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सिगरेट बनाने वाली कंपनियों का बढ़ेगा राजस्व

अभिषेक रक्षित और राम प्रसाद साहू / कोलकाता/मुंबई July 03, 2017

सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के शेयर सोमवार को सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वालों में शामिल रहे क्योंकि पिछले सप्ताहांत केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड ने सिगरेट पर जीएसटी के ढांचे को स्पष्ट किया था। नया कर ढांचा करीब 6 फीसदी घटकर 58 फीसदी रहने की संभावना है, जो पहले 63-64 फीसदी रहा था। आईटीसी और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शेयर अपने-अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर को छू गए और इनमें क्रमश: 5.7 फीसदी व 4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर में भी 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा लाभ हालांकि आईटीसी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी देश के शुल्क भुगतान वाले सिगरेट उद्योग में अनुमानित तौर पर 80 फीसदी है।

 
सिगरेट निर्माताओं के आशावाद की दो वजहें हैं। पहला, सिगरेट की कम कीमत के अनुमान के चलते इसके वॉल्यूम में मजबूती आएगी। 64 मिलीमीटर की श्रेणी में सिगरेट की कीमतें 8-10 फीसदी घटने की संभावना है, जिसके चलते अगले दो साल में वॉल्यूम में सालाना 5-7 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। पिछले पांच साल में वैध सिगरेट उद्योग की बिक्री 5-6 फीसदी घटी है, वहीं अवैध कारोबार में इजाफा हुआ है।
 
एडलवाइस सिक्योरिटीज के अबनीश रॉय का मानना है कि अगर 6-7 फीसदी का फायदा आगे बढ़ाया जाता है तो वित्त वर्ष 2018 में आईटीसी को अनुमानित तौर पर वॉल्यूम में 5 फीसदी का फायदा मिलेगा। आईटीसी की बाजार हिस्सेदारी, कीमत की शक्ति व मांग आदि को देखते हुए कम अप्रत्यक्ष कर के चलते इसे सिगरेट  कंपनियों में सबसे ज्यादा लाभ हासिल होगा।
 
आईटीसी के प्रवक्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, कंपनी जीएसटी का स्वागत करती है और ग्राहकों को इसका फायदा देने के लिए कंपनी प्रभावी कदम उठा रही है। शेयरों में उफान की अन्य वजह (खास तौर से आईटीसी के लिए) कम सापेक्षिक मूल्यांकन है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों ने आज एक नोट में कहा था कि आईटीसी का शेयर हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुकाबले 32 फीसदी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहा है, जो करीब 10 साल का सबसे ज्यादा डिस्काउंट है। क्रेडिट सुइस के अर्णव मित्रा और रोहित कदम का मानना है कि आईटीसी की दोबारा रेटिंग की काफी गुंजाइश है क्योंकि आय की रफ्तार बढ़ी है। सिगरेट कारोबार से उच्च योगदान की पृष्ठभूमि में एडलवाइस सिक्योरिटीज का मानना है कि अगले दो साल में आईटीसी की आय में सालाना बढ़त की रफ्तार 15-18 फीसदी होगी। साथ ही एफएमसीजी कारोबार में नई पेशकश से इसके राजस्व में इजाफे की संभावना है और सिगरेट इसकी बिक्री व लाभ की अहम वाहक बनी रहेगी। आईटीसी के राजस्व में सिगरेट का योगदान करीब 58 फीसदी और लाभ में 87 फीसदी है।
 
सिगरेट निर्माताओं को सबसे ज्यादा फायदा शुरुआती स्तर वाले सिगरेट यानी 64 मिलीमीटर श्रेणी में होने की संभावना है। रिलायंस सिक्योरिटीज के समीर देशमुख इससे सहमत हैं और उन्होंने कहा कि यह श्रेणी आईटीसी की बिक्री में 25 फीसदी का योगदान करती है। 69 मिलीमीटर श्रेणी पिछले कुछ सालों से स्थिर रही थी। उनका अनुमान इस मान्यता पर आधारित है कि बजट ब्रांड मसलन गोल्ड स्टार, सुपर स्टार, कैप्सटन व अन्य सीधे तौर पर बीड़ी व अवैध सिगरेट से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जहां बीड़ी पीने वालों को बजट सिगरेट का ग्राहक बनाने की संभावना ज्यादा है।
 
जेएम फाइनैंशियल के रिचर्ड ल्यू व विक्की पंजाबी ने कहा, वीएसटी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनी 64 मिलीमीटर वाली सिगरेट की कीमतें 2.65 रुपये प्रति सिगरेट कर सकती है और वह पहले के 3 रुपये की बिक्री कीमत के समान ही कमा सकती है। उनका मानना है कि 64 मिलीमीटर वाले सिगरेट की कीमत 2.5 रुपये करने पर बीड़ी पीने वालों को सिगरेट की तरफ आसानी से आकर्षित किया जा सकता है। जीएसटी के ढांचे के तहत बीड़ी  पर कर बढ़ाकर 28 फीसदी किया गया है और मौजूदा कर स्तर 18-20 फीसदी का अतिरिक्त उपकर भी इस पर है। बीड़ी पर जहां प्रभावी कीमतें बढ़ेंगी, वहीं सिगरेट पर घटेंगी।
 
देशमुख का अनुमान है कि 64 मिलीमीटरवाली श्रेणी का आईटीसी की बिक्री में आने वाले सालों में अहम हिस्सा होगा क्योंकि अभी कुल बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 25 फीसदी है और आगे इसके बढ़कर 40 फीसदी पर पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में आईटीसी अग्रणी है और एक बार कीमत घटाने के बाद अन्य कंपनियां भी ऐसा ही करेंगी। इसके परिणामस्वरूप प्रभावी कीमतें खास तौर से 64 मिलीमीटर श्रेणी में कम होगी और बीड़ी व अवैध सिगरेट की बाजार हिस्सेदारी पाने में मदद मिलेगी। इससे वैध सिगरेट बाजार में बिक्री बढ़ेगी।
 
बड़ी तस्वीर यह है कि कम कर से अवैध सिगरेट के कारोबार पर लगाम कसने में मदद मिलेगी, जिन्हें हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा फायदा मिला है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, शुल्क न चुकाने वाला अवैध सिगरेट उद्योग पिछले पांच सालों में अपनी बाजार हिस्सेदारी 22 फीसदी पर पहुंचा चुका है, जो 2010 में 15 फीसदी था और 2007 में 5 फीसदी से कम। तंबाकू बोर्ड, यूएसडीए व उद्योग सूत्रों के अनुमान से पता चलता है कि अवैध सिगरेट की खपत 2004 के 11.1 अरब सिगरेट के मुकाबले 2015 में बढ़कर 23.9 अरब सिगरेट पर पहुंच गया।
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