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पंजाब में छोटे कारोबारियों पर जीएसटी का असर

अजय मोदी / लुधियाना July 02, 2017

लुधियाना में डाब रोड स्थित पर साइकिल कलपुर्जों के उद्यमी गौतम जैन ने वर्षों तक अपनी कंपनी को रोजमर्रा का खाता तैयार किया। मौजूदा व्यवस्था में हर बिक्री चालान के जरिए होती है और महीने में दो या तीन बार इनवॉइस तैयार किए जाते हैं। जब वह नहीं होते तो उनका कर्मचारी हाथ से चालान में ब्योरा भरता है। एक जुलाई से सारी बिक्री कंप्यूटरीकृत बिल के जरिए करनी होगी। इसमें विक्रेता और खरीदार दोनों के जीएसटी नंबर डालने जरूरी होंगे। उनके साथ काम करने वाला व्यक्ति कंप्यूटर चलाना नहीं जानता लेकिन उन्होंने समस्या के हल के रूप में एक नया प्रिंटर लिया है। 

 
जैन ने 15,000 रुपये खर्च करके यह प्रिंटर इसलिए लिया है ताकि कारोबार प्रभावित न हो। वह कहते हैं कि वह सफर में रहते हुए अपने लैपटॉप पर भी बिल बना सकते हैं जिसे फैक्टरी में उनका स्टाफ प्रिंट कर लेगा। इस तरह उनका कारोबार चलता रहेगा। जैन कहते हैं कि वह अकाउंटेंट नहीं रखेंगे क्योंकि यह उनके बजट से बाहर है। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 1.75 करोड़ रुपये का है। उन्होंने अपन टैली सॉफ्टवेयर भी अपडेट किया है और वह जीएसटी के लिए तैयार हैं। लेकिन अब उनका अनुपालन खर्च बढऩे वाला है। अभी उन्होंने जो अंशकालिक अकाउंटेंट रखा है, अब उसकी जरूरत उनको ज्यादा पडऩे वाली है। 
 
लुधियाना में 20,000 से अधिक छोटे-बड़े उद्यम हैं। इस शहर को साइकिल, वस्त्र, धातु, वाहन कलपुर्जे, औद्योगिक मशीनरी आदि के लिए जाना जाता है। यहां इन सबके संघ भी हैं। उन्होंने जीएसटी पर कई सेमिनार किए। शहर के गारमेंट मशीनरी मैन्युफैक्चरर ऐंड सप्लायर्स असोसिएशन में करीब 140 सदस्य हैं। संघ ने दिल्ली के एक सीए को जीएसटी पर पांच घंटे के सेमीनार के लिए 65,000 रुपये का भुगतान किया। एसोसिएशन के चेयरमैन और कारोबारी रामकृष्ण कहते हैं, 'इन सेमीनारों में शिरकत के बाद भी कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी है। हम सब अंधेरे में हैं। हमारे सीए हमसे जो भी कहेंगे हम वही करेंगे।'
 
बिजनेस स्टैंडर्ड ने लुधियाना के छह वस्त्र, धागा, साइकिल पार्ट, हैंड टूल आदि निर्माताओं से बात की। इनमें से जिनका निर्यात ज्यादा और टर्नओवर 25 करोड़ रुपये से अधिक है वे कमोबेश तैयार हैं। सुपरफाइन निटर्स के प्रबंध निदेशक अजीत लाकड़ा कहते हैं कि अगर उद्योग जगत को और समय मिला होता तो कई अन्य लोगों ने पूरी तैयारी कर ली होती। लाकड़ा कहते हैं कि लोगों में बदलाव का विरोध करने की प्रवृत्ति होती है। कपड़ा निर्माताओं पर अब तक कोई कर नहीं था और अब उनको 5 फीसदी जीएसटी देना होगा।
 
हेम निटवियर्स के मालिक परेश जैन कहते हैं कि उनके सीए ने जीएसटी को लेकर कईबातें बताई हैं। कारोबारियों को कई जगह से कई तरह की सूचनाएं मिल रही हैं। इनसे भ्रम बढ़ रहा है। कुछ लोगों को तो आशंका है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट भी आसानी से नहीं मिलेगी। 20 लाख रुपये से कम टर्नओवर वालों को जीएसटी से रियायत की बात भी भ्रामक है क्योंकि टर्न ओवर हर साल बदलता रहता है। इतना ही नहीं इससे कारोबारियों में टर्न ओवर कम करके दिखाने की प्रवृत्ति पनपेगी। श्री टूल्स के मालिक और लुधियाना हैंडटूल्स ऐसोसिएशन के अध्यक्ष एस सी रल्हन कहते हैं कि सूक्ष्म और लघु उद्योग प्राय: परिवार संचालित होते हैं और वहां बाहरी लोग काम नहीं करते। ऐसे कारोबारों के लिए वक्त कठिन है लेकिन इसकी मदद से वे तकनीक सक्षम बन सकते हैं।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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