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शुरुआती महीनों में जीडीपी पर भारी पड़ेगा जीएसटी

ईशान बख्शी और इंदिवजल धस्माना /  June 30, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से मौजूदा वित्त वर्ष के आधे से अधिक हिस्से में आर्थिक विकास पर प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है लेकिन आगे चलकर हालात सुधरेंगे और चौथी तिमाही से जीएसटी देश के आर्थिक विकास में एक अहम कारक के तौर पर उभरेगा। खुदरा मूल्य आधारित महंगाई दर काफी हद तक जीएसटी के असर से बची रहेगी लेकिन उपभोक्ता मूल्य आधारित महंगाई बढ़ सकती है। भले ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 7500 रुपये से अधिक किराये वाली प्रीमियम हवाई यात्रा और वातानुकूलित होटल जैसी सेवाओं और हाईब्रिड कारों एवं उर्वरकों जैसे उत्पादों की हिस्सेदारी कम है लेकिन इनकी ऊंची दरों से महंगाई बढऩे की आशंका बनी हुई है।

 
महंगाई अनुमान में कठोरता के चलते महंगाई बहुत कम नहीं होगी। हालांकि इनपुट पर अदा किए गए करों को वापस लौटा दिया जाएगा जिसकी वजह से मुद्रास्फीति को शिथिल करने वाला असर पैदा होगा। इसके अलावा हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर जीएसटी का कोई भी असर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी की गणना के लिए जो नई पद्धति अपनाई गई है, उसमें अप्रत्यक्ष करों को संज्ञान में नहीं लिया जाता है। ईवाई के डी के श्रीवास्तव कहते हैं, 'जीएसटी की वजह से वर्ष 2017-18 की पहली दो तिमाहियों में जीडीपी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। दरअसल जीएसटी लागू होने के शुरुआती दौर में समूचा कारोबारी जगत इस नई कर प्रणाली के लिए खुद को तैयार करने में लगा रहेगा जिसका विकास दर पर प्रतिकूल असर देखने को मिलेगा।' उनका यह भी मानना है कि इस अवधि में जीडीपी विकास दर में 0.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इस वजह से चालू वित्त वर्ष की विकास दर सात फीसदी रहने के आसार हैं जबकि वर्ष 2016-17 में वृद्धि दर 7.1 फीसदी रही थी।
 
श्रीवास्तव का यह भी कहना है कि नोटबंदी का असर मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी जारी रहने से इस अवधि में जीडीपी विकास दर के कमजोर रहने की आशंका है। सरकार ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को वापस लेने का जो फैसला किया था उसके चलते 2016-17 की चौथी तिमाही में विकास दर गिरकर 6.1 फीसदी रह गई जबकि तीसरी तिमाही में यह सात फीसदी रह नोटबंदी का असर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक बना रह सकता है और इस बीच जीएसटी से पैदा होने वाला व्यवधान भी विकास दर को प्रभावित करेगा।
 
इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर कहती हैं, 'वर्ष 2017-18 की दूसरी और तीसरी तिमाही में कुछ सामंजस्य स्थापित करने की गतिविधियां देखा जा सकती हैं। करदाताओं को धीरे-धीरे नई कर प्रणाली से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी होगी लेकिन उन्हें पहले से अधिक कामकाजी पूंजी की भी जरूरत पड़ेगी। आर्थिक गतिविधियों पर जीएसटी का सकारात्मक असर चौथी तिमाही के बाद ही नजर आने की संभावना है।'
 
उन्होंने चौथी तिमाही के बाद ही निजी क्षेत्र के निवेश में व्यापक तेजी आने की उम्मीद जताते हुए कहा कि जीएसटी के हिसाब से कारोबार को समायोजित कर लेने के बाद कारोबारी गतिविधियों में सुधार देखा जा सकता है। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत कहते हैं कि जीएसटी की वजह से आगे चलकर जीडीपी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है क्योंकि नई कर प्रणाली में कर चोरी की संभावना कम होने से कार्यक्षमता बढ़ जाएगी। वह कहते हैं, 'लेकिन ऐसा होने में मध्यम अवधि से लेकर लंबी अवधि लगेगी। तात्कालिक तौर पर जीएसटी की वजह से सरकार को मिलने वाले राजस्व पर असर पडऩे से इनकार नहीं किया जा सकता है।'
 
हालांकि भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष का मानना है कि जीएसटी के चलते देश की जीडीपी में करीब एक अंक की बढ़ोतरी करने की काबिलियत है। घोष ने कहा, 'ऐसा होने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ ही उत्पादकता में भी वृद्धि दर्ज की जाएगी।' केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस को उम्मीद है कि जीडीपी में बढ़ोतरी अकाउंटिंग बेहतर होने से होगी, न कि कार्यक्षमता बेहतर होने से ऐसा होगा। वह कहते हैं कि अब तो सांख्यिकी विभाग अनौपचारिक क्षेत्र के आंकड़ों को भी दर्ज करने लगा है लेकिन जीएसटी के लागू होने से यह और भी बेहतर तरीके से होने लगेगा। 
 
हालांकि मदनवीस को नहीं लगता है कि जीएसटी के बाद कीमतों में अधिक गिरावट आएगी जिसकी वजह से जीडीपी विकास दर को प्रोत्साहन देने वाली मांग पैदा होने की कम संभावना होगी। इसके बजाय उन्हें लगता है कि जीएसटी के चलते कुछ समय के लिए मुद्रास्फीति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। लेकिन एक बार आर्थिक जगत में जीएसटी के जड़ें जमा लेने के बाद महंगाई पर उसका असर कम हो जाएगा।  
 
वहीं नायर कहती हैं कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के हिसाब से सामंजस्य बिठाने के बाद नई कर प्रणाली में अधिकांश वस्तुओं पर कर दर कम हो जाएगी। खास बात यह है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकतर उत्पादों और कुछ सेवाओं को भी एक ही श्रेणी में रखा गया है। जीएसटी परिषद ने 7500 रुपये से अधिक किराये वाले वातानुकूलित होटलों पर 28 फीसदी कर लगाने का फैसला किया है जबकि 2500 से 7500 रुपये तक के किराये वाले होटलों पर 18 फीसदी कर लगेगा।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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