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बैंकों पर दबाव विकास में बाधा

अभिजित लेले / मुंबई June 30, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा आज जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा गया है कि दबाव से जूझ रहा बैंकिंग क्षेत्र और कर्ज से दबा कॉर्पोरेट क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि दर की राह में बाधा बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक निवेश की मांग सुस्त बनी हुई है और और यह आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अपनी छमाही रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने वृहद आर्थिक स्थितियों व राज्य की वित्तीय क्षेत्र में स्थिति की समीक्षा की गई है। वृहद आर्थिक स्थिरता के साथ घरेलू परिदृष्य सकारात्मक है। नकदी की स्थिति सरल बनी हुई है। चालू खाता घाटा भी स्थिर है। 
 
सुधार तेज होने की उम्मीद और राजनीतिक स्थिरता की वजह से आर्थिक परिदृश्य सुदृढ़ नजर आ रही है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य वर्षों की सुस्त वृद्धि के बाद बेहतर दिख रहा है। एफएसआर में कहा गया है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति सामान्य होने को लेकर उहापोह जारी है। स्टॉक की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से वित्तीय बाजार की स्थिति ठीक है और अमेरिका में कोष की स्थिति बेहतर हुई है। बहरहाल राजनीतिक जोखिम बढ़ा हुआ है, जो वित्तीय बाजारों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी बैंकों द्वारा दिया गया खराब कर्ज आंशिक रूप से वित्तीय कंपनियों, म्युचुअल फंडों और पूंजी बाजार द्वारा समायोजित हो रहा है। लेकिन ये बैंक आधारित वित्तीय व्यवस्था में बैंकों के पूर्ण विकल्प नहींं हो सकते, ऐसे में बैंकों के सेहत में सुधार करना अनिवार्य है।
 
वाणिज्यिक बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता का हवाला देते हुए एफएसआर में कहा गया है कि तनाव परीक्षण से संकेत मिलते हैं कि आधार रेखा के परिदृश्य में बैंकों की औसत सकल गैर निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) मार्च 2017 के 9.6 प्रतिशत की तुलना में मार्च 2018 में 10.2 प्रतिशत हो सकता है। और अगर वृहद आर्थिक परिदृश्य खराब होता है तो जीएनपीए अनुपात आगे और बढ़ सकता है। 
 
बही खातों में इस तनाव का असर बैंकों के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) पर भी होगा। आधाररेखा वृहद परिदृश्य में दो बैंक  मार्च 2018 तक 9 प्रतिशत के न्यूनतम नियामकीय स्तर का पालन करने में भी चूक सकते हैं। अगर आगे वृहद आर्थिक परिदृश्य और खराब होता है तो स्थिति और बिगड़ेगी। ऐसे में 6 बैंक 9 प्रतिशत सीएआर के नीचे आ सकते हैं। इस तरह की तनावग्रस्त स्थिति में व्यवसस्था के स्तर का सीएआर मार्च 2017 के 13.3 प्रतिशत से गिरकर मार्च 2018 में 11.2 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। 
 
इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार को बैंकिंग क्षेत्र की एनपीए की चुनौतियों से निपटने के लिए अति सक्रिय कदम उठाने होंगे। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए तीव्र सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। आगामी अप्रैल 2018  में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर भारत के वाणिज्यिक बैंक नए अंकेक्षण मानकों के मुताबिक फाइनैंशियल स्टेटमेंट लिखना शुरू कर देंगे। इसमें दबाव वाले कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के बिल का प्रावधान हो सकता है।
 
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
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