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विक्रेताओं, ग्राहकों के लिए पहेली ही है जीएसटी

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली June 29, 2017

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके चितरंजन पार्क में किराने की दुकान चलाने वाले समरेश मजूमदार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में जो कुछ जानते हैं, वह समाचार पत्रों की खबरों और अपने साथी दुकानदारों के साथ होने वाली चर्चाओं पर आधारित है। वह जानते हैं कि विभिन्न उत्पादों की कीमतों में बदलाव होने जा रहा है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि 1 जुलाई से अपने ग्राहकों के बिल किस तरह बनाएंगे और उनसे विभिन्न उत्पादों के कितने दाम लेंगे। यह हाल अकेले मजूमदार का ही नहीं है, देश में उन जैसे हजारों-लाखों खुदरा विक्रेता हैं।
 
 मजूमदार अब भी जीएसटी लागू होने के बाद अपनी कीमत रणनीति ही बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा कुछ नहीं बदलेगा क्योंकि उत्पादों की कीमतें तब तक नहीं बढ़ेंगी जब तक सरकार निश्चित नियमों में बदलाव नहीं करती है और जीएसटी समायोजित एमआरपी वाला माल बाजार में नहीं आता है। कानून के जानकारों का कहना है कि नए कर ढांचे के सही ढंग से काम करने के लिए जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकार प्रभावी कर स्लैब की उचित अधिसूचनाएं जारी करें। लक्ष्मीकुमारन ऐंड श्रीधरन में कार्यकारी साझेदार (अप्रत्यक्ष कर) वी शिवसुब्र्रमण्यन कहते हैं, 'हालांकि जीएसटी परिषद कर की प्रस्तावित दरें जारी कर चुकी है, लेकिन इनकी अधिसूचना जारी करने पर ही कर के अंतिम बोझ की स्थिति साफ हो पाएगी।'
 
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, 'अगर सरकार ने खुदरा विक्रेताओं और कारोबारियों को पुराने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर नई दरों के स्टीकर लगाने की मंजूरी दी तो दरें अगले कुछ ही दिनों में बदल जाएंगी। हालांकि विनिर्माताओं के उत्पादों पर नई दरें छापने और भेजने तक उपभोक्ताओं को नई जीएसटी दरें नहीं चुकानी पड़ेंगी।'
 
हालांकि उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों के दौरान कारोबारियों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, 'ऐसे बहुत से उत्पाद हैं, जिन पर कर का बोझ बढ़ा है। इनमें शुरुआत में कारोबारियों को नुकसान होगा क्योंकि वे एमआरपी से ज्यादा दाम वसूल नहीं सकते और नई दरें जल्द नहीं आएंगी।' ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं ने 1 जुलाई से शुरू हो रही जीएसटी प्रणाली के तहत भी उत्पादों की पुराने एमआरपी पर बिक्री जारी रखने की योजना बनाई है। जीएसटी के तहत एयर कंडिशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे बहुत से टिकाऊ उपभोक्ता सामान पर कर की दर में संभावित बदलाव के बावजूद ज्यादातर खुदरा विक्रेता इन उत्पादों को पुरानी कीमत पर ही बेचेंगे। 
 
कुछ खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई करने के लिए विनिर्माताओं और मार्केटर्स के साथ बातचीत की जा रही है। हालांकि विजय सेल्स जैसी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक खुदरा शृंखलाओं ने जीएसटी के तहत कर के अतिरिक्त बोझ का आकलन करने के बाद 1 जुलाई से सभी उत्पादों की बिक्री करने की योजना बनाई है। विजय सेल्स के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता कहते हैं, 'पुराने एमआरपी से हमें कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि आमतौर पर अप्लायंस और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद एमआरपी से काफी कम कीमत पर बिकते हैं। इसलिए नई दरों के हिसाब से कीमतें बढ़ाने के बाद भी बिक्री कीमत पुराने एमआरपी से कम रहेगी।' गुप्ता को उम्मीद है कि विनिर्माताओं के वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के साथ कारोबार शुरू करने के बाद खरीद 5 जुलाई से शुरू होगी। गोदरेज ऐंड बोयसे के उपाध्यक्ष कमल नंदी कहते हैं कि सरकार के अधिसूचना जारी करने के बाद नए कीमत ढांचे के लागू होने में कुछ दिन लगेंगे। उन्होंने कहा, 'कीमत कितनी होनी चाहिए, इसका हमें पूरा अंदाजा है। तब तक हम वर्तमान कीमतों पर बिक्री करेंगे।' नंदी के मुताबिक सभी खुदरा दुकानों में नई कीमतें आने में करीब एक सप्ताह लगेगा। 
 
(करण चौधरी, अर्णव दत्ता और सायन घोषाल की रिपोर्ट के साथ)
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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