बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज का बोझ
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 21, 2017 07:18 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

कर्ज का बोझ

संपादकीय /  July 19, 2017

उत्तर प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार ने अपना पहला बजट पिछले हफ्ते पेश कर दिया है। बजट पेश करने के पहले खासी उत्सुकता का माहौल था। इसकी वजह यह थी कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली यह कह चुके थे कि इस कर्ज माफी का बोझ केंद्र सरकार नहीं उठाएगी। बहरहाल राज्य सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला किया जिस पर करीब 36,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। 

 
उत्तर प्रदेश पहले से ही कर्ज के भारी बोझ के नीचे दबा हुआ है। राज्य सकल घरेलू उत्पाद में राज्य के ऋण का अनुपात करीब 30 फीसदी पर पहुंच चुका था। ऐसे में सवाल यह था कि सार्वजनिक कोष पर पडऩे वाले इस नए बोझ को कैसे वहन किया जाएगा? अब उस सवाल का जवाब आ गया है लेकिन उससे भरोसा नहीं जगता है। बजट देखकर पता चलता है कि अतिरिक्त खर्च का इंतजाम पहले पेश किए जा चुके अंतरिम बजट में दो बदलावों के जरिये किया जाएगा। सरकार ने पहला बदलाव ऊर्जा क्षेत्र के आवंटन में 16,800 करोड़ रुपये की कटौती कर किया है। दूसरा बदलाव कुल राजस्व अनुमान में सुधार का है। अंतरिम बजट में कुल राजस्व बढ़ोतरी के 11.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था लेकिन इस बजट में यह अनुमान बढ़ाकर 18.6 फीसदी कर दिया गया है। जाहिर है कि राजस्व में यह बढ़ोतरी दरअसल केंद्र से मिलने वाले अनुदान के ही जरिये होगी, जेटली चाहे जो भी कहें। उत्तर प्रदेश बजट के मुताबिक केंद्र से मिलने वाले अनुदान के असामान्य रूप से 39 फीसदी बढ़कर 68,000 रुपये रहने का अनुमान है। अगर किसी कारणवश केंद्र से उत्तर प्रदेश को यह अनुदान नहीं मिल पाता है तो राज्य का राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा। 
 
उत्तर प्रदेश की समस्याएं अलहदा नहीं हैं। किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान करने वाले अन्य राज्यों-पंजाब और महाराष्ट्र को भी अपना राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने के लिए राजस्व जुटाने में कुछ ऐसी ही समस्याएं झेलनी पड़ेंगी। इस बीच देश के अन्य राज्यों में भी किसानों का कर्ज माफ करने की मांगें जोर पकडऩे लगी हैं। इन किसानों पर लगातार दो साल के सूखे के बाद नोटबंदी की मार पड़ी है। उत्तर प्रदेश का वित्तीय ढांचा वित्त वर्ष 2015-16 से ही गंभीर तनाव के संकेत दे रहा था। उस साल एक दशक में पहली बार राज्य का सकल राजकोषीय घाटा उसके सकल घरेलू उत्पाद के 3 फीसदी की सीमा पार करते हुए 3.6 फीसदी पर पहुंच गया था। राज्यों की वित्तीय स्थिति पर जारी रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक यह समस्या वर्ष 2016-17 में भी जारी रही। 
 
उस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि कृषि ऋण माफी के अलावा वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने पर राजस्व संग्रह को लेकर अनिश्चितता होने से भी उत्तर प्रदेश के वित्त पर गहरा असर पड़ेगा। बाजार सरकारी खर्च बढऩे पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू भी कर चुका है। समान परिपक्वता वाली सॉवरिन प्रतिभूतियों और सरकारी ऋण के बीच अंतर 74 से लेकर 83 आधार अंकों का हो चुका है जो पिछले अक्टूबर में करीब 50 आधार अंक था। समस्या केवल यह नहीं है कि भारत की व्यापक राजकोषीय स्थिति राज्य सरकारों की फिजूलखर्ची और लोकलुभावनवादी कदमों के चलते प्रभावित होगी। समस्या यह भी है कि खर्च की जाने वाली राशि का इंतजाम महत्त्वपूर्ण वैकल्पिक उपयोगों में से ही किया जाएगा। इससे पूंजीगत व्यय, खासकर कृषि क्षेत्र के लिए लक्षित व्यय प्रभावित हो सकता है जो पहले ही संकट के दौर से गुजर रहा है। राज्यों के राजकोषीय घाटे के लगातार बढऩे को लेकर आशंकाएं पिछले कई महीनों से जताई जा रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश का बजट देखने से ऐसा लगता है कि इन आशंकाओं को अधिक तवज्जो नहीं दी गई है।
Keyword: uttar pradesh, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 इन्फ्रा के दर्जे से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.