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अमेरिका में मंदी का नया दौर करीब!

आकाश प्रकाश /  June 29, 2017

अमेरिका में तत्काल मंदी की आशंका नहीं है लेकिन अगले डेढ़ साल इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण हैं। इस अवधि में यह तय हो जाएगा कि मंदी कितनी पास या दूर है। विस्तार से बता रहे हैं आकाश प्रकाश

 
अमेरिका में आर्थिक विस्तार की प्रक्रिया का आठवां वर्ष चल रहा है। विश्व युद्घ के बाद यह तीसरा सबसे लंबा विस्तारवादी दौर है। इसकी लंबी अवधि को देखते हुए इस बात पर अनिवार्य रूप से विचार किया जाना चाहिए कि इसका अंत आखिर कब होगा? कारोबारी चक्र समाप्त नहीं हुए हैं। हमें किसी न किसी मोड़ पर मंदी का सामना करना ही होगा। व्यवस्था में व्याप्त अतियों को समाप्त करने और नया चक्र शुरू करने के लिए यह आवश्यक है। 
 
वित्तीय बाजारों के लिए मंदी कोई छोटा-मोटा विषय नहीं है। आय में गिरावट आएगी और शेयर बाजारों में मंदी आने से उनके दाम कम से कम 20 फीसदी तक गिरेंगे। बॉन्ड बाजार का दायरा बढ़ेगा और कॉर्पोरेट डिफॉल्ट के मामले भी। मंदी निवेशकों पर भी भारी पड़ती है। अगर अमेरिकी बाजार में इस कदर गिरावट आई तो दुनिया भर के बाजार प्रभावित होंगे। कई बाजारों में तो इससे भी तेज गिरावट आएगी। अमेरिका में जब भी मंदी आएगी वह सभी निवेशकों के लिए दिक्कत लेकर आएगी। उभरते बाजार तो अतीत में भी इसका अनुभव कर चुके हैं। आज सभी बाजारों में मूल्यांकन बढ़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी बाजार की प्रतिक्रिया बहुत तीव्र और विध्वंसकारी होगी।
 
उपरोक्त बातों को देखें तो लगता है कि मंदी आसन्न है। क्या निवेशकों को चिंतित होना चाहिए? हकीकत यह है कि आर्थिक विस्तारवाद केवल पुराना होकर स्वयं समाप्त नहीं होता। इसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं है कि अर्थव्यवस्था में कब तक विस्तार हो। इसका अंत केवल मौद्रिक नीति में सख्ती के जरिये ही किया जाता है। इसके अलावा अर्थव्यवस्था में व्याप्त अतियों को समाप्त करके। इस ढांचे के हिसाब से देखें तो सवाल यह है कि इन दोनों मुद्दों पर हम कहां हैं? जहां तक फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में इजाफा करने और नीति को सख्त बनाने की बात है तो यह काम पहले ही शुरू हो चुका है। एफओएमसी का ताजातरीन वक्तव्य बताता है कि जैनेट येलन दरों में इजाफे को लेकर गंभीर हैं। वास्तविक दरें फिलहाल बहुत कम हैं और अर्थव्यवस्था आगे इनमें बढ़ोतरी को आसानी से झेल सकती है। 25 से 50 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी होने से आर्थिक विस्तार अप्रभावित रहेगा। यहां जोखिम यह है कि मौद्रिक नीति जिस पर निष्पक्ष बनी हुई है वह आर्थिक वृद्घि को न तो प्रोत्साहन दे रही है और न ही उसे बाधित कर रही है। कई शैक्षणिक अध्ययन से पता चलता है कि यह वास्तविक निरपेक्ष दर बीते 15 सालों में लगातार गिरी है। वर्ष 2004 में यह करीब 4 फीसदी के स्तर पर थी जबकि आज यह 0.4 फीसदी के स्तर तक आ चुकी है। ये अनुमान फेडरल रिजर्व के शोध विभाग के हैं। वास्तविक निरपेक्ष दर अमेरिका के लिए कुछ विशिष्टï नहीं है। यहां तक कि यूरोपीय संघ में भी इसमें भारी गिरावट आई है। वहां भी निरपेक्ष दर नकारात्मक हो चुकी है। मुद्रास्फीति, वृद्घि और उत्पादकता तीनों में गिरावट आई है, इसके साथ ही निरपेक्ष दर में भी। 
 
अगर ये अनुमान सही हैं तो आज निरपेक्ष दर के कम स्तर को देखते हुए कहा जा सकता है कि फेड के गलती कर जाने की आशंका है। फेड की फंड दर का उच्चतम स्तर इस चक्र से काफी कम होना चाहिए और इस दौरान दरों में कम इजाफा होना चाहिए। क्या इस बात को समझा जाएगा? अगर फेडरल रिजर्व को अपनी पूर्व घोषणा के मुताबिक मौद्रिक सख्ती का रुख अपनाए रखना है तो वर्ष 2019 के आरंभ तक मौद्रिक नीति प्रतिबंधात्मक हो जाएगी। चूंकि मौद्रिक नीति के कदम 12 से 18 माह का वक्त लेते हैं इसलिए अगर फेड कोई गलती करता है तो इसका असर समझ आने में भी वक्त लगेगा। फेड के सामने एक अन्य चुनौती रोजगार की है। या फिर कहें रोजगार की कमी। अमेरिका में बेरोजगारी की दर 4.3 फीसदी है जो फेड के आकलन से 0.4 फीसदी धीमी है। अगर वृद्घि जारी रही तो इसके 4 फीसदी से नीचे लुढ़कने की आशंका नहीं है। अगर फेड अपने आकलन पर यकीन करता है तो किसी न किसी स्तर पर श्रम बाजार की कमी मुद्रास्फीति में इजाफा करेगी। 
 
सरकार को बेरोजगारी की दर में इजाफे को अधिक स्थायित्व भरे स्तर पर ले जाना चाहिए। समस्या यह है कि बेरोजगारी में इजाफे के लिए किसी तरह की चतुराई को अपनाना मूर्खता है। इसकी बुनावट कुछ ऐसी है कि इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। अमेरिका में विश्वयुद्घ के बाद के युग में जब भी बेरोजगारी का स्तर बढ़ा, मंदी की आमद हुई। फेड मौजूदा निम्र रोजगार स्तर से कैसे निपटता है यह देखने वाली बात होगी। अगर बेरोजगारी दर बढ़ती है तो अगली मंदी आसन्न है। 
 
इस पूरे चक्र में तमाम तरह के असंतुलन बन जाते हैं। ऐसे में अचल संपत्ति का ध्यान आता है। उनके कारोबारी मॉडल को ढांचागत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है  तो ऐसे में खुदरा बुनियादी ढांचा मसलन मॉल आदि में बदलाव आना तय है। वाणिज्यिक अचल संपत्ति पहले ही वास्तविक मायनों में वर्ष 2007 के स्तर से 10 फीसदी अधिक है। वर्ष 2010 से यह उछाल 80 फीसदी है। इस क्षेत्र पर बकाया कर्ज करीब 40 खरब डॉलर है। अगर उम्मीद के मुताबिक ही मॉल, कार्यालयों और अन्य वाणिज्यिक स्थलों पर रिक्तियां देखने को मिलती हैं तो यह क्षेत्र बुरी तरह दबाव में आ जाएगा। बैंकों ने पहले ही ऋण देने के मानक सख्त कर दिए हैं। इसलिए भविष्य में बैंकों की बैलेंस शीट को अप्रत्याशित नुकसान होने की आशंका नहीं है। कारोबारी ऋण स्तर अपने उच्चतम स्तर पर है। कंपनियां कम दरों का फायदा उठाकर पुनर्वित्तीकरण कर रही हैं। जब तक दरों में इजाफा होगा दबाव नजर नहीं आएगा क्योंकि ऋण की लागत बहुत कम है और उस तक पहुंच आसान। हमें चिंता तब करनी होगी जब दरों में इजाफा हो रहा हो। 
 
उपभोक्ता ऋण पर बेहतर नियंत्रण है और मॉर्गेज में लगातार गिरावट आ रही है। उपभोक्ताओं की बात करें तो वहां शिक्षा ऋण और वाहन ऋण का दबाव अवश्य बन सकता है। शिक्षा ऋण इस समय उच्चतम स्तर पर है। इसमें देनदारी की चूक का प्रतिशत 10 है। वाहन ऋण भी पिछले उच्चतम स्तर के करीब है। देनदारी में चूक यहां भी बढ़ रही है। कुछ असंतुलन अवश्य हैं लेकिन तत्काल किसी संकट का उत्प्रेरण नजर नहीं आ रहा है। अमेरिका में निकट भविष्य में किसी मंदी की आशंका नहीं नजर आ रही है। आर्थिक चक्र में किसी भी बदलाव में 12 से 18 महीने का वक्त लग सकता है। एक बार आर्थिक चक्र बदलने के बाद यह स्पष्टï होगा कि हमें किस हद तक तैयारी करनी होगी। निवेशक पिछले आठ साल से एकदम सहजता से कारोबार करते रहे हैं लेकिन अब यह चक्र समाप्त होने को है।
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