बिजनेस स्टैंडर्ड - शुरू में दिक्कत पर अर्थव्यवस्था को मिलेगी ताकत
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शुरू में दिक्कत पर अर्थव्यवस्था को मिलेगी ताकत

रघु कृष्णन /  June 30, 2017

इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति को लगता है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू होने से कारोबार सरल हो जाएगा और अर्थव्यस्था मजबूत होगी। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि शुरू में क्रियान्वयन में दिक्कतें आ सकती हैं। मूर्ति से रघु कृष्णन ने जीएसटी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात की। प्रमुख अंश:

 
क्या जीएसटी के क्रियान्वयन से आर्थिक विकास को बल मिलेगा? 
 
जीएसटी के संभावित प्रभाव को लेकर कई तरह के  अनुमान व्यक्त किए जा रहे हैं। एनसीएईआर के अध्ययन में कहा गया है कि इससे हमारे देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 1 से 2 प्रतिशत बढ़ जाएगा। बताया जा रहा है कि अमेरिकी फेड ने तो 4 फीसदी तक इजाफे की बात कही है। बहरहाल इस बात में कोई शक नहीं कि जीडीपी बढ़ेगा क्योंकि बाधाएं दूर हो रही हैं और लोगों की उद्यमशीलता परवान चढ़ रही है। इससे देश को फायदा ही होगा।
 
आपको लगता है कि अधिक से अधिक लोग औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल हो पाएंगे? 
 
जब आप पूरे देश में एकसमान, स्पष्टï और सरल कर प्रणाली लागू करेंगे तो स्वाभाविक तौर पर लोग उसे अपनाना शुरू कर देंगे। लोग देश की अर्थव्यवस्था से सीधे जुडऩे लगते हैं तो सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ ही कई अन्य लाभ भी मिलते हैं, जो और अधिक महत्त्वपूर्ण होंगे। छोटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मियों को कई लाभ एवं सुविधाएं मिलेंगी। जीडीपी में वृद्धि और रोजगार सृजन के साथ ही आंतरिक व्यापार में भी 25 से 30 प्रतिशत इजाफे की उम्मीद है। 
 
पेट्रोलियम, अल्कोहल फिलहाल जीएसटी से बाहर हैं। इससे कितना असर पड़ेगा?
 
जीएसटी का ढांचा तैयार होना ही अपने आप में महत्त्वपूर्ण कदम है। ढांचा तैयार होने के बाद अब पेट्रोलियम उत्पाद और अल्कोहल को इसके दायरे में लाना पहले से आसान हो जाएगा। हालांकि इसमें सभी चीजें शामिल की जानी चाहिए, लेकिन हम यह न भूलें कि जीएसटी अस्तित्व में आने में खासी मेहनत लगी है। मेरा मानना है कि जीएसटी का क्रियान्वयन संभव बनाने के लिए मौजूदा सरकार को जरूर श्रेय दिया जाना चाहिए क्योंकि तमाम राजनीतिक दलों के बीच सहमति तैयार करना आसान काम नहीं था।
 
जीएसटी के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे को लेकर कुछ चिंताए व्यक्त की जा रही हैं?
 
कंप्यूटर तकनीक को 50 से भी ज्यादा वर्ष हो गए हैं। लेकिन दुनिया में ऐसा कोई तंत्र नहीं है, जिसके शुरुआती साल-छह महीने में दिक्कतें नहीं आती हों। दिक्कतें होंगी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली टीमें तैनात होंगी। जहाज सबसे ज्यादा महफूज तो बंदरगाहों पर ही रहते हैं, लेकिन उनका निर्माण किसी और मकसद के लिए होता है। उन्हें समंदर में उतरना ही होगा, तूफान झेलने ही होंगे।
 
क्या जीएसटी आने से महंगाई बढ़ेगी? 
 
इस मूल्यवद्र्घित कर प्रणाली से विभिन्न केंद्रीय और राज्य कर आपस में मिलकर एक एकीकृत कर ढांचा तैयार करेंगे। इससे छोटे-बड़े कारोबारियों पर असर पड़ता है, जिससे कुछ सामान महंगा होगा और कुछ सस्ता होगा। जीएसटी से सरकार के पास सूचना का भंडार तैयार हो जाएगा। मसलन कौन सी वस्तु किस कीमत पर बेची जा रही है और कितना कर लग रहा है आदि बातों की जानकारी सरकार के पास होगी। जीएसटी के बाद कर संरचना, विभिन्न विनिर्मित उत्पाद, जिंसों, देश के विभिन्न हिस्सों में उपभोग के तरीकों और कंपनियों के विभिन्न स्तर आदि की तह तक पहुंच जा सकेगा।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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