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एक कर के धागे में गुंथ गया पूरा राष्ट्र

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली June 30, 2017

देश की जनता आधी रात को कर ढांचे में सबसे बड़ी क्रांति का साक्षी बनी, जब 11 साल के इंतजार के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हो गया। संसद के केंद्रीय कक्ष में 30 जून और 1 जुलाई की दरम्यानी रात को इसका ऐलान कर दिया गया। जीएसटी की औपचारिक शुरुआत के लिए संसद के केंद्रीय कक्ष में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, सरकार के कई मंत्री, अधिकारी और कई जानी मानी हस्तियां मौजूद थीं। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इस समारोह के बहिष्कार की घोषणा की थी, लेकिन आखिरी मौके पर एकता दरकती नजर आई और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी तथा जनता दल (यूनाइटेड) ने इसमें हिस्सा लेने की घोषणा कर दी।
 
1 जुलाई से अस्तित्व में आ गए जीएसटी ने 17 अलग-अलग केंद्रीय तथा राज्य करों की जगह ले ली। इसके तहत विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं को 5 श्रेणियों 3 फीसदी (सोने के लिए), 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी में बांटा गया है। सरकार ने उर्वरक को 12 फीसदी कर श्रेणी में रखा था, लेकिन किसानों का खयाल करते हुए ऐन मौके पर उसे 5 फीसदी की श्रेणी में डाल दिया गया।
 
जीएसटी की औपचारिक शुरुआत से पहले वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'जीएसटी भारत को साझा बाजार बना देगा, कर की दरें और प्रक्रियाएं एकसमान होंगी। इससे आर्थिक बाधाएं दूर होंगी। अधिकतर वस्तुओं के लिए जीएसटी परिषद द्वारा मंजूर दरें मौजूदा कर दरों से कम हैं।' जीएसटी के तौर-तरीकों और बारीकियों को जीएसटी परिषद ने मंजूरी दी है। इस परिषद के अध्यक्ष जेटली हैं और राज्यों के वित्त मंत्री इसके सदस्य हैं। जीएसटी को हकीकत में बदलने के लिए 5 विधेयकों को मंजूरी दी गई। इससे जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्य सभा ने पिछले साल मॉनसून सत्र में पारित किया। केंद्रीय जीएसटी विधेयक, एकीकृत जीएसटी विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी को लोकसभा ने पिछले बजट सत्र में मंजूरी दी।
 
इसी तरह राज्य जीएसटी को जम्मू-कश्मीर के अलावा सभी राज्यों की मंजूरी मिल चुकी है। जीएसटी परिषद का गठन सितंबर, 2016 में हुआ था और वित्त मंत्रालय के मुताबिक उसके बाद से इसकी 18 बैठकें हो चुकी हैं। जीएसटी को लागू करने के काम में तेजी लाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में केंद्र और राज्यों के अधिकारियों की 200 से अधिक बैठकें हुई। जीएसटी परिषद की आज एक और बैठक हुई, जो असल में जीएसटी को अंजाम तक पहुंचाने का जश्न मनाने के लिए थी। इस बीच जेटली ने स्वीकार किया कि जीएसटी के क्रियान्वयन के पहले चरण में सरकार के समक्ष कई बड़ी चुनौतियां हैं। कारोबारियों और औद्योगिक संस्थाओं को जीएसटी की बारीकियों को समझाने के लिए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के सभी स्तर के अधिकारियों को मोर्चे पर लगाया गया है। 
 
जीएसटी के क्रियान्वयन और उसे अपनाने से संबंधित मुद्दों की जानकारी देने के लिए सीबीईसी ने एक वार रूम स्थापित किया है जो सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। इसमें 10 अधिकारियों की एक टीम को तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से समन्वय के लिए भी एक टीम का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय जीएसटी के क्रियान्वयन पर करीबी नजर रखेगा। सरकार और कारोबारियों के सामने चुनौती कड़ी हैं, पर अधिकारियों को विश्वास है कि जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) उम्मीदों पर खरा उतरेगा। जीएसटीएन ने एक साझा पोर्टल बनाया है जिसमें करदाता पंजीकरण आवेदन, रिटर्न दाखिल, कर भुगतान और रिफंड का दावा कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटीएन के साथ एक मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म मुहैया कराया गया है और यह 80 लाख करदाता तथा हजारों कर अधिकारियों को जोडऩे का काम करेगा। इस साल फरवरी से जून तक 64,000 अधिकारियों को जीएसटी पोर्टल पर प्रशिक्षण दिया गया है। जीएसटीएन की आईटी व्यवस्थाओं का लोड टेस्ट, परफॉर्मेंस टेस्ट, जोखिम टेस्ट, सुरक्षा और दूसरे कई अनिवार्य टेस्ट हुए हैं। 66 लाख से अधिक करदाताओं ने जीएसटीएन पोर्टल पर अपना अकाउंट खोला है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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