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क्यूआईपी से रकम जुटाने की दौर में बैंक आगे

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा / मुंबई/नई दिल्ली June 30, 2017

पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) के जरिये रकम जुटाने में कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है। यही कारण है कि साल 2017 की पहली छमाही के दौरान क्यूआई के जरिये जुटाई गई रकम पिछले आठ साल की सर्वाधिक ऊंचाई को छू गई। इस दौरान एक दर्जन से अधिक कंपनियों ने क्यूआईपी के जरिये करीब 34,000 करोड़ रुपये जुटाए। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक 14 कंपनियों ने निवेशकों से कुल मिलाकर 33,907 करोड़ रुपये जुटाए जो एक साल पहले की समान अवधि में जुटाई गई रकम के मुकाबले 64 फीसदी अधिक है। साल 2016 की पहली छमाही के दौरान चार कंपनियों ने 529 करोड़ रुपये जुटाए थे जबकि पूरे साल के दौरान 16 कंपनियों द्वारा क्यूआईपी के जरिये जुटाई गई कुल रकम 4,712 करोड़ रुपये थी। साल 2009 में 53 कंपनियों ने क्यूआईपी के जरिये करीब 34,676 करोड़ रुपये जुटाए थे। जबकि साल 2014 में कुल 33 कंपनियों द्वारा क्यूआईपी के जरिये जुटाई गई कुल रकम 31,684 करोड़ रुपये थी।

 
क्यूआईपी के जरिये रकम जुटाने में इस साल अब तक बैंकों का वर्चस्व रहा है। पिछले छह महीने के दौरान बैंकों ने क्यूआईपी के जरिये 28,900 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। इस महीने के आरंभ में भारतीय स्टेट बैंक ने 15,000 करोड़ रुपये के क्यूआईपी को सफलतापूर्वक पूरा किया जो देश में अब तक का सबसे बड़ा क्यूआईपी माना जाता है। फेडरल बैंक ने इसी सप्ताह 2,500 करोड़ रुपये जुटाए।
 
इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'बाजार में तेजी को उद्योग घरानों के बीच रकम जुटाने की होड़ से बल मिल रहा है। कंपनियां बाजार परिदृश्य के इस्तेमाल से भविष्य की वृद्धि के लिए रकम जुटा रही हैं। इसके अलावा इस तेजी से पता चलता है कि रकम/इक्विटी जुटाने की लागत में कमी आई है। प्रवर्तक भी इस अवसर को पूरी तरह भुना रहे हैं।'
 
इक्विरस कैपिटल के निदेशक (पूंजी बाजार) मुनीश अग्रवाल ने कहा, 'ऐसी तमाम कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए योजनाएं बना रही हैं जिन्हें अपने कारोबार में वृद्धि नजर आ रही है और जिनका मानना है कि बाजार में तेजी हमेशा के लिए बरकरार नहीं रह सकती है। परिणामस्वरूप हमें कतार में कई क्यूआईपी दिख रही हैं।' करीब एक दर्जन से अधिक कंपनियों को क्यूआईपी, ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट (जीडीआर) अथवा अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (एडीआर) के जरिये करीब 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी मिल चुकी है। बाजार धारणा में सुधार के बीच इन कंपनियों की नजर विस्तार संभावनाओं को भुनाने पर है।
 
इक्विरस के अग्रवाल ने कहा, 'यदि हम क्षेत्र के हिसाब से क्यूआईपी पनर नजर डालें तो पता चलता है कि क्यूआईपी को काफी हद तक बैंकों ने संचालित किया है। बैंक अपने बहीखाते को दुरुस्त करने के साथ-साथ वृद्धि को भी रफ्तार देना चाहते हैं।' उदाहरण के लिए, फेडरल बैंक ने शेयरों की बिक्री से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल अपने ऋण खाते को दुरुस्त करने के अलावा अपने कारोबार में सुधार और अपनी विकास योजना के समर्थन में टियर-1 पूंजी को बढ़ावा देने में करने की योजना बनाई है। यह इस साल बैंक का सातवीं क्यूआईपी है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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