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'बाधा आएगी तो तत्काल होगा समाधान'

बीएस संवाददाता /  July 09, 2017

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग (सीबीईसी) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीबीईसी प्रमुख वनजा सरना ने कहा कि अगर कोई बाधा आएगी तो यथाशीघ्र इसका समाधान हो जाएगा। दिलाशा सेठ ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बात की। प्रमुख अंश: 

 
अगले 15 दिनों के लिए आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता क्या होगी?
 
जीएसटी का कानूनी ढांचा प्रभावी होने के बाद अगला महत्त्वपूर्ण कदम करदाताओं और अन्य संबंधित पक्षों को इस नई प्रणाली में आगे बढऩे में मदद करना है। जीएसटी से जुड़ी शर्तें पूरी करने में हम उनकी मदद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में जीएसटी सेवा केंद्र खोल गए हैं, जहां करदाताओं को सभी तरह की मदद मिल जाएगी। 
 
सीबीईसी जीएसटी के लिए कितनी तैयार है?
 
हम पूरी तरह तैयार हैं। नई जीएसटी संरचनाएं 22 जून से ही प्रभाव में आ गई हैं। कुल 21 मंडल हैं, जिनमें 107 आयुक्त कार्यालय और उप आयुक्त कार्यालय हैं। इन्हें और सुगम बनाने के लिए इन्हें विभिन्न हिस्सों में विभाजित किया गया है। मजबूत सूचना तकनीक तंत्र के लिए महानिदेशक (सिस्टम) को और अधिक मजबूत बनाया गया है। दूसरे प्रमुख निदेशालयों जैसे नैशनल अकेडमी ऑफ कस्टम्स, इन्डायरेक्ट टैक्सेस ऐंड नारकोटिक्स, डायरेक्टर जनरल ऑफ टैक्सपेयर सर्विसेस और डायरेक्टर जनरल ऑफ गुड्स ऐंड सर्विसेस इंटेलीजेंस का भी विस्तार हुआ है।
 
जीएसटी क्रियान्वयन के पहले महीने में किस तरह की दिक्कतें आ सकती हैं?
 
जो दिक्कतें आ सकती थीं, उनका समाधान पहले ही खोज लिया गया था। हालांकि इसमें कोई शक नहीं कि जीएसटी प्रणाली लागू होना अपने आप में बड़ी बात है, इसलिए कुछ न कुछ दिक्कतें आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। खैर, विभाग इनके लिए पूरी तरह मुस्तैद है और कोई समस्या आएगी तो समय रहते इन्हें दूर कर लिया जाएगा। 
 
किसी साल उपकर संग्रह में कमी होने पर केंद्र राज्यों को किस तरह भरपाई करेगा?
 
मोटे तौर पर जीएसटी से पहले ही सभी जिंसों की दरें तय कर ली गई थीं। इस तरह, इन पर लगने वाले उपकर पर भी फैसला हो गया था। जीएसटी की संरचना कुल मिलाकर ऐसी है कि इससे कर नियमों का पालन बढ़ेगा। ऐसा होने पर उपकर संग्रह में कमी नहीं आनी चाहिए। आवश्यकता पडऩे पर जीएसटी परिषद किसी भी मौजूदा जिंस पर मुआवजा दरें बढ़ाने का फैसला कर सकती है या ऐसी आपूर्ति बहाल कर सकती है जिस पर उपकर लग सकता है।
 
क्या सरकार कपड़ा क्षेत्र की चिंताओं पर ध्यान देगी? बताया जा रहा है कि एक महीने में तीन रिटर्न भरने में छोटे कारोबारी मुश्किलों से जूझ रह हैं।
 
मोटे तौर पर फिटमेंट कमेटी विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं पर चर्चा कर चुकी है। जहां तक रिटर्न की बात है तो करदाताओं को केवल एक रिटर्न स्वयं दाखिल करना होता है। दूसरे रिटर्न सिस्टम से स्वयं ही दाखिल हो जाते हैं। इसके अलावा राज्य के भीतर बिक्री करने वाले छोटे करदाताओं को बिक्री का सारांश देना होता है न कि बिल से जुड़ी जानकारियां। 
 
जीएसटी शुरू होने के बाद कुछ कंपनियों ने कीमतें कम कर दी हैं। क्या यह मुनाफा निरोधक कानून के डर से हुआ है?
 
इनपुट टैक्स क्रेडिट के निर्बाध प्रवाह से विभिन्न जिंसों की कीमतों में कमी आएगी। ग्राहकों को जीएसटी का लाभ देने में सरकार व्यापार एवं उद्योग को महत्त्वपूर्ण मानती है। विभिन्न क्षेत्रों के भीतर प्रतिस्पद्र्धा अपने आप में मुनाफा निरोधक प्रणाली के तौर पर काम करती हैं। जब ग्राहकों को लाभ देने में दूसरे कारक मदद नहीं करेंगे तब मुनाफा निरोधक कानून अपना काम करेगा। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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