का डिजिटलीकरण 2005 से ही शुरू कर दिया था। शुरुआत में लोगों को दिक्कत हुईष लेकिन धीरे धीरे लोगों ने इसके बारे में सीख लिया। 

कॉल सेंटर पर किस तरह की समस्याएं बताई जा रही हैं, जो आपने स्थापित किए हैं?

सबसे ज्यादा कॉल डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) के इस्तेमाल को लेकर आ रही है। 

क्या आपकी असली परीक्षा सितंबर से शुरू होगी, जब इनवाइस के मुताबिक रिटर्न दाखिल होंगे?

नहीं। इस सप्ताह इनवाइस अपलोडिंग से ही असली परीक्षा शुरू हो जाएगी। हम अभी इसे शुरू कर रहे हैं, और लोग रिटर्न दाखिल करने के पहले इसे अपलोड कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो लोग हमारी सलाह ले सकते हैं, यह उनके लिए भी अच्छा होगा और हमारे लिए भी।
Keyword: नवीन कुमार, जीएसटी, करदाता, इनवाइस, अपलोडिंग, जीएसटीएन, पंजीकरण, कंप्यूटर,
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