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आईडीबीआई बैंक: बढ़ते नुकसान से निकलने का दबाव

हंसिनी कार्तिक /  July 16, 2017

जब 13 मई को बाजार को यह पता चला कि वित्त वर्ष 2016 के लिए येस बैंक की गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) का आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के आकलन से अधिक है तो इस बैंक का शेयर 6 फीसदी तक गिर गया। ऐक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में भी इसी वजह से तब गिरावट देखी गई जब इनके एनपीए की हकीकत सामने आई।
हालांकि आईडीबीआई बैंक के मामले में ऐसा नहीं था। मंगलवार की शाम बाजार को वित्त वर्ष 2016 में बताए गए एनपीए में 6,816 करोड़ रुपये के अंतर का पता चला। बैंक ने वित्त वर्ष 2016 के लिए 24,875 करोड़ रुपये का सकल एनपीए दर्ज किया जबकि रिजर्व बैंक के आकलन में यह 31,692 करोड़ रुपये था। इस तरह दोनों आंकड़ों में 27 फीसदी का अंतर है। दूसरी ओर अगले ही दिन आईडीबीआई का शेयर 1.33 फीसदी बढ़ गया। जब वित्त वर्ष 2017 में बैंक सबसे अधिक यानी 21.25 फीसदी का एनपीए बता चुका है तो फिर रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अंतर से बहुत फर्क नहीं पडऩे वाला। वित्त वर्ष 2016 के लिए फंसे कर्ज के प्रावधान में अंतर भी 2,061 करोड़ रुपये था। जहां बैंक ने वित्त वर्ष 2016 में फंसे कर्ज के लिए 10,232 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, वहीं रिजर्व बैंक के आकलन में यह रकम 12,293 करोड़ रुपये थी। अगर इस अंतर को दरकिनार भी कर दें तो भी वित्त वर्ष 2016 में बैंक का सकल एनपीए अनुपात 10.98 फीसदी रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि तीन निजी बैंकों ने निवेशकों की चिंताएं कम करने के लिए स्पष्टïीकरण दिया था, लेकिन उनका वित्त वर्ष 2017 का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2016 की तुलना में बेहतर रहा। पर आईडीबीआई के मामले में ऐसा नहीं था। उदाहरण के लिए, बैंकों का दबाव झेल रही कई कंपनियां तक वित्त वर्ष 2017 में नुकसान से निकल कर मुनाफे में आ गईं जबकि आईडीबीआई बैंक अभी भी नुकसान से जूझ रहा है।

Keyword: Market, yes bank, NPA,
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