बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार का व्यय 55 प्रतिशत बढ़ा
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सरकार का व्यय 55 प्रतिशत बढ़ा

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली June 29, 2017

इस साल समय से पहले बजट पेश करने का असर नजर आने लगा है। चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में सरकार का खर्च पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 55 प्रतिशत बढ़ा है। इससे अर्थव्यवस्था को तेज शुरुआत मिली है। सालाना व्यय की विधायी मंजूरी मार्च के मध्य तक मिल जाने से सरकार के मंत्रालयों और विभागों को 1 अप्रैल से अपने व्यय की योजना बनाने में मदद मिली है। वित्त सचिव अशोक लवासा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'वित्त वर्ष के पहले दो महीने में व्यय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।'
 
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल मई महीने में सरकारी खर्च 55 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसमें 13.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। दो महीनों में हुआ व्यय 4.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2017-18 के बजट लक्ष्य का 21.3 प्रतिशत है। पिछले साल की समान अवधि में 2.98 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो बजट अनुमान का 15 प्रतिशत था। सरकारी खातों के  आधिकारिक आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे। 
 
इस वित्त वर्ष का बजट एक महीने पहले 1 फरवरी को पेश किया गया और सालाना व्यय की योजनाओं व कर प्रस्तावों को संसद से मंजूरी 1 अप्रैल को नया वित्त वर्ष शुरू होने के पहले ही मिल गई। पूंजीगत व्यय, जो बुनियादी ढांचा तैयार करने व अन्य संपत्तियों के सृजन पर होता है, 63 प्रतिशत बढ़कर 54,000 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 33,000 करोड़ रुपये था। 
 
पिछले साल तक व्यय को मंजूरी मॉनसून सत्र में मिलता था और सरकारी कार्यक्रमों के पिछले खर्च को मंजूरी देनी होती थी, जिससे तुलनात्मक रूपसे मॉनसून के पहले के उत्पादक महीनों में सुस्ती रहती थी।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, 'बजट पहले पेश करने की वजह यह है कि हम चाहते हैं कि बजट संबंधी पूरी कवायद और वित्त विधेयक पहले पारित हो जाए और उसे जून के बजाय 1 अप्रैल और उसके बाद लागू किया जा सके, क्योंकि मॉनसून आने पर उसका असर दिखने लगता है और वास्तविक व्यय व काम अक्टूबर में शुरू हो पाता है।' एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि व्यय पहले शुरू होने से सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं पर व्यय में मदद मिली है, जिसे मुख्य रूप से कृषि, गरीबी उन्मूलन और शिक्षा आदि पर खर्च किया जाता है। 
 
सूत्रों के मुताबिक व्यय पहले करने से राजकोषीय घाटा पहले दो महीनों में बढ़ा है और यह वित्त वर्ष के 5.46 लाख करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य का करीब 69 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में 43 प्रतिशत था। राजकोषीय घाटा सरकार के राजस्व व व्यय के बीच अंतर होता है, जो इन दो महीनों के दौरान बढ़कर 3.8 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल के अप्रैल मई महीने में 2.28 लाख करोड़ रुपये था। 
 
इस दौरान कुल प्राप्तियां करीब 78,000 करोड़ रुपये रहीं, जो पिछले साल 69,900 करोड़ रुपये थीं। केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि पिछले साल की तीसरी और चौथी तिमाही में नोटबंदी की वजह से आई मंदी के बाद इस वित्त वर्ष की शुरुआत में खर्च बढऩे से अर्थव्यवस्था को बहुप्रतीक्षित बल मिलेगा। उन्होंने कहा, 'इसके साथ ही आने वाली तिमाही में जीएसटी एक और बड़ा व्यवधान है, क्योंकि तमाम कंपनियों ने जून महीने में उत्पादन सुस्त कर दिया है।' 
Keyword: budget, संसद बजट सत्र, narendra modi,,
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