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भारत में पैर पसारेगी वूलमार्क

विनय उमरजी / अहमदाबाद July 11, 2017

प्रीमियम मरीनो ऊन का आयात बढ़ाने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया की वूलमार्क कंपनी गुजरात और मणिपुर में हथकरघा बुनाई कलस्टरों पर दांव आजमाने की योजना बना रही है। ऑस्ट्रेलिया में वूलमार्क कंपनी से 55,000 ऊन उत्पादक जुड़े हुए हैं। कपड़ा उत्पादों में विभिन्नता की वजह से कंपनी को भारत में मरीनो ऊन के आयात में वृद्धि होने की उम्मीद है। वूलमार्क कंपनी की कंट्री मैनेजर आरती गुडल ने कहा कि भारत की 85 प्रतिशत ऊन कालीन वाली श्रेणी और 10 प्रतिशत अपरिष्कृत श्रेणी वाली होती है। इसमें केवल पांच प्रतिशत ही कपड़े वाली श्रेणी की होती है। कपड़ा और वस्त्र उद्योग ऑस्ट्रेलिया से बड़ी मात्रा में ऊन का आयात करता है। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया की मरीनो ऊन के निर्यात में भारत का हिस्सा केवल पांच प्रतिशत ही, जबकि चीन की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। हालांकि ऐसे क्लसटरों के जरिये हमें भारत के हथकरघा क्षेत्र में प्रीमियम मरीनो ऊन की खपत होने की उम्मीद है।

 
कपड़ा मंत्रालय की सलाहकार (ऊन व्यापार) अदिति राउत ने कहा कि कपड़े की पूरी मूल्य शृंखला में ऊन की कुल 14.8 करोड़ किलोग्राम मांग के मुकाबले भारत केवल 4.8 करोड़ किलोग्राम स्थानीय ऊन का ही उत्पादन करता है और 16.5 करोड़ डॉलर मूल्य की 1.7 करोड़ किलोग्राम ऊन का आयात करता है। 2017-18 के दौरान ऑस्ट्रेलिया में 30 करोड़ किलोग्राम ऊन का उत्पादन होने की उम्मीद है। यह वैश्विक ऊन बाजार का करीब 90 प्रतिशत बैठता है। हालांकि भारत में ऊनी वस्त्र उद्योग में अधिकतर ऑस्टे्रलिया की प्रीमियम ऊन मरीनो का ही इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए वूलमार्क कंपनी को यहां बड़े बाजार की उम्मीद है। ऊन के बड़े बाजार के अंवेषण के प्रयास में वूलमार्क कंपनी पहले ही तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (टी) के साथ गठजोड़ कर चुकी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएम षणमुगम ने कहा कि 26,000 करोड़ रुपये का तिरुपुर कपड़ा उद्योग कपास पर बहुत निर्भर रहता है। हालांकि पिछले साल उद्योग संघ ने बुनाई के लिए मरीनो ऊन के इस्तेमाल पर एक कार्यशाला की शुरुआत की थी। अब तक सात कंपनियां ऊन के बुने हुए वस्त्रों का विनिर्माण शुरू कर चुकी हैं।
 
आयात को और अधिक बढ़ाने के उद्देश्य से वूलमार्क कंपनी 'ऑस्ट्रेलिया में विकसित और भारत में निर्मित' अभियान के दूसरे चरण की भी घोषणा कर चुकी है। भारत में विशेष पहनावे के रूप में रूपांतरित होने से पहले कंपनी ऑस्ट्रेलिया में विकसित की जाने वाली मरीनो ऊन की 'फार्म-टु-फैशन' यात्रा को उजागर करेगी। कंपनी का उद्देश्य पूरी ऊन आपूर्ति शृंखला में भारत सरकार, विनिर्माताओं और ब्रांडों को जोडऩे का है। इस वर्ष कंपनी इस सफरनामे में उपभोक्ताओं को भी शामिल करेगी। गुडल ने कहा कि यह अभियान चार माह लंबा होगा जो सितंबर से शुरू होकर दिसंबर में जाकर समाप्त होगा। इस अभियान के जरिये हम अपने इस सफर के अलग-अलग भागीदारों को प्रकाश में लाएंगे जिसमें हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के बुनकर, ऊनी शाल और वस्त्र उद्योग तथा व्यावसायिक ब्रांडों के साथ किए गए हमारे वे गठजोड़ शामिल होंगे जिन्होंने भारत में मरीनो ऊन का समर्थन किया है।
Keyword: woolmark, india,,
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