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जवाबदेही के लिए तैयार नहीं हैं आपूर्ति शृंखला के बिचौलिये

अदिति दिवेकर /  July 09, 2017

माल ढुलाई एवं परिवहन क्षेत्र के अधिकतर संगठनों के सदस्य कैरिज बाई रोड ऐक्ट, 2007 और कैरिज बाई रोड रूल्स, 2011 के तहत अभी भी पंजीकृत नहीं हुए हैं। ऐसे में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बावजूद व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने का पूरा उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पाएगा। चेन्नई गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के कार्यकारी परिषद के सदस्य एनवी प्रकाश राजू ने कहा, 'हमारे एसोसिएशन के 300 से अधिक सदस्य हैं और इनमें अधिकतर सदस्य अभी भी कैरिज बाई रोड ऐक्ट के तहत पंजीकृत नहीं हो पाए हैं।' उन्होंने कहा, 'हम समझते हैं कि राज्य परिवहन प्राधिकरण (जो पंजीकरण प्रक्रिया का संचालन करता है) में कर्मचारियों की किल्लत है और इसलिए पंजीकण की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही है।'

 
चेन्नई गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन इस परिस्थिति से जूझने वाला एकमात्र परिवहन संगठन नहीं है। दिल्ली गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन भी समान नाव मेंं सवार है। दिल्ली गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव परमीत सिंह गोल्डी ने कहा, 'इस कानून के तहत पंजीकरण के बारे में अभी काफी उलझन है और इसलिए हमारे 700 से 800 सदस्य अभी तक पंजीकृत नहीं हुए हैं।' उन्होंने कहा, 'जीएसटी के प्रावधानों को अभी भी सही तरीके से कोई नहीं समझ पाया है, लेकिन सौभाग्य से हमें छूट दी गई है और इसलिए हमें जीएसटी पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन इस कानून के तहत पंजीकरण के लिए दबाव है, हम (सदस्य) जल्द ही पंजीकृत होंगे।'
 
जीएसटी के तहत सरकार ने ई-वे बिल प्रणाली लाएगी। इसके तहत 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं की ढुलाई के लिए पंजीकृत कंपनी को जीएसटी पोर्टल पर माल का ऑनलाइन पंजीकरण कराते हुए ई-वे बिल लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई पंजीकृत कंपनी ई-वे बिल हासिल नहीं कर पाती है और माल ट्रांसपोर्टर को हस्तांतरित कर देती है तो पंजीकृत कंपनी को ट्रांसपोर्टर से संबंधित जानकारी साझा प्लेटफॉर्म पर देना अनिवार्य होगा और ई-बिल ट्रांसपोर्टर द्वारा तैयार किया जाएगा।
 
माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर को यात्रा के दौरान इनवॉइस/आपूर्ति बिल अथवा डिलिवरी चलान के साथ ई-वे बिल को भी अवश्य साथ रखना होगा। चूंकि लेनदेन को अंतत: जीएसटी प्रणाली के तहत दर्ज किया जाएगा और ऐसे में इस कानून के तहत ट्रांसपोर्टर बिचौलियों के पंजीकरण के अभाव से समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जीएसटी व्यवस्था के तहत आपूर्ति शृंखला से जुड़े सभी बिचौलियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। उनके लिए भी लेनदेन का खुलासा करना अनिवार्य किया गया है ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आपूर्ति शृंखला के बिचौलियों में वस्तु एवं परिवहन एजेंट (जीटीए), फ्रेट एग्रीगेटर, आपूर्तिकर्ता एवं माल प्राप्तकर्ता के बीच लिंक की भूमिका निभाने वाली लॉजिस्टिक्स फर्म आदि शामिल हैं।
 
इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के वरिष्ठï फेलो एवं संयोजक एसपी सिंह ने कहा, 'आपूर्ति शृंखला के बिचौलियों को 2011 में इस कानून के तहत 180 दिनों के भीतर पंजीकृत होने के लिए कहा गया था। इस पंजीकरण में तीन दिन लगे थे। लेकिन अधिकतर लोगोंं ने अभी तक पंजीकरण क्यों नहीं कराया? इसमें कोई संशय नहीं था और यदि कुछ होता भी तो उन्हें उसी समय संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए था।' इस स्वतंत्र अनुसंधान संस्था का दावा है कि प्रमुख आपूर्ति शृंखला के 90 फीसदी से अधिक सेवा प्रदाताओं का कैरिज ऐक्ट के तहत पंजीकृत न होने के कारण लेनदेन का रिकॉर्ड नहीं होगा।
 
इस बीच, बंबई गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कहा कि उसके करीब 90 फीसदी सदस्य पहले से ही पंजीकृत हैं और नियमों का अनुपालन कर रहे हैं। बंबई गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रबंधन समिति के सदस्य अनिल मित्तल ने कहा, 'सदस्यों को पता है कि इस कानून के तहत पंजीकरण अनिवार्य है और इसकी जागरूकता के लिए सेमिनारों का आयोजन भी किया गया। इसके करीब 300 सदस्य हैं और पंजीकरण की प्रक्रिया बिल्कुल सही तरीके से चल रही है।'  जबकि कोलकाता गुड्ïस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के 200 से अधिक सदस्य हैं और उसके पदाधिकारियों का कहना है कि एसोसिएशन पंजीकरण की स्थिति का खुलासा करने में समर्थ नहीं है। इस कानून के तहत पंजीकरण कराने में 10 वर्षों की अवधि के लिए 6,250 रुपये खर्च होते हैं।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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