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चौराहे पर एनएसई

संपादकीय /  July 16, 2017

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के चेयरमैन अशोक चावला ने हाल ही में उन मुश्किलों की बात की थी, जिनमें देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज घिरा हुआ है। हालांकि उन्हें भरोसा था कि मुश्किलों से उबरने में सफलता मिल जाएगी। एनएसई के कर्मचारियों का हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें ऐसा भरोसा जताना भी चाहिए था, लेकिन सोमवार से एनएसई की कमान संभाल रहे नए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विक्रम लिमये के सामने वास्तव में कड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के 80 प्रतिशत शेयर कारोबार का गढ़ एनएसई सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक्सचेंज के विवादों की फेहरिस्त में नया नाम पिछले सोमवार को जुड़ गया, जब तकनीकी खराबी की वजह से यहां करीब तीन घंटे के लिए कारोबार रोकना पड़ा।
बाजार नियामक प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने तकनीकी खराबी के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और एक्सचेंज से यह भी पूछा है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वह कौन-कौन से कदम उठा रहा है। लेकिन चिंता का असली विषय इस बात की जांच है कि एक्सचेंज ने पक्षपात करते हुए चुनिंदा कारोबारियों को अपनी हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग सुविधा का इस्तेमाल तो नहीं करने दिया, जिससे उन्हें कीमतों का पता औरों से पहले लग गया। इससे एक्सचेंज के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का प्रस्ताव निश्चित रूप से लटक जाएगा। एक्सचेंज द्वारा नियुक्त स्वतंत्र एजेंसी ने कहा था कि कुछ कारोबारी सदस्यों को तरजीह दिए जाने के संकेत मिले हैं। सेबी की तकनीकी सलाहकार समिति को भी इस बात के प्रमाण मिले कि एनएसई ने निष्पक्षता के नियमों का उल्लंघन किया और कुछ ब्रोकरों को फायदा उठाने दिया।
किंतु संकट यहीं खत्म नहीं हुआ। नियामक ने सेबी की समिति द्वारा पेश की गई रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच में मिले प्रमाणों के आधार पर एक्सचेंज और 14 (वर्तमान तथा भूतपूर्व) अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिए। इसके बाद एनएसई के संस्थापक सदस्य रवि नारायण ने वाइस चेयरमैन और निदेशक मंडल के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। इससे ठीक पहले चित्रा रामकृष्ण ने एनएसई के प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दिया था, जिन्होंने इस संस्थान को तिनके से ताड़ जितना बनाया था। इसे संयोग मात्र नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने प्रबंधन के प्रमुख अधिकारियों में शुमार एक मुख्य परिचालन अधिकारी के ऊंचे वेतन पर विवाद होने के बाद एनएसई को छोड़ा था।
यह दुर्भाग्य ही है कि मात्र 25 वर्ष में विश्व स्तर की संस्था बन गया एनएसई विश्वास एवं विश्वसनीयता के इतने बड़े संकट से गुजर रहा है। लेकिन यह संकट भी स्वयं उसका ही रचा हुआ है। उदाहरण के लिए जब पक्षपात करते हुए चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता देने के आरोप पहलेपहल सामने आए थे तो एनएसई के प्रबंधन ने उन्हें गलत करार देने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। बाद में जो कुछ हुआ, उससे सिद्घ हो जाता है कि वे जानबूझकर आंखें मूंद रहे थे। नए प्रबंध निदेशक की नियुक्ति के बाद से एक्सचेंज के बारे में अच्छा ही कहा जा रहा है। इस अखबार के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि नियामकीय मसलों से निपटना उनके लिए सबसे अहम काम है। उसके बाद वह प्रभावी ढंग से काम करने के लिए तंत्र एवं प्रक्रियाओं को दुरुस्त करेंगे और एनएसई को सूचीबद्घ कराने के लिए विस्तृत योजना तैयार करेंगे ताकि निवेशकों को इससे बाहर निकलने का रास्ता मिल सके। अपनी प्राथमिकता सूची में वह एक बिंदु और जोड़ सकते हैं: एनएसई के कर्मचारी बहुत समर्पित हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत से इसे महान संस्था बनाया है। इसलिए स्टॉक एक्सचेंज की विश्वसनीयता बहाल करना लिमये की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

Keyword: NSE, Stock exchange, Ashok chawla,
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