बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी में पंजीकरण उम्मीद से कम
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जीएसटी में पंजीकरण उम्मीद से कम

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 07 23, 2017

सुस्त चाल

केंद्रीय उत्पाद शुल्क (वैट नहीं) में कुल 43,854 करदाता हैं, जिनमें से 15,786 (35 प्रतिशत) ने पंजीकरण कराया
सेवा कर (वैट नहीं) में 10,87,720 करदाताओं में से 6,54,570 करदाताओं (60 प्रतिशत) ने पंजीकरण कराया
75,46,337 वैट करदाताओं में से 63,62,401 करदाताओं (83.30 प्रतिशत) ने जीएसटी के तहत पंजीकरण कराया

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के 3 सप्ताह बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान करने वाले सिर्फ एक तिहाई करदाताओं ने ही जीएसटी अपनाया है। छूट की सीमा काफी घटाए जाने के बावजूद ऐसा हुआ है। जीएसटी नेटवर्क द्वारा हाल में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान करने वाली 43,854 इकाइयों में से सिर्फ 15,786 करदाताओं ने ही अप्रत्यक्ष कर जीएसटी अपनाया है।

इन आंकड़ों ने विशेषज्ञों को चकित कर दिया है, क्योंकि 1.5 करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार करने वालों को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट मिली हुई थी, जिसे जीएसटी के तहत घटाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। कर भुगतान के लिए सीमा कम किए जाने से आदर्श स्थिति में उत्पाद कर भुगतान करने वालों की संख्या बढऩी चाहिए थी। बहरहाल पंजीकरण के लिए अभी 30 सितंबर तक का वक्त है। 

डेलॉयट की सलोनी रॉय का कहना है, 'यह आंकड़े आश्चर्यजनक हैं। आदर्श रूप में करदाताओं को जीएसटी की तरफ जाना चाहिए था, भले ही अभी इसके लिए दो महीने और वक्त है। यह कानून को न समझने की वजह से या जमीनी स्तर पर सत्यापन की वजह से हो सकता है। ये आंकड़े इसलिए चकित करते हैं कि बहुत सारे लोग जीएसटी व्यवस्था से बाहर हैं।' उन्होंने कहा कि ऐसा इस वजह से हो सकता है कि इकाइयों को जीएसटी पोर्टल पर जाने में कठिनाइयां आ रही हों। 

सेवा कर के मामले में भी कहानी कुछ अलग नहीं है, जहां सिर्फ 60 प्रतिशत करदाताओं ने जीएसटी अपनाया है। हाल तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 10.8 लाख सेवा करदाताओं मेंं से सिर्फ 6 लाख लोगों ने जीएसटी के लिए पंजीकरण कराया है। हालांकि सेवा कर के तरहत छूट की सीमा जीएसटी के तहत 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है, लेकिन कर विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट होने की वजह से आंकड़ों में बढ़ोतरी होना चाहिए था।

रॉय ने कहा, 'जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होने की वजह से तमाम करदाताओं को जीएसटी के तहत आना चाहिए था। कम आंकड़े थोड़े दिलचस्प हैं।' सेवा कर के दौर के विपरीत जीएसटी में सेवा कर दाताओं को कंप्यूटर, स्टेशनरी आदि के खर्च पर इनपुट टैक्स रिफंड मिलता है। इससे सेवा प्रदाताओं में जीएसटी के दायरे में आने को लेकर दिलचस्पी हो सकती है, भले ही वह तय सीमा से कम कारोबार करते हों। 

ईवाई के विपिन सपरा ने कहा कि केंद्रीय उत्पाद और सेवा कर दोनों मामलों में जीएसटी न अपनाने वालों की संख्या में काफी अंतर जीएसटीएन के लिए पंजीकरण में हो रही समस्याओं की वजह से हो सकती है। उन्होंने कहा, 'बड़ी संख्या में लोगों को पंजीकरण में दिक्कत आ रही है। कोई वजह नहीं है कि बड़ी संख्या में लोग जीएसटी न अपनाएं। सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या है। कम से कम 10-15 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो पंजीकरण कराना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं।' उम्मीद है कि यह समस्या कुछ दिनों में हल हो जाएगी। सपरा ने कहा कि तमाम शिकायतें आ रही हैं। 

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा कर बोर्ड (सीबीईसी) के कुल 11.3 लाख करदाताओं में से सिर्फ 6.7 लाख ने जीएसटी अपनाने के लिए पंजीकरण किया है। मूल्यवर्धित कर के मामले में 85 प्रतिशत करदाता पहले ही नई व्यवस्था अपना चुके हैं। वैट का भुगतान करने वाले 75.4 लाख लोगों में से 63.6 लाख लोग जीएसटी अपना चुके हैं। जम्मू कश्मीर में सिर्फ आधे लोगों ने जीएसटी अपनाया है। वहीं बिहार में 2,46,000 करदाताओं में से सिर्फ 1,68,000 करदाताओं ने जीएसटी अपनाया है। जीएसटी के तहत पंजीकरण कराने वालों की संख्या 79 लाख पार कर गई है। 80 लाख नए करदाता हैं। नए करदाताओं के हिसाब से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्तिम बंगाल मेंं जीएसटी के तहत क्रमश: 1.3 लाख, 86,000, 89,597 और 79,597 करदाता आए हैं।
Keyword: वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, उत्पाद शुल्क, भुगतान, करदाता, जीएसटी नेटवर्क, पंजीकरण,
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