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गौरक्षा अराजकता पर कार्रवाई

भाषा /  July 16, 2017

गौरक्षा के नाम पर कानून तोडऩे वालों को चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि राज्य सरकारों को ऐसे असामाजिक तत्त्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और सभी राजनीतिक दलों को गौरक्षा के नाम पर हो रही इस तरह की गुंडागर्दी की कड़ी भत्र्सना करनी चाहिए।
 संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि संसद सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गौरक्षा को कुछ असामाजिक तत्त्वों ने अराजकता फैलाने का माध्यम बना लिया है। इसका फायदा देश में सौहार्द बिगाडऩे में लगे लोग भी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'देश की छवि पर भी इसका असर पड़ रहा है। राज्य सरकारों को ऐसे असामाजिक तत्त्वों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।' मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा के लिए कानून है और कानून तोडऩा कोई विकल्प नहीं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में नेताओं की साख हमारे बीच के ही कुछ नेताओं के बर्ताव की वजह से कठघरे में है। उन्होंने कहा, 'हमें जनता को ये भरोसा दिलाना ही होगा कि हर नेता दागी नहीं, हर नेता पैसे के पीछे नहीं भागता। इसलिए सार्वजनिक जीवन में स्वच्छता के साथ ही भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई भी आवश्यक है।'
 मोदी ने कहा कि हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है कि वह अपने बीच मौजूद ऐसे नेताओं को पहचाने और उन्हें अपने दल की राजनीतिक यात्रा से अलग करता चले। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश को लूटा है, उनके साथ खड़े रह कर देश को कुछ हासिल न हीं होगा। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद एवं उनके परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं के खिलाफ अनियमितताओं के मामले की कानून अनुपालन एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने के मद्देनजर प्रधानमंत्री का यह बयान महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, 'सोमवार से मॉनसून सत्र का प्रारंभ हो रहा है। आज समय की मांग है कि समय का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग हो। एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो पिछले तीन वर्षों मे लगभग हर सत्र में संसद के कामकाज के मामले में काफी बढ़ोतरी हुई है।' उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मॉनसून सत्र में भी समय का सदुपयोग किया जाएगा और ये सत्र संसद के कामकाज के मामले में रिकॉर्ड बनाएगा। इसके लिए सभी दलों की सहभागिता आवश्यक है।
 जीएसटी के लिए सभी राजनीतिक दलों का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू हुए 15 दिन से ज्यादा हो रहे हैं और इन 15 दिनों में ही सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। कई राज्यों के बॉर्डर से चुंगी हट चुकी है और ट्रकों की आवाजाही आसान हुई है।
 प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से केंद्र सरकार प्रयास कर रही है कि जिन व्यापारियों ने अब भी जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वो जल्द से जल्द इस प्रकिया को पूरा करें।  बजट सत्र पहले बुलाने के फायदों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'पिछला बजट सत्र लगभग एक महीना पहले बुलाया गया था। सभी राजनीतिक दलों ने इसमें सहयोग किया था।'
 मोदी ने कहा, 'बजट की पूरी प्रक्रिया एक महीना पहले करने का असर यह हुआ कि मॉनसून से पहले ही अधिकांश विभागों के पास उनकी योजनाओं के लिए तय राशि पहुंच गई। पहले विभागों तक तय योजनाओं का पैसा पहुंचने में दो-तीन महीने लग जाते थे। मॉनसून की वजह से और देरी होती थी।  अब आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है।'
 प्रधानमंत्री ने कहा कि कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल जून के मुकाबले इस बार 30 प्रतिशत ज्यादा राशि खर्च की गई है। आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में इस बार पूंजीगत व्यय पिछले साल के मुकाबले 49 प्रतिशत बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि योजनाओं पर पैसा खर्च करने का जो रुझान सामने आ रहा है, उससे यह तय है कि अब पूरे साल भर एक संतुलित तरीके से योजनाओं पर तय राशि खर्च होगी जबकि पहले मॉनसून खत्म होने के बाद खर्च शुरू होते थे और फिर उस पैसे को मार्च से पहले खत्म करने का दबाव बढ़ जाता था।
 उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाढ़ की स्थिति पर मोदी ने कहा कि देश के कई हिस्सों और विशेषकर उत्तर पूर्व के राज्यों में बाढ़ और बारिश से संकट के हालात बने हुए हैं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है और इस पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ समेत केंद्र सरकार की तमाम एजेंसियां बाढ़ राहत के कार्य में जुटी हुई हैं। राज्य सरकारों को कहा गया है कि वे किसी भी तरह की आवश्यकता पडऩे पर तुरंत बताएं।
 सवर्दलीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष हो रहे हैं, हमें इस पर संसद में चर्चा करनी चाहिए। मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति चुनाव आम सहमति से होता तो अच्छा होता। इसके बावजूद चुनाव अभियान का गरिमा और शालीनता के साथ होना संतोष की बात है। इसके लिए सभी दल बधाई के पात्र हैं। सभी पार्टियां अपने सांसदों-विधायकों को मतदान के लिए प्रशिक्षित करें ताकि एक भी वोट खराब न हो।'   

Keyword: Cow, Narendra modi, prime minister,
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