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सस्ते कपड़े अब और भी सस्ते!

दिलीप कुमार झा / मुंबई July 10, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत परिधानों पर शुल्क की दर पहले से कम होने के कारण इन पर अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) 2 से 3 फीसदी घट सकती हैं। परिधानों की नई खेप बाजार में एक महीने में आने के आसार हैं। पिछले महीने जीएसटी परिषद ने 1,000 रुपये से कम के परिधानों पर कर की दर 5 फीसदी और और उससे अधिक कीमत के कपड़ों पर जीएसटी दर 12 फीसदी तय की थी। जीएसटी लागू होने से पहले सभी परिधानों पर 7 फीसदी कर लगता था। 
 
वहीं जीएसटी के तहत इस उद्योग के कुछ मशीनरी उत्पादों पर 18 फीसदी और 28 फीसदी कर की दर तय की गई है, जो पहले क्रमश: 25 फीसदी और 35 फीसदी थी। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय में कपड़ा आयुक्त कविता गुप्ता ने कहा, 'जीएसटी प्रणाली के तहत परिधान मूल्य शृंखला में विभिन्न उत्पादों पर शुल्क कम हुए हैं, जिससे कपड़ा उद्योग को निश्चित रूप से फायदा होगा।' उन्होंने यह बात 65वें राष्ट्रीय परिधान मेले से इतर कही। इस मेले का आयोजन परिधान उद्योग की शीर्ष संस्था क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) कर रही है। मेले में 1,000 से ज्यादा स्टॉल लगे हैं और सभी प्रमुख परिधान ब्रांड अपने उत्पादों की प्रदर्शनी कर रहे हैं। 
 
कपड़ा कारोबारियों के विरोध प्रदर्शन के बारे में गुप्ता ने कहा, 'कारोबारियों को जीएसटी के बारे में धीरे-धीरे पता चलेगा। यह एक सतत प्रक्रिया है, जिससे कपड़ा कारोबारी धीरे-धीरे परिचित होंगे।' उद्योग खुद को होने वाले इस फायदे का लाभ ग्राहकों को देने की तैयारी कर रहा है। बाजार में आने वाले नए स्टॉक में एमआरपी को घटाया जाएगा। जीएसटी दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण पिछले कुछ महीनों के दौरान बहुत से कपड़ा विनिर्माताओं ने कपड़े बनाने की रफ्तार धीमी कर दी थी। जून में जीएसटी की दर तय होने के बाद परिधान विनिर्माता 1 जुलाई से इसके लागू होने को लेकर आशंकित थे। अब इसके लागू होने को लेकर बना हुआ संदेह धीरे-धीरे खत्म हो गया है। 
 
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा, 'जीएसटी प्रणाली के तहत 1,000 रुपये से कम कीमत के परिधान 2 से 3 फीसदी हो जाएंगे। लेकिन इससे अधिक कीमत के कपड़े इतने ही महंगे हो जाएंगे। जीएसटी प्रणाली के तहत इनपुट क्रेडिट दिए जाने और 1,000 रुपये से कम कीमत के परिधानों का कुल परिधान विनिर्माण में इससे अधिक के कीमत के परिधानों की तुलना में दोगुना हिस्सा होने से परिधानों की कीमतों में औसत गिरावट 2 से 3 फीसदी के बीच रहेगी।'
 
फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश बियाणी ने कर फायदे का लाभ ग्राहकों को पहुंचाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, 'जीएसटी लागू होने से कपड़ा उद्योग के लिए कारोबार करना आसान होगा। बहुत से करों की प्रणाली के बजाय हमें एक कर चुकाना होगा, जो उद्योग के लिए फायदेमंद है। इसके साथ ही कर नियमों का पालन करना पहले की तुलना में ज्यादा आसान हो जाएगा।'
 
विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए कर ढांचे के तहत छूट और मुफ्त उपहारों में कमी आएगी क्योंकि विनिर्माताओं का मार्जिन घट जाएगा। मेहता ने कहा, 'परिधान मौसमी उत्पाद है, इसलिए हमें स्टोरों में नए परिधानों को जगह देने के लिए अलमारियों से पुराने कपड़ों को हटाना पड़ता है, जो छूट के प्रचार के जरिये संभव है। इसलिए मौसमी छूट आगे भी जारी रहेंगी। लेकिन परिधान विनिर्माताओं की कुल औसत आय और शुद्ध मुनाफे में गिरावट आने के कारण छूट की अवधि में निश्चित रूप से कमी आएगी। कुछ साल पहले तक उद्योग कभी-कभी छूट देता था, मगर अब पूरे साल छूट चलती रहती है। इस तरह इन छूट योजनाओं से परिधान विनिर्माताओं के मुनाफे पर चोट पड़ी है।'
 
 
Keyword: textiles, कपड़ा निर्यातक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी),
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