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सोहो अर्थव्यवस्था का नई वास्तविकता से पाला

सुदीप्त दे /  July 16, 2017

दिल्ली में अपने घर से काम करने वाले फ्रीलांस लेखक एवं सामग्री निर्माता विकास कुमार इन दिनों काफी चिंतित दिख रहे हैं। लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कुमार की चिंता साफ जाहिर होती है। उन्होंने लिखा है, 'मैं फ्रीलांसर पर जीएसटी के प्रभाव को समझना चाहता हूं और यह जानना चाहता हूं कि नई कर व्यवस्था के तहत उन्हें भारत में किस प्रकार काम करने की जरूरत है। ऐसा लगता है कि हर साल जारी होने वाले नए कर नियमों के तहत फ्रीलांस आय को स्पष्टï नहीं किया जाता है।'
नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत अनुपालन के लिहाज से  यह स्मॉल ऑफिस-होम ऑफिस (सोहो) पेशेवर एवं कारोबारियों को अपनी गतिविधियां सुनिश्चित करने के लिए यह बेहद जरूरी है। 20 लाख रुपये अथवा इससे अधिक सालाना आय वाले पेशेवरों एवं छोटे सेवा प्रदाताओं को अनिवार्य तौर पर जीएसटी के तहत पंजीकृत होने का प्रावधान है। हालांकि वस्तुओं एवं सेवाओं की अंतरराज्यीय बिक्री करने वाले पेशेवरों एवं छोटे कारोबारियों के मामले में यह सीमा अप्रासंगिक हो जाती है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक सेवा कर के दायरे से बाहर रहने वाले तमाम पेशेवर पंजीकरण एवं अनुपालन जरूरतों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पेशेवरों से सेवाएं हासिल करने वाला कोई भी कारोबार जो पंजीकृत नहीं है तो उसे रिवर्स चार्ज ढांचा (आरसीएम) के तहत कर भुगतान करना अनिवार्य होगा। बीएमआर ऐंड एसोसिएट्ïस के लीडर (अप्रत्यक्ष कर) राजीव डिमरी ने कहा, 'अपने स्तर पर अनुपालन जरूरतों के बढऩे से इस प्रकार की कंपनियां गैरपंजीकृत पेशेवरों से सेवाएं हासिल करने से बच रही हैं।' कर विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे में आगे चलकर इस प्रकार के पेशेवर पंजीकृत होने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र में राज्यों के सीमापार सेवाएं देने वाले छोटे सेवा प्रदाताओं पर इसका उल्लेखनीय प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार के तमाम सेवाप्रदाताओं को अब पंजीकरण कराना पड़ेगा और अनुपालन की बढ़ी हुई लागत का भार भी उठाना पड़ेगा।
जाहिर तौर पर नई कर व्यवस्था के लागू होने से कुमार की तरह काम करने वाले फ्रीलांस पेशेवर खुश नहीं होंगे। कुमार ने अपने पोस्ट में इसका संकेत भी दे दिया है, 'अपने प्रमुख काम और जज्बे पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय हमें पूरे साल हरके 10 दिन बाद रिटर्न दाखिल करना पड़ेगा।'

Keyword: Soho, GST, freelancer,
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