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'खुद के दम पर आगे बढऩे की ताकत नहीं'

अनूप रॉय /  July 11, 2017

आईडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक राजीव लाल के मुताबिक, श्रीराम कैपिटल और आईडीएफसी समूह के बीच विलय का प्रस्ताव काफी मजबूत भरोसे के साथ आया है कि सौदे से जुड़ी जटिलताओं के बावजूद संबंध कारगर रहेंगे। अनूप रॉय को दिए साक्षात्कार के मुख्य अंश:

 
आप काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आपका बैंक 2015 में स्थापित हुआ। इस हड़बड़ी की क्या वजह है?
 
वास्तविकता यह है कि हमने काफी बड़ी बैलेंस शीट के साथ शुरुआत की और सूचीबद्धता के साथ भी। ऐसे में रणनीति तैयार करने के मामले में नया बैंक शुरू करने के मुकाबले अलग तरह की परेशानियां होती हैं। आपको काफी संतुलन बनाना होता है। हितधारकों के मजबूत समूह को खुद के दम पर पूरी तरह से संतुष्ट करना काफी मुश्किल होगा। हमारा मानना है कि विलय के जरिए इन चुनौतियों से निपटना रणनीतिक तौर पर सही है ताकि शेयरधारकों को संतुष्ट किया जा सके।
 
इन शेयरधारकों में सरकार भी शामिल है?
 
हां, हर शेयरधारक। 
 
यह मामला अलग तरह के संगठन की तरफ से जटिल सौदे के तहत विलय की कोशिश है?
 
हमें यह बताना होगा कि आपके नजरिये से बैंक क्या होता है और बैंक के नजरिये से बैंंक कैसा होना चाहिए। हर तरह का बदलाव देश व सभी हितधारकों के हित में होना चाहिए। प्रतिस्पर्धी माहौल में दूसरों की तरह बैंक स्थापित करने के लिए हमें भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस नहीं मिला। हमें नई पीढ़ी का बैंकिंग संस्थान बनाने का मौका दिया गया, जो नियमन, तकनीक में हुए सभी बदलाव का फायदा उठाता है और वास्तव में हमने देश में बैंकिंग सेवाओं को आगे बढ़ाने में इसकी मदद ली है।
 
आरबीआई के नियम को देखते हुए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस और आईडीएफसी बैंक एक ही छत के नीचे किस तरह से होंगे?
 
यह सही नहीं है। आपको सावधानी से नियमों को देखना होगा। आरबीआई अब इस विचार पर नजर डाल रहा है कि नॉन ऑपरेटिव फाइनैंशियल होल्डिंग कंपनी के तौर पर कुछ कामकाज बैंक से बाहर भी जारी रखा जाना चाहिए। मेरी राय में यह तभी संभव है जब कारोबार खास तौर से वित्तीय समावेशन पर केंद्रित हो। 
 
क्या आपने इस विलय पर आरबीआई से पहले चर्चा की थी?
 
हम हमेशा से आरबीआई से बात करते हैं। ऐसे में हमने बाजार को जो सूचना दी है वह उन्हें शायद ही आश्चर्यचकित करेगा।
 
क्या आरबीआई इस व्यवस्था से संतुष्ट है?
 
जब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल जाती, हम सबकुछ ठीक नहीं मान सकते। हम आरबीआई के नियमों के हिसाब से आगे बढ़ रहे हैं।
 
आप दो ब्रांडों को कैसे एकीकृत करेंगे?
 
परिचालन के स्तर पर यह आईडीएफसी-श्रीराम होगा। आरबीआई की इजाजत से हम बैंक को आईडीएफसी-श्रीराम बैंक कहना पसंद करेंगे। श्रीराम ट्रांसपोर्ट को आईडीएफसी-श्रीराम ट्रांसपोर्ट के नाम से जाना जाएगा।
 
विश्लेषकों का कहना है कि यह सौदा आईडीएफसी व आईडीएफसी बैंक के शेयरधारकों की संपत्तियों में इजाफा करने में मदद नहीं करेगा?
 
यह सही नहीं है। जब जांच-परख (डिलिजेंस) की गई और अंतिम आंकड़े सामने आए तो हमें भरोसा हो गया कि यह दोनों शेयरधारकों के ईपीएस में इजाफा करेगा। ट्रांसपोर्ट फाइनैंस कंपनी का सालाना मुनाफा 1,300 करोड़ रुपये होगा, जो सालाना 15-20 फीसदी बढ़ रहा है और यह सीधे आईडीएफसी के शेयरधारकों को जाएगा। ऐसे में लाभांश प्रतिफल निश्चित तौर पर आगे जाएगा।
Keyword: IDFC bank, आईडीएफसी बैंक,
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