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फिल्मों पर स्थानीय कर नहीं होगा फायदेमंद

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  July 09, 2017

तमिलनाडु में पिछले सप्प्ताह एक हजार से अधिक सिनेमाघरों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया। सिनेमाघरों के मालिक स्थानीय स्तर पर 30 फीसदी कर लगाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि जब फिल्म टिकटों की बिक्री पर 1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाया जा चुका है तो अलग से कर लगाना गलत है। जीएसटी के तहत 100 रुपये से कम मूल्य वाले टिकटों पर 18 फीसदी कर लगा है जबकि इससे महंगे टिकटों पर 28 फीसदी कर लगेगा। लेकिन तमिलनाडु में टिकटों की अधिकतम कीमत पर लगी सीमा स्थिति को जटिल बना देती है। तमिलनाडु में एकल पर्दे वाले सिनेमाघरों में टिकट का अधिकतम मूल्य 50 रुपये ही हो सकता है जबकि मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में टिकट मूल्य की सीमा 120 रुपये है।

 
राज्य सरकार ने तमिल फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें कीं। सरकार की ओर से स्थानीय कर को स्थगित रखने और इस मसले का समाधान करने के मकसद से एक समिति गठित किए जाने के बाद सिनेमाघर के मालिकों ने चार दिन बाद हड़ताल वापस ले ली। पीवीआर सिनेमा के मुख्य वित्तीय अधिकारी नितिन सूद कहते हैं कि तमिलनाडु में टिकट मूल्य की सीमा होने से मालिकों के पास कर चुकाने के बाद नाममात्र की ही बचत होगी। सूद का कहना है कि 120 रुपये मूल्य वाले टिकटों पर करीब 52-53 फीसदी कर लग जाएगा। 
 
अगर स्थानीय कर लगाने में कोई बदलाव नहीं होता है तो यह एक गलत नजीर भी पेश करेगा। इससे न केवल देश भर में समान कर प्रणाली के मकसद से लाए गए जीएसटी के औचित्य पर सवाल उठेंगे बल्कि 14,200 करोड़ रुपये के आकार वाले भारतीय फिल्म उद्योग पर भी उल्टा असर पड़ेगा। फिल्म उद्योग के विस्तार के लिए नए सिनेमाघरों की जरूरत है लेकिन अगर तमिलनाडु की तरह दूसरे राज्यों में भी स्थानीय स्तर पर टिकटों पर कर लगाया जाता है तो फिल्म उद्योग को काफी नुकसान होगा। 
 
फिल्म उद्योग को मिलने वाले कुल राजस्व का तीन-चौथाई से भी अधिक हिस्सा बॉक्स ऑफिस से आता है। लेकिन सच तो यह है कि भारत में केवल 9,000 सिनेमाघर ही बचे हैं। इसका मतलब है कि हरेक 154,000 भारतीयों पर केवल एक सिनेमाघर है जबकि अमेरिका में औसतन 7,950 लोगों पर एक सिनेमाघर है। हालांकि भारत में हरेक साल अमूमन 150-200 नए सिनेमाघर खुलते हैं लेकिन उससे दोगुनी संख्या में पुराने सिनेमाघर बंद भी हो रहे हैं। नए सिनेमाघर खोलने की जटिल प्रक्रिया और करों के बोझ के चलते यह खाई और भी चौड़ी होती जा रही है। इसका परिणाम यह हुआ है कि राजस्व वृद्धि की दर पिछले तीन वर्षों से एकदम सुस्त पड़ गई है। भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे सफल फिल्म 'दंगल' के टिकट भारत की तुलना में एक विदेशी बाजार चीन में करीब दोगुनी संख्या में बिके। इसकी वजह यह है कि चीन में इस फिल्म को कहीं अधिक सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था।
 
आप यह तर्क दे सकते हैं कि मनोरंजन कर का ढांचा पूरे देश में काफी अलग है और हमेशा ही यह राज्य के अधिकार क्षेत्र में रहा है। स्थानीय निकायों की तरफ से आरोपित कुछ करों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि फिल्म कारोबार विश्लेषक श्रीधर पिल्लै का कहना है कि तमिलनाडु में फिल्म उद्योग का असर फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहता है। श्रीधर कहते हैं, 'तमिलनाडु में जो फिल्म उद्योग पर नियंत्रण रखता है वह राज्य पर भी कब्जा रखता है।' फिल्मों के प्रति दीवानगी रखने वाले तमिलनाडु में पांच मुख्यमंत्री फिल्म उद्योग से ही जुड़े रहे हैं। वर्ष 2011 में स्थानीय फिल्मों को कर राहत देने के लिए समीक्षा प्रक्रिया शुरू की गई थी। सरकारी पैनल ने सभी तरह की फिल्मों को कर छूट देने की सिफारिश की, भले ही उनका तमिल संस्कृति से कोई लेना-देना न हो। इसने धोखाधड़ी के आरोपों को बल दिया है। फिल्म विश्लेषकों का कहना है कि कर राहत देने के साथ ही राज्य सरकार टिकट मूल्य की सीमा तय करके भी फिल्म उद्योग पर लगाम रखती रही है। पिल्लै कहते हैं, 'एक बार जीएसटी लग जाने के बाद तो स्थानीय मंत्री की शक्ति ही खत्म हो गई है।'
 
क्या कोई राज्य सरकार जीएसटी की वजह से होने वाली राजस्व क्षति की भरपाई के लिए ही फिल्म कारोबार पर स्थानीय कर लगा सकती है? सूद इसका नकारात्मक जवाब देते हुए कहते हैं, 'तमिलनाडु में बॉक्स ऑफिस का 65-70 फीसदी हिस्सा ही तमिल फिल्मों से जुड़ा है लेकिन अधिकांश फिल्मों को कर छूट मिली है। गैर-तमिल फिल्मों पर जीएसटी के पहले 17 फीसदी कर लगा करता था। राज्य सरकार को अब 14 फीसदी कर ही मिलेगा क्योंकि जीएसटी के तहत लगने वाले 28 फीसदी कर में से आधा हिस्सा केंद्र के पास चला जाएगा।'
 
ऐसे में यह सबसे वाजिब समय था कि टिकटों की कीमत पर लगी सीमा को हटा लिया जाए। फिल्म उद्योग भी लंबे समय से इसकी मांग करता रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि टिकट मूल्य सीमा की ही वजह से तमिलनाडु में 50-55 फीसदी टिकटें बिक जाते हैं जबकि अन्य राज्यों में 35 फीसदी टिकटें ही बिकते हैं। लेकिन तमिलनाडु में फिल्म टिकटों की 'ब्लैक' में बिक्री और अघोषित स्रोतों से आने वाला राजस्व चिंता का विषय रहा है। हिंदी फिल्म उद्योग में टिकटों की कीमत की कोई अधिकतम सीमा नहीं रही है और मल्टीप्लेक्स एवं निर्माण स्टूडियो के उभार ने व्यवस्था की साफ-सफाई में भी काफी मदद की है। अगर तमिलनाडु में टिकट मूल्य सीमा को हटा लिया जाता है तो सिनेमाघरों की कमी से जूझ रहे इस राज्य में निवेश बढऩा तय है। इससे फिल्म निर्माण क्षेत्र को भी फायदा होगा। अधिक सिनेमाघरों का मतलब है कि फिल्मों की कमाई बढ़ेगी और अधिक राजस्व के साथ ही रोजगार के भी नए मौके पैदा होंगे। जीएसटी के बाद टिकट मूल्य पर लगी सीमा हटा लिए जाने से तमिल फिल्म उद्योग के लिए नई सुबह आ सकती है। 
Keyword: movie, film, hall,,
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