Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, July 23, 2017 10:16 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विश्लेषण खबर

सोने की खरीद के कम होते मुरीद

राजेश भयानी /  July 09, 2017

एक जमाने से सोना खरीदना निवेशकों की पहली पसंद रहा है। आज भी बहुत से निवेशक हर महीने सोने की  एक या दो गिन्नी जरूर खरीदते हैं और इन्हें जमा करते जाते हैं। यह उनका सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का तरीका होता है। सोना खरीदने के पक्ष में कई तर्क दिए जाते हैं, जिनमें महंगाई से बचाव, कीमत हमेशा बने रहना और सुरक्षित निवेश का माध्यम आदि शामिल हैं।

 
हालांकि ऐसा लगता है कि पिछले कुछ वर्षों से स्थितियां बदल रही हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट से सोने की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे महंगाई के समायोजन के बाद मिलने वाले प्रतिफल में कमी आ रही है। उदाहरण के लिए महंगाई की दर वर्ष 2013 में 10 फीसदी से अधिक थी, जो अब गिरकर 3.2 फीसदी (जनवरी से मई 2017 का औसत) पर आ गई है। इसकी तुलना में सोना वर्ष 2012 में 30,490 रुपये प्रति 10 ग्राम था और इस समय भी यह 28,000 रुपये के आस पास है। पिछले 5 वर्षों के दौरान केवल एक बार को छोड़कर अन्य वर्षों में सोने का महंगाई समायोजित प्रतिफल ऋणात्मक रहा है। नतीजतन सोने की निवेश मांग पिछले एक दशक में 350 टन प्रतिवर्ष के मुकाबले घटकर आधी रह गई है। यहां तक कि हाल के वर्षों में तो आभूषणों की मांग भी घटी है। 
 
दुनियाभर में कमजोरी का रुझान  
 
इस पीली धातु के कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट से बाहर निकल आई है। लंदन की एक कंपनी लैंबर्ट कमोडिटीज के संस्थापक ज्यां फ्रांस्वा लैंबर्ट के मुताबिक, 'दुनिया और डॉलर के लिए अच्छी खबरें स्वर्ण निवेशकों के लिए बहुत अच्छी नहीं हैं।' पुराने जमाने से ही सोने ने आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से बचाव का काम किया है। लैंबर्ट ने कहा, 'अर्थव्यवस्था की सेहत बेहतर होती जा रही है। संभावित भूराजनीतिक संकटों के सिर उठाने की आशंका तो है, लेकिन अभी तक बाजारों ने इनकी अनदेखी की है। फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने से डॉलर मजबूत होगा। यहां तक कि सोने की वैश्विक मांग में आधा हिस्सा रखने वाले भारत और चीन की भौतिक मांग भी लगातार कमजोर बनी हुई है। इन सब का यही मतलब है कि सोने को कहीं से भी समर्थन नहीं मिल रहा है।' 
 
यहां तक कि दुनिया में केंद्रीय बैंक भी सोने की कम खरीद कर रहे हैं। लैंबर ने कहा, 'केंद्रीय बैंकों की प्रमुख चिंता महंगाई नहीं होना है, इसलिए वे अर्थव्यवस्था में नकदी की मात्रा बढ़ाकर खर्च में इजाफा करने के कदम उठा रहे हैं। महंगाई नहीं होना या बहुत कम होने का मतलब है कि महंगाई के मुकाबले सोने के प्रदर्शन की तुलना करना तर्कसंगत नहीं है।' अपनी मार्च 2017 की तिमाही मांग की रिपोर्ट में विश्व स्वर्ण परिषद ने कहा, 'केंद्रीय बैंकों की सोने की मांग 2016 की पहली तिमाही में 104.1 टन के मुकाबले 27 फीसदी घटी है। केंद्रीय बैंकों की सोने की मांग की 2014 के मध्य में 174.9 टन के सर्वोच्च स्तर से लगातार कम हो रही है। चालू कैलेंडर वर्ष में भी कम खरीद का रुझान बने रहने के आसार हैं।'
 
विविधीकरण के लिए करें निवेश  
 
हालांकि निवेश सलाहकारों का सोने में भरोसा अब भी खत्म नहीं हुआ है। उनका सुझाव है कि विविधीकरण के लिए पोर्टफोलियो में एक छोटा हिस्सा पीली धातु में निवेश का भी होनाचाहिए। विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सोने की निवेश मांग कैलेंडर वर्ष 2016 में 161.7 टन रही। वर्ष 2017 की मार्च तिमाही में यह महज 31.2 टन रही। जुलाई से 3 फीसदी जीएसटी लगने से सोना और महंगा हो गया है। अब सोने में बिना हिसाब वाले धन का निवेश करना भी मुश्किल हो जाएगा। विश्व स्वर्ण परिषद में भारत के प्रबंध निदेशक पी आर सोमसुदंरम ने पहले कहा था कि सोने के बाजार को स्थिर होने और जीएसटी के साथ समायोजित होने में कम से कम एक साल लगेगा। फिक्की की सराफा समिति के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल कहते हैं, 'सोने में निवेश निचले स्तरों पर स्थिर होगा।' मुंबई के सराफा विश्लेषक भार्गव वैद्य सलाह देते हैं कि निवेशक सोने को लंबी अवधि में आकर्षक प्रतिफल देने वाला निवेश का जरिया नहीं मानते हैं, बल्कि इसे हमेशा अपनी कीमत बरकरार रखने वाली संपत्ति के रूप में देखते हैं। 
 
वह कहते हैं, 'सोना कभी इन्फोसिस के शेयरों की तरह प्रदर्शन नहीं करेगा। यह एक बचत है, जिसे आपको अपनी कारोबारी पूंजी और अपने खर्च से अलग रखना चाहिए। यह स्त्रीधन सुरक्षा भी मुहैया करा सकता है।' इसके अलावा जिस तरह सरकार विमुद्रीकरण यानी करेंसी नोटों को चलन से बाहर कर सकती है, वैसे सोने को विमुद्रित नहीं किया जा सकता है। जब वैश्विक या मुद्रा संकट आता है तो सोना एक उपयोगी संपत्ति साबित होता है। वैद्य कहते हैं, 'संकट के ऐसे समय में केवल यही एकमात्र ऐसी संपत्ति है, जो दुनियाभर में स्वीकार की जाती है।'
 
 
सोना पुराना, नहीं रहेगा सुहाना
 
भारतीयों के लिए सोना हमेशा ऐसी संपत्ति रहा है, जिसे कभी भी आसानी से बेचकर नकदी हासिल की जा सकती है। हालांकि कर की नीतियों में बदलाव का मतलब है कि अब यह संभव नहीं होगा। अभी तक सोने की थोड़ी सी मात्रा (माना कि 50 ग्राम) को बेचने में कोई दिक्कत नहीं आती थी। व्यक्ति पुराना सोना खरीदने वाले कारोबारी को तुरंत अपना पुराना सोना बेच सकता था। 
 
सराफ सोने की शुद्धता जांचकर आपको तुरंत भुगतान कर देता था। मगर अब वह आपसे खरीद के बिल मांगेगा। उसे इन बिलों की तब जरूरत पड़ेगी, जब वह पुराने सोने को किसी आभूषण विनिर्माता को बेचेगा। विक्रेता को अपना पैन नंबर भी देना होगा।  साथ ही पुराने सोने की बिक्री पर 3 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लगेगा। मुंबई में पुराने सोने के एक कारोबारी ने कहा, 'न तो ग्राहकों के पास खरीद दिखाने के लिए बिल होते हैं और न ही हमारे पास इतनी नकदी होती है। जीएसटी से हमारे लिए बिना बिलों वाले पुराने सोने का कारोबार करना और मुश्किल हो जाएगा।' दूसरे शब्दों में अब जिस सोने के बिल नहीं होंगे, वह मुश्किल समय में इस्तेमाल किया जा सकने वाला धन नहीं रह जाएगा। अब व्यक्ति मुश्किल समय में इसे बेचकर पैसा नहीं पा सकेगा। सोने की बिक्री से मिलने वाला पैसा भी चेक या बैंक खाते में मिलेगा। 
 
एक तरीका: गोल्ड बॉन्ड का 
 
निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की 8 से 12 फीसदी राशि सोने में निवेश करनी चाहिए। दूसरा सवाल यह पैदा होता है कि यह निवेश सीधे सोने की खरीद में किया जाए या सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) में। युद्ध जैसे सबसे बुरे दौर में पास में रखा चमकदार सोना बेहतर विकल्प है क्योंकि उस समय एक्सचेंज काम करना बंद कर सकते हैं। अन्य ज्यादातर परिस्थितियों मे सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड ही बेहतर विकल्प होते हैं। इसलिए कुछ निवेश सीधे सोने में और कुछ सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में किया जाना चाहिए। 
 
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड को खरीदकर उनके 8 साल में परिपक्व होने तक रखा जाना चाहिए। पास में रखे सोने पर 3 फीसदी जीएसटी लगेगा और इसलिए उसकी ज्यादा लागत आएगी। लेकिन सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड पर यह कर नहीं लगेगा। गोल्ड बॉन्ड को डीमैट फॉर्म में खरीदने से सुरक्षा का जोखिम भी खत्म हो जाता है। इनसे शुरुआत में निवेश की गई राशि पर 2.5 फीसदी सालाना प्रतिफल मिलता है। ज्यादातर विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में सोने का प्रतिफल नहीं सुधरेगा। हालांकि कुछ का ज्यादा आशावादी नजरिया है। इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता कहते हैं, 'नोटबंदी के असर के कारण हाल के कुछ महीनों में कारोबार अच्छा नहीं रहा है, लेकिन कीमतों का वर्तमान स्तर खरीद के अनुकूल है। जीएसटी लागू होने के 45 दिनों के भीतर उद्योग के लिए अच्छा समय लौट आएगा क्योंकि त्योहारी सीजन शुरू हो जाएगा।' उनका मानना है कि तत्काल तो नहीं लेकिन भविष्य में सोना वर्तमान स्तर के मुकाबले 13 फीसदी बढ़कर 1,400 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच सकता है। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या रिलायंस के मुफ्त फोन से अन्य कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.