बिजनेस स्टैंडर्ड - स्थायी हल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 25, 2017 12:14 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

स्थायी हल

संपादकीय /  July 06, 2017

केंद्र सरकार ने अपनी उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) का ठोस बचाव किया है। उदय योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में की गई थी। इसका लक्ष्य था कर्जग्रस्त सरकारी बिजली वितरण कंपनियों को राहत प्रदान करना। उचित शुल्क के अभाव में ये कंपनियां भारी भरकम घाटे की शिकार थीं। उदय योजना में दो प्रमुख मानकों पर ध्यान दिया गया। पहला, वित्तीय सुधार लाना। इसके लिए यह योजना लाई गई कि कंपनियों का कर्ज राज्य सरकारों के खाते में डाला जाए ताकि कंपनियां नई बिजली खरीद सकें। दूसरा, परिचालन के मोर्चे पर सुधार करना। इसमें पारेषण नुुकसान कम करना और बकाया वसूली की स्थिति में सुधार करने समेत अन्य उपाय शामिल हैं। खबरों के मुताबिक 16 राज्यों के उदय योजना में शामिल होने के बाद बिजली वितरण कंपनियों को 2 लाख करोड़ रुपये के बकाया कर्ज के ब्याज भुगतान में 12,000 करोड़ रुपये की बचत की संभावना है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2016-17 में देश भर में बिजली बिलों में 2 फीसदी की किफायत आई है। जबकि औसत तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान घटकर 20.2 फीसदी रह गया है। इतना ही नहीं औसत आपूर्ति लागत और औसत राजस्व प्राप्ति के बीच का अंतर भी वर्ष 2015-16 के 59 पैसे से घटकर वर्ष 2016-17 में 45 पैसे रह गया। ऐसा ब्याज में कमी, बेहतर शुल्क दर और बिलिंग व्यवस्था के चलते हुआ। 

 
बहरहाल, यह कहानी का एक ही हिस्सा है। सच तो यह है कि सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के घाटे और उनके कर्ज से निपटने का एकमात्र स्थायी हल है बिजली की दरों में  समय-समय पर उचित बदलाव। जब तक ये कंपनियां ऐसा करने में सफल नहीं हो पाएंगी तब तक मौजूदा फायदा बहुत अधिक लंबे समय तक कायम नहीं रह सकेगा। निश्चित तौर पर कर्ज का पुनर्गठन और पारेषण नुकसान में कमी ऐसे कदम हैं जो सारे हालात में सुधार दिखाएंगे। परंतु इनमें से कोई भी कदम आर्थिक रूप से व्यवहार्य बिजली दर के अभाव में वितरण कंपनियों की हालत में सुधार नहीं ला पाएगा। 
 
कर्ज का वित्तीय पुनर्गठन इस योजना के मूल में है। इससे डिस्कॉम को एक बारगी राहत मिल सकती है। मूल्य सुधार के मोर्चे पर अभी काफी कुछ किया जाना है। यह सच है कि 27 में से 25 राज्यों में बीते कुछ साल के दौरान बिजली दरों में संशोधन किया गया। परंतु ये तमाम संशोधन यही दिखाते हैं राज्यों को लोकलुभावन भावनाओं पर अंकुश लगाते हुए दरों में इजाफा करना ही होगा। इसके बजाय कई राज्यों से आए प्रमाण बताते हैं कि उनमें से कई ने औद्योगिक उपभोक्ताओं से अतिरिक्त भुगतान कराया जबकि किसानों आदि को अतिरिक्त सब्सिडी दी गई। कई अन्य मामलों में राज्य स्तरीय बिजली नियामकों ने दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर तेजी से कदम नहीं उठाए। सरकार ने हाल ही में नियामकों के इस आश्वस्ति भाव और साहस की कमी की आलोचना की है। उसने नियामकों से कहा है कि वे स्वतंत्र और पेशेवर रूप में काम करें और सुधार लाने के लिए अपने स्तर पर भी कदम उठाएं। 
 
यह पहला मौका नहीं है जब बिजली वितरण कंपनियों को उबारने के लिए बनाई गई वित्तीय पुनर्गठन की कोई योजना व्यवहार्यता के मोर्चे पर जूझ रही हो। परंतु अतीत के उलट इस बार हालात अधिक चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि बिजली वितरण कंपनियों के बढ़ते नुकसान के साथ देश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती गई, बिजली खरीद की क्षमता घटती गई जबकि उत्पादन बढ़ता गया। 25,000 मेगावॉट उत्पादन क्षमता की निजी परियोजनाएं पहले ही बिक्री के लिए उपलब्ध हैं क्योंकि कंपनियां कर्ज से निपटना चाहती हैं। राज्यों में वास्तविक मूल्य सुधार की कमी 60,000 मेगावॉट की अतिरिक्त क्षमता को अव्यवहार्य बना सकती है जो अभी निर्माणाधीन है।
Keyword: power, electric, उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय),
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अस्पतालों के शुल्क पर लगना चाहिए अंकुश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.