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माल घटने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर पड़ा दबाव

विवेट सुजन पिंटो / मुंबई July 24, 2017

एफएमसीजी क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को जीएसटी लागू होने से पहले जून तिमाही के बिक्री वृद्घि के आंकड़ों पर डीस्टॉकिंग यानी माल में कमी के प्रभाव से जूझना पड़ा। गुरुवार को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनी यूनिलीवर को दूसरी तिमाही के संदर्भ में एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, तुर्की, रूस और ब्राजील क्षेत्रों (एशिया/एएमईटी /आरयूबी जोन में बिक्री वृद्घि में 0.6 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा। 
 
कोलगेट-पामोलिव ने शुक्रवार को कहा कि एशिया-प्रशांत के लिए उसकी ऑर्गेनिक बिक्री 3.5 फीसदी तक घटी है जिससे भारत में जीएसटी की वजह से थोक विक्रेताओं द्वारा माल में कमी किए  जाने का पता चलता है। दवा एवं उपभोक्ता वस्तु कंपनी जॉनसन ऐंड जॉनसन (जेऐंडजे) अपने उपभोक्ता व्यवसाय पर डीस्टॉकिंग के प्रभाव को लेकर अधिक चिंतित रही है। उसने कहा है कि जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से बाजार में अनिश्चितता पैदा हुई है और इससे दूसरी तिमाही में वृद्घि पर नकारात्मक असर पड़ा है। जेएंडजे के फाइनैंस प्रमुख (वैश्विक) डोमिनिक करूसो ने पिछले सप्ताह एक इन्वेस्टर कॉल के दौरान कहा कि चीन और भारत में आर्थिक रुझानों ने अपेक्षाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, 'कंज्यूमर व्यवसाय में, हम बाजारों, खासकर चीन और भारत में बाजारों में कमजोरी देख रहे हैं।'
 
विश्लेषकों का कहना है कि व्यापार में डीस्टाकिंग का प्रभाव सितंबर तिमाही में अधिक रहने की आशंका है, क्योंकि एफएमसीजी कंपनियों के लिए अहम होलसेल चैनल द्वारा नई कर व्यवस्था के प्रति पूरी तरह ढलना अभी बाकी है। थोक विक्रेताओं का भारत में एफएमसीजी कंपनी की बिक्री में 35-40 फीसदी का योगदान है। विश्लेषकों का कहना है कि सितंबर तिमाही में थोक विक्रेताओं के लिए ट्रांजीशन अवधि एक महीने बढ़ाई जाएगी, क्योंकि वे काफी हद तक असंगठित बने हुए हैं और अभी भी नकद लेनदेन पर निर्भर हैं।
 
मुंबई की ब्रोकरेज फर्म दौलत कैपिटल के वरिष्ठï विश्लेषक सचिन बोबाडे ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि एफएमसीजी के लिए जून तिमाही में बिक्री वृद्घि और कर-बाद मुनाफा (पीएटी) एक अंक में रहेगा और यह स्थिति सितंबर तिमाही तक बरकरार रहेगी। जहां तिमाही में एचयूएल की शुद्घ बिक्री वृद्घि हमारे एक अंक के अनुमान के अनुरूप रही है, वहीं पीएटी वृद्घि को कंपनी द्वारा लागत प्रबंधन पर जोर दिए जाने की पहल से मदद मिली।'
 
इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोक्कालिंगम भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि एफएमसीजी के लिए बिक्री और मुनाफा वृद्घि में सुधार की संभावना तीसरी तिमाही में ही संभव है, क्योंकि तब तक जीएसटी की जरूरतों की वजह से व्यापार में गिरावट बरकरार रहने की आशंका है। पिछले सप्ताह इन्वेस्टर कॉल में एचयूएल प्रबंधन ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में संगठित होलसेल (उदाहरण के लिए, मेट्रो और वालमार्ट के कैश एंड कैरी स्टोर) को असंगठित होलसेल के मुकाबले मजबूती मिलेगी। मुख्य वित्तीय अधिकारी पी बी बालाजी ने कहा, 'उन्हें फायदा होगा। जीएसटी से कंपनियों को अपने प्रत्यक्ष वितरण प्रयासों को बढ़ाने मं भी मदद मिलेगी, क्योंकि वे होलसेल (असंगठित होलसेल) पर अपनी निर्भरता घटाने पर जोर देंगी। हम मजबूत और प्रत्यक्ष पहुंच पर जोर देंगे, क्योंकि हम इसमें स्पष्टï रूप से लाभ देख रहे हैं।' 
Keyword: FMCG, retail, NPCI,,
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