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जीएसटी के पेच में फंसेगा बासमती

दिलीप कुमार झा / मुंबई July 16, 2017

ब्रांडेड बासमती चावल के उत्पादकों और निर्यातकों का मुनाफा 1 जुलाई से लागू पांच प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण कम होने के आसार हैं। पहले राज्यों के कानूनों के अनुसार बासमती चावल पर मूल्य वर्धित कर (वैट) लगाया जाता था या फिर ये कर मुक्त होते थे। लेकिन इस विशेष सुगंध वाले चावल को रजिस्टर ऑफ ट्रेड माक्र्स के अंतर्गत पंजीकृत 'ब्रांडेड' अनाज की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। जीएसटी व्यवस्था में इस पर पांच प्रतिशत का शुल्क लगता है। हालांकि वैश्विक बाजारों में इसके दामों में तेज इजाफे के कारण पांच प्रतिशत कर का असर बेअसर हो गया है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि अप्रैल-मई 2017 के दौरान बासमती चावल निर्यात से भारत को 995 डॉलर प्रति टन की औसत आमदनी हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान यह आमदनी 790 डॉलर टन थी।
कोहिनूर ब्रांड के बासमती चावल के उत्पादक और निर्यातक कोहिनूर फूड्स लि. के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान बासमती चावल के दाम आश्चर्यजनक रूप से 200 डॉलर प्रति टन या 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। ईरान समेत अन्य खाड़ी देशों के आयातकों की मांग बढऩे की वजह से ऐसा हुआ है। भारत के वार्षिक बासमती चावल निर्यात में करीब एक-चौथाई का योगदान सबसे बड़े आयातकर्ता ईरान का ही रहता है। बाजार में इस बात का डर है कि ईरान बासमती चावल आयात के नए लाइसेंस जारी करना रोक सकता है। इस कारण वहां के आयातक भविष्य में बासमती चावल की किसी भी संभावित कमी से बचने के लिए स्टॉक तैयार कर रहे हैं।
प्रतिकूल वैश्विक व्यापारिक संबंधों की वजह से ईरान की मांग में गिरावट के बावजूद 2016-17 के दौरान भारत ने 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया जो लगभग पिछले साल के बराबर रहा। अब बासमती चावल की मांग पूरी करने के लिए चीन द्वारा 14 भारतीय कंपनियों का पंजीकरण करके अपने द्वार खोलने से आने वाले वर्षों में भारतीय बासमती चावल के निर्यात में नाटकीय ढंग से इजाफा होने की संभावना है। खासतौर पर बासमती चावल की 1121 किस्म को वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच काफी प्रशंसा मिली है और इसे अच्छे ढंग से लिया गया है। भारत दुनिया भर के देशों को बासमती चावल का निर्यात करता है। पाकिस्तान भी कुछ बासमती चावल निर्यात करता है।
इक्रा के सहायक उपाध्यक्ष दीपक जोतवानी ने कहा कि जीएसटी लगाए जाने से गैर ब्रांडेड चावल वर्ग के मुकाबले ब्रांडेड भागीदारों की स्थिति घाटेवाली हो जाएगी क्योंकि इससे दामों में आगे चलकर ज्यादा अंतर हो जाएगा। इसके फलस्वरूप ब्रांडेड बासमती चावल की मांग गैर ब्रांडेड बासमती चावल की ओर स्थानांतरित हो सकती है और उद्योग के असंगठित भागीदारों को फायदा पहुंच सकता है। इससे भी ज्यादा संभावना इस बात की है कि ब्रांडेड भागीदारों का लाभ कम हो जाएगा क्योंकि वे जीएसटी के प्रभाव को वहन करने की सोचेंगे और गैर ब्रांडेड श्रेणी के साथ मूल्य अंतर को बनाए रखना चाहेंगे।

Keyword: GST, Basmati, Rice,
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