बिजनेस स्टैंडर्ड - सूरत ए सूरत : कपड़ा उद्योग ने कहा, वोट से देंगे जवाब
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 23, 2017 08:26 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम जिंस खबर

सूरत ए सूरत : कपड़ा उद्योग ने कहा, वोट से देंगे जवाब

विनय उमरजी / सूरत 07 19, 2017

जीएसटी का विरोध

► जीएसटी के विरोध में करीब महीने भर से जारी हड़ताल मंगलवार को खत्म
कपड़ा उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा, वित्त मंत्री को पता है हमारी स्थिति
कारोबारियों और बुनकरों ने कहा कि उनको 5 अगस्त की बैठक का इंतजार

हीरा नगरी सूरत में 50 हजार करोड़ रुपये का कपड़ा उद्योग एक महीने की हड़ताल के बाद फिर से पटरी पर लौटने की तैयारी कर रहा है। सूरत के कारोबारी कपड़े पर जीएसटी लगाने के विरोध में हड़ताल पर चले गए थे। उद्योग को वित्त मंत्री अरुण जेटली की यह बात नहीं पची है कि कपड़े पर शून्य कर नहीं लगाया जा सकता। कारोबारियों ने सरकार को आगाह किया है कि उसे उनकी बात माननी पड़ेगी वरना वे वोट के जरिये इसका जवाब देंगे। 

मंगलवार को वित्त मंत्री ने धागे पर लगाए गए 5 फीसदी जीएसटी को हटाने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि इससे घरेलू उद्योग की इनपुट टैक्स क्रेडिट की चेन टूट जाएगी और आयातित कपड़ा सस्ता हो जाएगा। राज्य सभा में एक लिखित जवाब में वित्त मंत्री नेे कहा कि आजाद भारत में कपड़े पर पहले भी कर लगाया गया है। वर्ष 2003-04 में समूचे वस्त्र उद्योग को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तहत लाया गया था। 

जीएसटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष ताराचंद कसाट ने कहा कि हाल की बैठकों के दौरान सरकार से हमें सकारात्मक सहयोग का आश्वासन मिला था। लेकिन अब वित्त मंत्री रुख बदल रहे हैं। यह राजनीति लगती है, फिर भी हम नहीं रुकेंगे और जरूरत पड़ी तो फिर हड़ताल करेंगे। हम जीएसटी परिषद की 5 अगस्त की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। मिलेनियम मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरुमुख कंगवाणी ने कहा कि हम सरकार से कहते रहे हैं कि धागे या रेशे पर अतिरिक्त दर पर उनको कोई एतराज नहीं है। लेकिन फैब्रिक, रंगाई और प्रोसेस के साथ-साथ कारोबार जैसे कई स्तर पर कर लगाने से छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाएगा। 

जीएसटी संघर्ष समिति से जुड़े एक कारोबारी हितेश सकलेचा ने कपड़ा कारोबार पर लगाए गए 5 फीसदी जीएसटी को वापस लेने की मांग की है। पर सरकार का कहना है कि यह कर रहेगा क्योंकि जीएसटी के तहत सेवाओं पर भी कर लगना है। कारोबारी यह भी मांग कर रहे हैं कि जीएसटी का अमल अप्रैल 2019 तक स्थगित किया जाए और उनको 18 महीने का समय दिया जाए। हालांकि सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं लग रही है। 

सूरत में करीब 75,000 कपड़ा कारोबारी हैं। इनमें से करीब 3000 ने ही जीएसटी के तहत पंजीकरण कराया है। उनको सरकार से सकारात्मक रुख की उम्मीद है। 16 जून से शुरू हुई सूरत की हड़ताल 18 जुलाई को खत्म हुई और इस दौरान करीब 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही कई लोग बेरोजगार रहे। पंडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष गुजराती ने आरोप लगाया कि सरकार को सिर्फ बड़े उद्योगों की चिंता है, छोटे कारोबारियों की नहीं।
Keyword: जीएसटी, हड़ताल, कपड़ा उद्योग, बुनकर, हीरा, वोट, इनपुट टैक्स क्रेडिट, उत्पाद शुल्क,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 पेमेंट बैंक में प्रतिस्पर्धा होगी ग्राहकों के लिए फायदेमंद?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.