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इन्फोसिस के पहले कर्मचारी ने शुरू की स्टार्टअप

रघु कृष्णन /  July 16, 2017

एन आर नारायणमूर्ति ने शरद हेगड़े को इन्फोसिस का सहसंस्थापक बनने की पेशकश की थी। दोनों पटनी कंप्यूटर सर्विसेज (पीसीएस) में साथ काम करते थे। वर्ष 1981 में इन्फोसिस की स्थापना करने वाले नंदन नीलेकणी और एस गोपालकृष्ण सहित छह युवा इंजीनियर भी पीसीएस में सहकर्मी थे। हेगड़े ने तब नारायणमूर्ति की सलाह ठुकरा दी थी और अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद 1983 में इन्फोसिस में पहले कर्मचारी बने। दो दशक से भी अधिक समय तक उन्होंने इन्फोसिस में अधिकांश प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में काम किया और कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी बने। उन्हें कंपनी के प्रमुख बैंकिंग सॉल्यूशन फिनेकल का शिल्पी माना जाता है जिसका इस्तेमाल केनरा और आईसीआईसीआई जैसे बैंकों ने किया।
अब 59 साल के हो चुके हेगड़े उद्यमी बन चुके हैं। उनकी स्टार्टअप कंपनी फोनपैसा ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान कंपनी है जो कारोबारियों को सेवा देती है। हेगड़े ने इन्फोसिस में अपने पूर्व सहयोगी सी एस प्रसाद सुब्रमण्यन और पूर्व बैंकर रितेश अग्रवाल के साथ मिलकर फोनपैसा की स्थापना की है। यह हेगड़े का चौथा उपक्रम है। मूर्ति ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में कहा, 'शरद को पैसों की चिंता नहीं थी बल्कि उनका जोर शिक्षा और नवाचार पर था। जब वह इन्फोसिस में थे तो उनसे पूछे बिना कोई तकनीकी फैसला नहीं लिया जाता था। वह कंपनी के बौद्घिक समूह का हिस्सा थे। इन्फोसिस में हमारा एक आदर्श वाक्य था-बुद्घि से संचालित, मूल्यों से प्रेरित। वह इसकी जीती जागती मिसाल थे।'
वर्ष 2002 में इन्फोसिस छोडऩे के बाद हेगड़े ने स्टार्टअप कंपनियों में निवेश किया और उनकी प्रौद्योगिकी संबंधी रणनीति बनाने में मदद की। उन्होंने तीन उपक्रमों कस्टमरएक्सपीएस, ओपनस्ट्रीम और एमवृक्ष मोबाइल सॉल्यूशंस को सहारा दिया। कस्टमएक्सपीएस बैंकिंग धोखाधड़ी से निपटने के लिए सॉफ्टवेयर बनाती है जिसका इस्तेमाल एक्सिस बैंक सहित कई बैंक करते हैं। ओपनस्ट्रीम दवा कंपनियों के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली अमेरिकी कंपनी है। एमवृक्ष मोबाइल सॉल्यूशंस छोटे शहरों को ध्यान में रखकर बनाई गई ई-कॉमर्स कंपनी है।
फोनपैसा के जरिये हेगड़े की नजर टीटीके प्रेस्टीज जैसी बड़ी कंपनियों के ग्राहकों पर है। कंपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान स्वीकार करती है लेकिन उसका तरीका थोड़ा हटकर है। हेगड़े ने कहा, 'हमने कुछ साल पहले इस डिजिटल भुगतान की लहर को आते देखा था।' हेगड़े ने सुब्रमण्यन के साथ मिलकर इस प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे प्रौद्योगिकी ढांचा बनाया है जो एक साथ कई हजार लेनदेन संभाल सकता है। कंपनी ने जो प्लेटफॉर्म बनाया है उसे भारतक्यूआर के साथ जोड़ा जाना है। भारतक्यूआर यूनिवर्सल क्विक रिस्पॉन्स कोड है जिसे पूरे देश में अपनाया जा रहा है। इसके जरिये भुगतान मशीनों के इस्तेमाल के बिना तुरंत डिजिटल भुगतान किया जा सकेगा।
नीलेकणी के साथ काम कर चुके हेगड़े ने यूनिवर्सल पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) शुरुआती दस्तावेज पर काम किया था। यूपीआई एक इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणाली है जो मोबाइल फोन पर लेनदेन की सुविधा देती है। हेगड़े से पूछा गया कि उनके स्मार्टफोन पर किस तरह के ऐप हैं तो उन्होंने कहा, 'मेरा आदर्श स्मार्टफोन ऐप एक सार्वभौमिक बैंकिंग ऐप है जिसे सभी बैंकों में इस्तेमाल किया जा सकता है।'
भारत में डिजिटल भुगतान की प्रवृत्ति बढ़ रही है और फोनपैसा जैसी कंपनियां इस मौके को भुनाना चाहती हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में 25 अरब डिजिटल लेनदेन का लक्ष्य रखा है जो संख्या पिछले वर्ष में 10.2 अरब थी। फोनपैसा के मुख्य कार्याधिकारी रितेश अग्रवाल का कहना है कि उन कंपनियों के लिए बाजार अभी खुला हुआ है जो वेल्यू की पेशकश कर रही हैं। आईसीआईसीआई बैंक में काम कर चुके अग्रवाल ने कहा, 'बाजार को हाथी, बकरी और खरगोश में बांटा जा सकता है। बड़ी कंपनियां हाथी हैं, मझोली और स्थानीय कंपनियां बकरी हैं और किराने की दुकानें खरगोश हैं। हमारी हाथी और खरगोश में दिलचस्पी नहीं है लेकिन मझोली श्रेणी में बहुत संभावना है। अब भी हमारे लिए बहुत बड़ा बाजार है।'

Keyword: Startup, infosys, employee,
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