बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-नाम सुधार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 23, 2017 07:27 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

ई-नाम सुधार

संपादकीय /  July 12, 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह के आरंभ में एक सम्मेलन में राज्यों के मुख्य सचिवों को सलाह दी कि वे इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चर बाजार (ई-नाम) पर ध्यान केंद्रित करें। यह सुझाव सही समय पर आया है क्योंकि किसानों को फसल का सही मूल्य सुनिश्चित करने में विपणन की अहम भूमिका है। ई-नाम का उद्देश्य है कृषि उपज के लिए देशव्यापी स्तर पर अबाध और पारदर्शी बाजार तैयार करना। परंतु जोरशोर से की गई शुरुआत के एक साल बाद भी यह अपने उद्देश्य प्राप्त करने में पूरी तरह नाकाम रहा। हालांकि देश की 585 प्रमुख मंडियों में से 400 से अधिक में ई-कारोबार की सुविधा है लेकिन पिछले साल बमुश्किल चार फीसदी थोक कृषि कारोबार ही इस माध्यम से हुआ। इस ई-कारोबार में से भी ज्यादातर या तो एक ही मंडी या फिर एक ही राज्य में हुआ। ऐसे में देखा जाए तो किसानों को बिक्री की खातिर देशव्यापी स्तर पर व्यापक खरीदार आधार मुहैया कराने का लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। 

 
जाहिर सी बात है कि नई विपणन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए काफी जमीनी काम करना बाकी है। यह काम न तो इसकी लॉन्चिंग के पहले किया गया, न ही अब किया जा रहा है। ई-नाम को कोई समांतर विपणन तंत्र नहीं होना था बल्कि इसे तो मौजूदा मंडियों की अधोसंरचना का ही लाभ उठाना था ताकि खरीदारों और विक्रेताओं को देशव्यापी कारोबार के लिए ई-प्लेटफार्म भर मुहैया करा दिया जाए। इसके कारोबारियों को एकल लाइसेंस की आवश्यकता होती है। बाजार शुल्क भी एकबारगी और कारोबार की गई वस्तुओं का देश भर में अबाध संचार। दुख की बात है कि अब तक इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं हो सकी है। कुछ ही राज्य ऐसे हैं जिन्होंने कारोबारी लाइसेंस जारी किए हैं। वे भी राज्य के बाहर वैध नहीं हैं। राज्य की सभी मंडियों के शुल्क को सुसंगत बनाने की प्रक्रिया शुल्क के एकल संग्रहण की सुविधा की ओर पहला कदम है। यह भी अभी होना है। वस्तुओं की गुणवत्ता के आकलन की व्यवस्था और उनका समयबद्घ परिवहन तय करना भी अभी बाकी है। अधिक आधारभूत स्तर पर देखें तो राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियमों में भी समुचित संशोधन नहीं किए गए हैं। ऐसे में कृषि जिंसों के अंतरराज्यीय लेनदेन में समस्या आएगी। जिन कानूनों में संशोधन किया भी गया है वे निजी बाजारों को इजाजत दिला पाने में नाकाम रहे हैं। इसके अलावा उनकी बदौलत थोक खरीदारों या अंतिम उपभोक्ता तक पहुंच भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही। बाजार शुल्क और बिचौलियों के कमीशन पर भी इससे जरूरी रोक नहीं लग पा रही। 
 
राज्यों ने पहले ही मंडी स्तर का बुनियादी ढांचा तैयार कर दिया है। ऐसे में ई-कारोबार के लिए सभी राज्यों के बाजारों को आपस में जोडऩे के मामले में कोई समय नहीं गंवाया जाना चाहिए। बाद में इनको अन्य राज्यों की मुख्य मंडियों से जोड़ा जाना चाहिए। एक सच्चा कृषि बाजार तभी आकार लेगा जब देश भर के प्रमुख उत्पादन और खपत केंद्रों की मंडियां एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ दी जाएंगी और उनमें कृषि जिंसों का कारोबार शुरू होगा। यह देखते हुए कि छोटे किसानों की छोटी-छोटी मात्रा वाली उपज को लेकर बड़े खरीदार रुचि नहीं दिखाएंगे, एकीकृत कारोबार की आवश्यकता होगी ताकि उत्पादकों की पसल को इकठ्ठïा कर इनको ई-नाम मंच के जरिये बेचा जाए। इतना ही नहीं चूंकि इलेक्ट्रॉनिक कारोबार की व्यवस्था में भी स्पॉट ट्रेडिंग की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है इसलिए सटोरियों को लेकर अतिशय समझदारी बरतनी होगी। जब तक इन मुद्दों से सही ढंग से नहीं निपटा जाता है तब तक ई-नाम किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में कामयाब नहीं हो सकेगी। 
Keyword: इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चर बाजार (ई-नाम,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 पेमेंट बैंक में प्रतिस्पर्धा होगी ग्राहकों के लिए फायदेमंद?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.