बिजनेस स्टैंडर्ड - पोटाश के दाम बढऩे की संभावना
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पोटाश के दाम बढऩे की संभावना

राजेश भयानी / मुंबई July 19, 2017

भारत में मॉनसून के सामान्य रहने के पूर्वानुमान से उर्वरक की मांग में इजाफा हो रहा है। हालांकि भविष्य में पोटाश की खरीद के लिए भारतीय किसानों को ज्यादा दाम चुकाने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इस साल चीन ने पोटाश आयात के लिए ऊंचे बेंचमार्क दाम निर्धारित किए हैं। चूंकि भारत पोटाश के वैश्विक बाजार का एक बड़ा उपभोक्ता है इसलिए वह जल्द ही इस पर तौल-मौल करेगा। हालांकि पिछले साल के स्तर पर बात बनने में मुश्किल रहेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, चीनी बेंचमार्क पर निर्भर होने के कारण इस नई कीमत के ऊंची रहने की संभावना है और आयातकों को इसे मानना पड़ेगा। हालांकि दाम ऊंचे रहने से इसकी मांग पर भी असर पड़ेगा।
 
विश्व के दो सबसे बड़े पोटाश उत्पादक - पोटाश कॉरप ऑफ सैसकेचेवेन और रूस की उरालकली ने हाल ही में पोटाश की आपूर्ति नियंत्रित करने और दामों में गिरावट रोकने के लिए उत्पादन में कटौती की है। इस उर्वरक से फसलों की गुणवत्ता और उपज बढ़ाने में मदद मिलती है। हाल ही में उरालकली ने चीन के खरीदार समूह के साथ 230 डॉलर प्रति टन सीएफआर (लागत और ढुलाई) पर अपने पोटाश का अनुबंध किया है। इसके तहत 2017 तक आपूर्ति की जानी है। उरालकली ने घोषणा की है कि अगस्त-दिसंबर 2017 के दौरान ऊंचे स्तर पर चीन को पोटाश की डिलिवरी के लिए उसकी व्यापारिक सहायक कंपनी ने चीनी समूह के साथ सौदा किया है। इस समूह में सिनोचेम, सीएनएएमपीजीसी और सीएनओओसी शामिल हैं।
 
चीन को आपूर्ति के लिए किए गए इस सौदे के दाम 2016 के उत्तराद्र्ध की कीमत 219 डॉलर प्रति टन सीएफअर से 11 डॉलर प्रति टन अधिक हैं और इसमें करीब 20 डॉलर प्रति टन की छूट शामिल है। हालांकि उरालकली ने इस खरीद समूह के साथ इस सौदे की मात्रा का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह 6,00,000 टन एमओपी (पोटाश के लवण) रहने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार, चीन 1.2 करोड़ टन आयात करता है और दूसरा सबसे बड़ा आयातक भारत केवल 40 लाख टन। यही वजह है कि सौदेबाजी करने में भारत की स्थिति चीन की भांति मजबूत नहीं है।
 
लंदन की सीआरयू के सलाहकार दीपक चित्रोदा ने कहा कि सामान्य रूप में चीन वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ भारत से अधिक स्तर पर एमओपी के अनुबंध करता है। हालांकि पिछले साल भारत ने बीपीसी के साथ जुलाई 2016 से जून 2017 के लिए पोटाश का अनुबंध 227 डॉलर प्रति टन पर किया था। इसके बाद चीन ने 219 डॉलर प्रति टन पर अनुबंध किया। 2017-18 के लिए भारत द्वारा 234-237 डॉलर प्रति टन के आस-पास दाम तय करने की संभावना है। इस वजह से मुनाफा बरकरार रखने के लिए भारतीय निर्यातकों पर अधिकतम खुदरा मूल्य ऊंचा रखने का दबाव बन सकता है।
 
भारतीय उद्योग के सूत्रों का कहना है कि पोटाश आयात विनियंत्रित है और इसका 70 प्रतिशत अनुप्रयोग सीधे खेतों में किया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन पोटाश इसकी सबसे बड़ी आयातक है जो प्रति वर्ष 20 लाख टन का आयात करती है। हालांकि जब आयात का मूल्य अधिक हो और सब्सिडी में और बढ़ोतरी संभव न हो तो ऐसे में दामों में होने वाली अतिरिक्त वृद्धि को उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाएगा। सरकारी सूत्रों का अनुमान है कि भारतीय कंपनियां दामों में 4-5 प्रतिशत का इजाफा कर सकती है जो इस बात पर निर्भर करेगा कि वे आपूर्तिकर्ता से किस स्तर पर तौल-मौल कर पाती हैं। कीमत वृद्धि से पोटाश की मांग पर असर पड़ेगा।
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
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