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जीएसटी का पहला हफ्ता उधेड़बुन में ही बीता

निवेदिता मुखर्जी और अर्णव दत्ता / नई दिल्ली 07 09, 2017

असमंजस बरकरार

नए-नए बयान और अधिसूचना से बनी भ्रम की स्थिति
पुराने माल को नए एमआरपी पर बेचने की अधिसूचना ने भी बढ़ाई मुश्किल
कई जगह कारोबारियों ने बनाए गलत बिल

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर जागरूकता की कमी और अंतिम समय में तमाम जानकारियां देने से कारोबारियों को इसे सुगमता से लागू करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह कहना है विभिन्न क्षेत्रों के ग्राहकों के साथ काम करने वाले एक शीर्ष  कंसल्टेंट का। उनका कहना है कि नई कर प्रणाली को लागू करने के बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यशालाएं आयोजित करने की जगह करीब तीन महीने पहले से ही ऐसा करना चाहिए था।

जीएसटी पर जुड़े एक शख्स ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा बयानों और अधिसूचनाओं से भी भ्रम की स्थिति बनी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की हालिया अधिसूचना में कहा गया है कि जीएसटी से पहले के स्टॉक को संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही बेचा जा सकता है लेकिन इसमें कई जटिलताएं जुड़ी हैं। उनका कहना है कि नई कराधान व्यवस्था से संबंधित सभी तरह की घोषणाओं के लिए वित्त मंत्रालय को ही एकमात्र नोडल निकाय  होना चाहिए।

पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर, अप्रत्यक्ष कर और जीएसटी अनीता रस्तोगी ने कहा, 'पहले हफ्ते को अच्छा नहीं कहा जा सकता...हमें परेशानी का अहसास था लेकिन समस्या उससे कहीं ज्यादा देखी गई।' ईवाई में टैक्स पार्टनर बिपिन सप्रा ने कहा, 'जीएसटी के लागू होने के पहले हफ्ते में कारोबारी लेनदेन में तो कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन डीलर अब भी जीएसटी के पूरा प्रभाव को समझने में लगे हैं।'

जीएसटी के पहले हफ्ते में कई दुकानदारों और डीलरों द्वारा गलत तरीके से बिल बनाए गए। जीएसटी के एक विशेषज्ञ ने कहा, 'मेरी काम दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और इसे वर्कशॉप में ले जाना पड़ा था। लेकिन बिल बनाने में चार दिन लग गया।' कई मामलों में सरकार द्वारा कर विशेषज्ञों और सलाहकारों को पहले जो दिशानिर्देश दिए गए थे और अब सरकार के ट्विटर हैंडल से जो कहा गया है, उसमें विरोधाभास है। उन्होंने कहा, 'कानून की व्याख्या हर दिन बदल रही है। हमारा काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है क्योंकि ग्राहक, खासकर मझोली आकार की कंपनियां जीएसटी को लागू करने में परेशानी का सामना कर रही हैं।'

बड़े शहरो में भी इस सप्ताहांत दुकानदारों को जीएसटी के असर से दो-चार होना पड़ा जब कंपनियों ने उनसे कहा कि चीजें छूट पर बेची जा रही हैं क्योंकि नया कर नहीं लगाया जा रहा है। एक खुदरा व्यापारी ने कहा कि सच्चाई यह है कि वे खुद जीएसटी के लिए तैयार नहीं थे। जीएसटी के क्रियान्वयन से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि सरकार ने इसकी गुणवत्ता के बजाय इसे तेजी से लागू करने पर ज्यादा जोर दिया।

जीएसटी का सबसे ज्यादा असर 320,000 करोड़ रुपये के एफएमसीजी क्षेत्र में देखने को मिला है। इस क्षेत्र की कंपनियों ने जून में महीने में पुराने माल को खपाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अब नई कीमत पर नए माल का स्टॉक बनाना चुनौती है। विश्लेषकों का कहना है कि इन कंपनियों के 15 से 20 फीसदी कारोबार साझेदारों जैसे थोक और खुदरा कारोबारियों ने अभी तक जीएसटी के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। एडलवाइस के मुताबिक जीएसटी से एफएमसीजी कंपनियों का राजस्व और मुनाफा प्रभावित हो सकता है। अलबत्ता कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कारोबारियों ने जीएसटी को सफलतापूर्वक अपना लिया है। हालांकि जीएसटी को लेकर चीजें पूरी तरह साफ नहीं हैं।
Keyword: अधिसूचना, एमआरपी, बिल, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, सुगमता, ऑनलाइन, ऑफलाइन, कार्यशाला,
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