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एनएमसीई, आईसीईएक्स का होगा विलय

राजेश भयानी / मुंबई July 03, 2017

देश के पहले ऑनलाइन मल्टी कमोडिटीज एक्सचेंज, नैशनल मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (एनएमसीई) ने इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) के साथ विलय करने का फैसला किया है। पिछले कुछ महीनों से इस विलय को लेकर चर्चा चल रही थी। दोनों एक्सचेंज के निदेशक मंडल से विलय प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद सोमवार को संयुक्त रूप से इसकी घोषणा कर दी गई। 
 
विलय के बाद इस नए एक्सचेंज की हैसियत करीब 200 करोड़ रुपये तक की होगी और इसका कुल पूंजीगत आधार करीब 553 करोड़ रुपये होगा। आईसीईएक्स की विज्ञप्ति के मुताबिक, 'शेयरों की अदला-बदली के लिए हुए समझौते के मुताबिक विलय के बाद बनने वाले एक्सचेंज में आईसीईएक्स के शेयरधारकों की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी जबकि एनएमसीई के शेयरधारकों की 37.2 फीसदी हिस्सेदारी होगी।' 
 
सूत्रों के मुताबिक समझौते के मुताबिक 10 आईसीईएक्स शेयरों के बदले एनएमसीई का एक शेयर जारी किया जाएगा। विलय के बाद बनने वाले एक्सचेंज में रिलायंस कैपिटल करीब 19 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक बनकर उभरी है। हालांकि बाजार नियामक सेबी के नियमों के मुताबिक इसे अपनी हिस्सेदारी 5 फीसदी तक कम करनी होगी जिसके लिए इसके पास दो साल का वक्त है। इस प्रस्तावित विलय से देश का तीसरा सबसे बड़ा कमोडिटी एकक्सचेंज अस्तित्व में आएगा जिसमें सराफा, तेल, रबर और कृषि जिंसों सहित कई अन्य जिंस में कारोबार होगा। विलय के बाद बनने वाले एक्सचेंज में दुनिया के पहले हीरा वायदा अनुबंध की भी शुरुआत होगी जिसके लिए पहले से ही नियामक से सैद्धांतिक मंजूरी ली जा चुकी है। 
 
आईसीईएक्स के प्रबंध निदेशक (एमडी) और  मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) संजित प्रसाद कहते हैं, 'विलय से वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, ग्राहकों और सदस्यों की तादाद भी बढ़ेगी, उत्पादों का विस्तार होगा और कामकाज में बेहतर तालमेल होगा। इसके साथ ही देश में तेजी से बढ़ रहे जिंस डेरिवेटिव  बाजार में आईसीईएक्स की स्थिति और मजबूत होगी।' दोनों एक्सचेंज विलय की मंजूरी के लिए औपचारिक प्रस्ताव सेबी को भेजेंगे और फिर नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) की मंजूरी लेने के लिए संपर्क साधेंगे। आईसीईएक्स का मुख्यालय दिल्ली में है जिसे गुजरात के सूरत में स्थानांतरित किया जा रहा है जहां इसकी शाखा है। एनएमसीई अहमदाबाद का एक्सचेंज है और इस तरह दोनों अहमदाबाद में एनसीएलटी गुजरात से जल्दी मंजूरी पाने की कोशिश करेंगे। सूत्रों के मुताबिक जब विलय की मंजूरी मिल जाएगी तब विलय वाली संस्था के निदेशक मंडल का विस्तार किया जाएगा। 
 
जुलाई 2013 से जिंस लेन-देन कर लगाए जाने के बाद से आईसीईएक्स ने 2014 में कारोबार रोक दिया था क्योंकि इसका कारोबार इतने निचले स्तर पर चला गया था कि कारोबार को बनाए रखना व्यावहारिक नहीं लग रहा था। जब इसने अपनी वित्तीय हैसियत फिर से बढ़ाई तब इसे परिचालन फिर से शुरू करने की मंजूरी मिली। एनएमसीई के एमडी और सीईओ अनिल मिश्रा कहते हैं, 'विलय वाले एक्सचेंज पर रबर अनुबंध का कारोबार भी होगा जहां छोटे और सीमांत किसान मजबूत खरीदार लॉबी के बावजूद बेहतर कीमत पाने में सक्षम रहे हैं।' विलय वाले एक्सचेंज को इसे भुनाने की कोशिश करनी चाहिए। रबर अनुबंध इसके किसानों की फंडिंग के लिए भी उपयोगी है और वित्त मुहैया कराने वाली संस्था को एक्सचेंज पर हेजिंग की वजह से रिकवरी का आश्वासन भी मिलेगा। 
 
वह वर्ष 2008 से ही एक्सचेंज के सीईओ रहे हैं और उन्हें रबर अनुबंध विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के भंडारण केंद्र की क्षमता 98.9 लाख टन है और यह देश के संयुक्त एक्सचेंज के लिए उपलब्ध होगा। संयुक्त एक्सचेंज के सक्रिय सदस्यों के एक बड़े वर्ग की व्यापक साझेदारी की वजह से ज्यादा नकदी जुटाने में मदद मिलेगी।' एनएमसीई के 45 सक्रिय सदस्य हैं। आईसीईएक्स का कामकाज अभी शुरू होना है लेकिन इसके पहले से ही 50 सदस्य हैं। वर्ष 2017 में एनएमसीई का रोजाना औसत कारोबार 260 करोड़ रुपये है। आईसीईएक्स की विज्ञप्ति में कहा गया है, 'नियामकीय मंजूरियों के बाद यह विलय इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।'
Keyword: एनएमसीई, आईसीईएक्स,
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