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कृषि ऋण माफी के लिए उत्तर प्रदेश ने कैसे किया पूंजी का इंतजाम?

ईशान बख्शी /  07 17, 2017

ऋण माफी के लिए धन मुहैया कराने में सफल रही राज्य सरकार

जब उत्तर प्रदेश में नई सरकार चुनी गई थी और उसने राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों के लिए कृषि ऋण माफी की घोषणा की थी तो बहुत से अर्थशास्त्री इस बात को लेकर अचंभित थे कि आर्थिक रूप से तंगहाल यह राज्य इतनी बड़ी कर्ज माफी के लिए धन की व्यवस्था कैसे करेगा। लेकिन राज्य सरकार न केवल ऋण माफी के लिए धन मुहैया कराने में सफल रही है बल्कि उसने हाल में पेश किए गए बजट में अपना राजकोषीय घाटा भी 3 फीसदी की निर्धारित सीमा से नीचे रखा है। 

राज्य लगातार अपने राजस्व को सरप्लस में बनाए हुए है। हालांकि राजस्व सरप्लस वित्त वर्ष 2018 में गिरकर 12,279 करोड़ रुपये पर आने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2017 (संशोधित अनुमान) में 24,506 करोड़ रुपये रहा। इसलिए सवाल पैदा होता है कि सरकार ऐसा करने में कैसे कामयाब रही? राज्य के बजट की बारीकी से जांच-पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि राज्य सरकार ऐसा करने में इसलिए कामयाब रही क्योंकि उसने व्यय आवंटन में फेरबदल किया है। इसके अलावा राजस्व का अनुमानित लक्ष्य पहले पेश किए गए अंतरिम बजट के अनुमान से काफी ऊंचा रखा गया है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2018 में बिजली के लिए अपना बजट आवंटन घटाकर 17,728 करोड़ रुपये कर दिया है, जो वित्त वर्ष 2017 (संशोधित अनुमान) के 34,602 करोड़ रुपये से काफी कम है। इससे करीब 16,800 करोड़ रुपये बचे हैं। 

शेष की भरपाई वित्त वर्ष 2018 के अपने राजस्व संग्रहण के लक्ष्य को पहले पेश किए गए अंतरिम बजट से 7 फीसदी बढ़ाकर की गई है। अंतरिम बजट में वित्त वर्ष 2018 के दौरान 3 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान लगाया गया था, जो वित्त वर्ष 2017 के संशोधित अनुमान 2.69 लाख करोड़ रुपये से 11.4 फीसदी अधिक था। अब बजट में कुल राजस्व प्राप्ति के अनुमान को बढ़ाकर 3.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 18.6 फीसदी वृद्धि को दर्शाता है। सरकार ने ऐसा कर करीब 19,300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी की गुंजाइश पैदा कर ली है। 

इन दो बदलावों से सरकार को 36,000 करोड़ रुपये की ऋण माफी के लिए धन मुहैया कराने की राजकोषीय गुंजाइश मिल गई है। इसका आवंटन राज्य के कृषि विभाग के तहत किया गया है। इस बात की की चिंताएं जताई जा रही थीं कि सरकार पूंजीगत खर्च में कटौती करेगी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया है। वित्त वर्ष 2018 में (बजट अनुमान) कुल पूंजीगत खर्च 77,541 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो अंतरिम बजट में आवंटित 76,178 करोड़ रुपये से मामूली अधिक है। हालांकि यह वित्त वर्ष 2017 के पूंजीगत खर्च से कम है, लेकिन इसकी वजह कृषि ऋण माफी नहीं है। अंतरिम बजट में ही पूंजीगत खर्च में कटौती की गई थी ताकि राज्य के बढ़ते राजकोषीय घाटे को कम किया जा सके।

इक्रा के समूह प्रमुख (कंपनी क्षेत्र की रेटिंग) जयंत राय ने कहा, 'ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने फसल ऋण माफी के वित्त पोषण के लिए बजट राजस्व प्राप्तियों में बढ़ोतरी और राजस्व खर्च में कटौती के जरिये बनाया है।'  हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने राजस्व संग्रहण में भारी बढ़ोतरी पर संदेह जताया है। बजट में गैर-कर राजस्व में 13 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है, जिसमें पहले 3 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया गया था। इसे हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने यह दिखाया है कि वित्त वर्ष 2018 में केंद्र द्वारा दिए जाने वाले अनुदान 39 फीसदी बढ़कर 68,052 करोड़ रुपये रहेंगे। असल में बजट के मुताबिक इस साल राज्य का खुद का गैर-कर राजस्व घटेगा। 

एक विशेषज्ञ कहते हैं, 'केंद्र सरकार ने अपने बजट में सभी राज्यों के लिए कुल अनुदानों में सामान्य बढ़ोतरी की है। इसे देखते हुए यह साफ नहीं है कि वित्त वर्ष 2017 के संशोधित अनुमानों की तुलना में वित्त वर्ष 2018 के बजट अनुमान में केंद्र की तरफ से दिए जाने वाले अनुदानों में बढ़ोतरी हकीकत बनेगी या नहीं।' कर राजस्व के मोर्चे पर वित्त वर्ष 2017 में संग्रहण में 12 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। वहीं अंतरिम बजट में कर राजस्व वित्त वर्ष 2018 में 14.7 फीसदी बढऩे का अनुमान जताया गया था। अब सरकार ने इस साल यह 20.8 फीसदी बढऩे का अनुमान जताया है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के एक विश्लेषण में कहा गया है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इस उम्मीद पर आधारित है कि वित्त वर्ष 2018 में बिक्री कर और जीएसटी से राजस्व 26 फीसदी बढ़ेगा। 

राज्य सरकार द्वारा कृषि ऋण माफी पर जारी दस्तावेज में साफ किया गया है कि यह कर्ज माफी का लाभ केवल छोटे किसानों (2 हेक्टेयर से कम जमीन) और सीमांत किसानों (1 हेक्टेयर से कम) को मुहैया कराया जाएगा। कर्ज माफी में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से पुनर्गठित ऋणों को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन स्वयं सहायक समूहों, लघु वित्त संस्थानों, शहरी सहकारी बैंकों द्वारा मुहैया कराए ऋण, सावधि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड से निकाली गई राशि इसके दायरे में नहीं आएंगे। ऋण की राशि के आकलन के लिए 31 मार्च 2016 को ब्याज सहित कुल बकाया राशि में वित्त वर्ष 2017 में चुकाई गए ऋण को घटाया जाएगा। इसमें वित्त वर्ष 2017 में किसान द्वारा निकाली गई राशि या नए स्वीकृत ऋण पर विचार नहीं किया गया है। 
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