बिजनेस स्टैंडर्ड - संविधान विशेषज्ञ ही नहीं बहुआयामी व्यक्तित्व के भी धनी वेणुगोपाल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 25, 2017 01:19 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

संविधान विशेषज्ञ ही नहीं बहुआयामी व्यक्तित्व के भी धनी वेणुगोपाल

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  July 07, 2017

वक्त के साथ चीजें बदलती हैं। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली इसी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह दलील दी थी कि के के वेणुगोपाल हितों के टकराव के मामले में फंसे हैं लिहाजा उन्हें प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के वकील की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। आज उन्हीं वेणुगोपाल को सरकार के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण न्यायिक अधिकारी अटॉर्नी जनरल के पद पर नियुक्त किया गया है।

 
वर्ष 2015 में सामने आया मामला प्रवर्तन निदेशालय में तैनात उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी राजेश्वर सिंह से जुड़ा था। सिंह चाह रहे थे कि उन्हें मूल कैडर में वापस न भेजकर प्रवर्तन निदेशालय में ही स्थायी तौर पर बरकरार रखा जाए। उत्तर प्रदेश में तैनाती के दौरान एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का तमगा हासिल कर चुके सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय में रहते हुए 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की थी। उन्होंने इस घोटाले के सिलसिले में स्वान एतिसलात कंपनी पर फेमा नियमों के उल्लंघन के आरोप में 7,100 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। 
 
उस समय वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम को सिंह की तैनाती के मामले में कुछ कानूनी पेच नजर आए और उन्होंने इस आईपीएस अधिकारी को उसके मूल कैडर में वापस भेजने का आदेश दिया था। सिंह ने इसे केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट समेत विभिन्न मंचों पर चुनौती दी। बाद में चिदंबरम ने यह आरोप लगाया कि वित्त मंत्री रहते समय उठाए गए कदम को लेकर सिंह उनके और उनके परिवार के खिलाफ काम कर रहे थे।
 
इस बीच उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश दे दिया था कि 2जी स्पेक्ट्रम की जांच से जुड़े किसी भी अधिकारी का तब तक स्थानांतरण नहीं किया जाए जब तक कि अंतिम आदेश नहीं आ जाता है। सिंह के मामले को लेकर चल रही तनातनी के बीच ही केंद्र में सरकार बदल गई। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में सरकार बन गई लेकिन वित्त मंत्रालय के रुख में कोई बदलाव नहीं आया। तत्कालीन राजस्व सचिव शक्तिकांत दास ने उच्चतम न्यायालय में यह कहा था कि वित्त मंत्रालय प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के वकील वेणुगोपाल को बदलना चाहती है। इसके लिए उन्होंने राजेश्वर सिंह के मामले में वेणुगोपाल की संलिप्तता का हवाला देते हुए हितों के टकराव की बात भी कही थी।
 
लेकिन सर्वोच्च न्यायालय को यह दलील पसंद नहीं आई थी। वेणुगोपाल 2जी घोटाले के मामले की शुरुआत से ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के वकील की भूमिका निभा रहे थे। न्यायालय ने वित्त मंत्रालय का अनुरोध स्वीकार करने के बजाय वेणुगोपाल को न्यायमित्र बना दिया। 2जी मामला अब अपने आखिरी मुकाम की ओर पहुंच गया है और ऐसे समय में वेणुगोपाल अटॉर्नी जनरल बन गए हैं। संभावना है कि सितंबर में 2जी मामले पर फैसला आ सकता है। जाने-माने संवैधानिक विशेषज्ञ वेणुगोपाल को उनकी सेवाओं के लिए पहले ही पद्म विभूषण और पद्म भूषण पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वह दूसरी बार सरकार के शीर्ष स्तर के न्यायिक अधिकारी बनाए गए हैं। इसके पहले मोरारजी देसाई सरकार के समय भी उन्हें अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल बनाया गया था।
 
कहा जाता है कि कानून उनकी पहली पसंद नहीं था। कॉलेज से स्नातक पाठ्यक्रम पूरा होने के ठीक पहले वह बीमार पड़ गए थे और उन्हें मजबूरी में विधि पाठ्यक्रम में दाखिला लेना पड़ा। वैसे कानून उन्हें विरासत में मिला था। उनके पिता एम के नाम्बियार भी मशहूर वकील थे जिन्होंने ए के गोपालन बनाम मद्रास राज्य का चर्चित मुकदमा लड़ा था। वेणुगोपाल ने बेलगाम के राजा लखमगौड़ा लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की और 1954 में वकील के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। उन्हें वर्ष 1972 में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता की मान्यता मिल गई थी। 
 
वह अपने लंबे पेशेवर करियर में कई चर्चित मामलों की पैरवी कर चुके हैं। इनमें पुदुच्चेरी विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन पर उठा विवाद, 1976 में बनी एम करुणानिधि की सरकार का मामला और बाबरी मस्जिद केस भी शामिल है। मंडल आयोग लागू होने के बाद देश भर में उभरे छात्र असंतोष को शांत करने के लिए उन्होंने उच्चतम न्यायालय से आयोग की सिफारिशों के अमल पर रोक लगाने की भी गुजारिश की थी। 
 
कानूनी क्षेत्र में उदारीकरण होना अभी बाकी है लेकिन वेणुगोपाल की राय इसके पक्ष में है। वेणुगोपाल ने एक साक्षात्कार में कहा, 'मेरा मानना है कि इससे घरेलू वकीलों को फायदा होगा क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि विदेश में कानूनी पेशे का स्तर अधिक उन्नत है। विदेश में कानून की शिक्षा का स्तर भारत की तुलना में काफी ऊंचा है। उनकी तकनीक भी अद्भुत है।' इस तरह की राय से बखेड़ा खड़ा हो सकता है क्योंकि कई वकील विदेशी कानूनी फर्मों को भारत में प्रवेश की इजाजत के पक्ष में नहीं हैं। संवैधानिक कानून में उनकी महारत को ही देखते हुए नेपाल और भूटान में भी संविधान का प्रारूप तय करने में वेणुगोपाल की मदद ली गई थी।
 
वेणुगोपाल ने जाने-माने वेब प्रकाशन बार ऐंड बेंच को दिए एक साक्षात्कार में अपनी एक कमी का भी जिक्र किया जिससे बहुत कम लोग ही परिचित रहे हैं। उन्हें घूमना-फिरना उनकी कमजोरी है और उन्हें पुरातत्व से संबंधिक किताबें जुटाने का भी शौक है। वेणुगोपाल का घूमने-फिरने में भी काफी मन लगता है। वह अलग तरह की जगहों पर जाना पसंद करते हैं। उन्होंने उसी साक्षात्कार में कहा था, 'मैं अंटार्कटिक, आर्कटिक सर्किल और गलगपोस द्वीप जैसे स्थानों पर भी जा चुका हूं। मैं करीब 30 दिनों का सफर कर मानसरोवर भी गया था।' अजीबोगरीब स्थानों पर जाने के उनके जज्बे को इसी से समझा जा सकता है कि यूनान में सेंतोरिनी द्वीप में एक ज्वालामुखी के मुहाने पर भी उन्होंने 2,200 फुट की चढ़ाई की थी।
Keyword: के के वेणुगोपाल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अस्पतालों के शुल्क पर लगना चाहिए अंकुश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.