बिजनेस स्टैंडर्ड - एस्सार स्टील का दावा गलत!
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एस्सार स्टील का दावा गलत!

विनय उमरजी / अहमदाबाद July 12, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वकील ने आज एस्सार स्टील मामले में गुजरात उच्च न्यायालय के एकल पीठ के सामने अपनी दलील में कहा कि एस्सार स्टील ने गलत दावा किया है कि उसने अपने पुनर्गठन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली थी और उसे दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी नहीं थी। आरबीआई के वकील डैरियस खंबाटा ने कहा कि लेनदारों के साथ एस्सार स्टील की बैठक के मिनट्ïस से पता चलता है कि कंपनी पुनर्गठन प्रक्रिया से काफी दूर थी और वह नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा शुरू की जा रही दिवालिया प्रक्रिया से भी भलीभांति अवगत थी। अपने खिलाफ शुरू की गई दिवालिया प्रक्रिया को खत्म करने के लिए एस्सार स्टील द्वारा दायर याचिका पर गुजरात उच्च न्यायालय ने आज आरबीआई की दलील सुनी और मामले को 13 जुलाई 2017 यानी गुरुवार के लिए स्थगित कर दिया।

 
आरबीआई के वकील ने अदालत से कहा कि कंपनी के खाते में बैंक की 45,655 करोड़ रुपये की देनदारी है जो बकाया है और 31 मार्च 2016 तक इसमें से 31,671 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए में तब्दील हो चुका था जो 31 मार्च 2017 तक बढ़कर 32,864 करोड़ रुपये हो चुका है। अदालत स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक सहित भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 22 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से एनसीएलटी में एस्सार स्टील के खिलाफ शुरू की गई दिवालिया प्रक्रिया के खिलाफ कंपनी द्वारा 4 जुलाई को दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
 
रिजर्व बैंक के वकील ने कहा कि एस्सार स्टील का यह दावा सही है कि गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) को जल्द से जल्द निपटाने के लिए एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य कम समय में अधिकतम मूल्य हासिल करना है ताकि परिसंपत्तियों को प्रणाली में वापस लाया जा सके। खंबाटा ने यह भी कहा कि एस्सार स्टील एकमात्र ऐसी कंपनी नहीं है जिसके खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिवालिया प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से शुरू की जा रही है जिससे कंपनी के हितों की भी रक्षा होगी।
खंबाटा ने कहा, 'आईबीसी कंपनी को बंद करने के लिए नहीं है बल्कि कंपनी को बंद होने से बचाने के लिए समस्याओं को निपटाने और पुनर्गठन के लिए है।' उन्होंने कहा, '12 एनपीए का वर्गीकरण समाज की अनिवार्यताओंं पर आधारित है। संसद की नजर एनपीए की वसूली पर है अन्यथा सार्वजनिक धन का नुकसान होगा। एनसीएलटी में समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया शुरू की गई है जो वैधानिक प्रावधानों के तहत है। दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का उद्देश्य आर्थिक परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य को प्रणाली में वापस लाना है।'
 
आरबीआई के वकील ने एस्सार स्टील के उस दावे का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि 5,000 करोड़ रुपये का बकाया ऋण आर्बिट्रैरी था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली में कुल 25 एनपीए में से 12 एनपीए का चयन वैज्ञानिक आधार पर किया है। आरबीआई ने 13 जून को जारी अपनी विज्ञप्ति में कहा था कि रिजर्व बैंक ने आंतरिक सहलाकार समिति की सिफारिशों के आधार पर पहचान किए गए खातों के खिलाफ दिवालिया एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए बैंकों को निर्देश दिया है। इस प्रकार के मामले प्राथमिकता के आधर पर एनसीएलटी को सौंपे जाएंगे। न्यायालय ने 4 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए रिजर्व बैंक को स्पष्टïीकरण देने का निर्देश दिया था।
Keyword: essar, एस्सार स्टील RBI, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
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