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'जीएसटी अच्छा पर हम अभी भारत में नहीं कर रहे निवेश'

पुनीत वाधवा /  July 03, 2017

रोजर्स होल्डिंग्स के चेयरमैन जिम रोजर्स ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि चूंकि वैश्विक इक्विटी बाजार अपनी विकास यात्रा पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए उन्हें भविष्य में गिरावट की आशंका है। फिलहाल निवेश नहीं करने का उनका निर्णय भारत-केंद्रित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष पैदा हुई समस्याएं भी शामिल हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
भारत ने अपने इतिहास में सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी लागू किया है। इस बारे में आपके क्या विचार हैं?
 
जीएसटी के क्रियान्वयन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहीं किया है जिसके बारे में उन्होंने शुरू में कहा था। यदि जीएसटी भारत में कर व्यवस्था में संपूर्ण बदलाव ला सकता है तो यह आश्चर्यजनक होगा। अपनी आजादी के बाद से भारत में किसी राजनीतिज्ञ द्वारा हासिल की गई यह सर्वश्रेष्ठï उपलब्धि है। 
 
सरकार के शेष कार्यकाल से आपको क्या उम्मीदें हैं? क्या आपकी नजर में ये उपाय केंद्र द्वारा 2019 के आम चुनावों को ध्यान में रखकर किए जा रहे लोक-लुभावन प्रयास हैं?
 
यह सही है कि नरेंद्र मोदी ने पहले भी कई लोक-लुभावन कार्य किए हैं। मेरा मानना है कि पिछले आम बजट में भी कई लोक-लुभावन उपायों पर जोर दिया गया था। लेकिन मैं नहीं मानता कि जीएसटी किस तरह से लोक-लुभावन साबित होगा, क्योंकि इससे बड़ी तादाद में लोगों की जिंदगी प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि बाद में ये उपाय अच्छे साबित होंगे, क्योंकि इससे भारत में कर व्यवस्था दुरुस्त होगी। वर्ष 2019 में चुनाव होने हैं और मेरा मानना है कि कुछ और लोक-लुभावन उपाय किए जाएंगे। दुनिया में हरेक राजनीतिज्ञ अपनी हरसंभव कोशिश कर चुनावों की तैयारी करता है। 
 
अब निवेश स्थान के तौर पर भारत के बारे में आपका क्या नजरिया है? क्या आप यहां निवेश की योजना बना रहे हैं?
 
नहीं, अभी नहीं। ऐसा इसलिए, क्योंकि मैं अभी दुनिया में कहीं भी निवेश नहीं कर रहा हूं। मैं वैश्विक वित्तीय बाजारों को लेकर चिंतित हूं और इसलिए फिलहाल 'प्रतीक्षा करो और देखो' की रणनीति पर अमल कर रहा हूं। यदि अमेरिका, जापान या किसी अन्य प्रमुख बाजार में कोई समस्या है तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति होगी। मैं इसे लेकर चिंतित हूं कि अगली बार हमें आर्थिक मंदी से जूझना पड़ेगा, यह बेहद खराब स्थिति होगी और इसका हर किसी पर प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल यहां निवेश नहीं करने का मेरा निर्णय भारत-केंद्रित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष पैदा हुई समस्याएं भी शामिल हैं। 
 
इसलिए अब वैश्विक बाजारों पर आपका क्या नजरिया है? क्या जल्द संकट की स्थिति आ सकती है?
 
मुझे चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही या 2018 में वैश्विक, खासकर अमेरिका में वित्तीय संकट पैदा होने की आशंका है। अमेरिका फिलहाल दुनिया में सबसे बड़ा कर्जदार देश है और उसका कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। उसके शेयर बाजार सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर हैं और केंद्रीय बैंक लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहा है। मेरा मानना है कि वित्तीय बाजारों में समस्याएं इस साल के अंत में या अगले साल देखी जा सकती हैं। 
 
आपकी नजर में कौन से कारक गिरावट ला सकते हैं?
 
इसके लिए कई चीजें जिम्मेदार हैं। इनमें ऐसे कारक भी शामिल हैं जिनकी हम उम्मीद नहीं कर सकते। 2007 में आइसलैंड दिवालिया हुआ और ज्यादातर लोग यह नहीं जानते थे कि इस नाम का कोई देश है। इसके बाद आयरलैंड संकट की चपेट में आ गया। बाद में बियर स्टीयन्र्स और फिर लीमन ब्रदर्स भी नहीं बच पाई। संकट गहराता गया और फिर सभी वित्तीय बाजार इसकी लपट में आ गए। अमेरिका में कई प्रांत हैं जो फिलहाल दिवालिया हो चुके हैं। वहां कई पेंशन योजनाएं अब बोझ बढ़ाने वाली साबित हो रही हैं। इसलिए वित्तीय संकट इन प्रांतों में दिवालियेपन की स्थिति से और बढ़ सकता है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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