बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्णायक हो बाजार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 25, 2017 12:11 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

निर्णायक हो बाजार

संपादकीय /  June 28, 2017

गत सप्ताह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ अहम निर्णय लिए। इन निर्णयों के जरिये उसका इरादा संकटग्रस्त कंपनियों के हालात में सकारात्मक बदलाव लाना है। वह इनके अंशधारकों और ऋणदाताओं को राहत देना चाहता है। बहरहाल ये प्रस्ताव भले ही फंसे हुए कर्ज के निस्तारण में मददगार साबित हों लेकिन वे उनकी स्थिति में पूर्ण सुधार लाने की दृष्टिï से अपर्याप्त हैं। इनमें से कुछ कदम तो आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही हैं जो उसने रणनीतिक ऋण पुनर्गठन (एसडीआर) के लिए जारी किए हैं। 

 
अगर बैंक अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एसडीआर के अधीन देनदारी चूकने वाले किसी कर्जदार का अधिग्रहण करता है तो उसे अल्पमत हिस्सेदारों के लिए खुली पेशकश करने से रियायत होगी या फिर उसे अंशधारिता बढ़ाने में प्राथमिकता होगी। बहरहाल, यह अहम है क्योंकि नियम कायदे नए रणनीतिक अधिग्रहणकर्ता के लिए इस बात को अनिवार्य बनाते हैं कि वह अनिवार्य खुली पेशकश करे। सेबी के बोर्ड ने इस अनिवार्यता को शिथिल कर दिया है। किसी मुद्दे को प्राथमिकता वाला बनाने की आवश्यकता को भी शिथिल किया गया है। बशर्ते कि अधिग्रहण राष्टï्रीय कंपनी लॉ पंचाट द्वारा स्वीकृत पुनर्गठन योजना के अधीन हुआ हो। 
 
ये रियायतें किसी संकटग्रस्त सूचीबद्घ कंपनी में निवेशकों की वित्तीय प्रतिबद्घताओं को काफी कम करती हैं। इसके अतिरिक्त ये ऋणदाताओं के लिए इस बात को आसान बनाती हैं कि वे फंसे हुए कर्ज में कुछ प्रतिफल हासिल करें। ऐसा करने से निवेशकों को कारोबार चलाते रहने के लिए कुछ और धन जुटाने में मदद मिलेगी। बहरहाल, सेबी ने कुछ प्रावधान बरकरार रखे हैं जो अभी भी ऐसी परिसंपत्तियों की बिक्री में बाधा साबित हो सकते हैं। मसलन, बिक्री का काम एक खास प्रस्ताव के जरिये अंशधारकों की मंजूरी हासिल करने के बाद होना चाहिए। दूसरा, नए निवेशक को अपनी अंशधारिता कम से कम तीन साल के लिए समर्पित करनी चाहिए। तीन साल की यह लॉक इन अवधि इस अनुमान के आधार पर निर्धारित की गई है कि ऐसा निवेशक कारोबार चलाने की मंशा तो रखे। परंतु जरूरी नहीं कि ऐसा हो। कई मामलों में फंसी हुई कंपनी को बचाया नहीं जा सकता है क्योंकि कारोबारी मॉडल व्यवहार्य नहीं होता है। 
 
उदाहरण के लिए कई लंबित बुनियादी परियोजनाएं ऐसे अनुमानों के आधार पर शुरू कर दी गईं जो हकीकत से दूर थे। ऐसे मामलों में किसी पूंजीपति के लिए समझदारी यही होगी कि वह ऋणदाताओं से किसी गहरे कर्ज में फंसे कारोबार को खरीदे और बाद में उसकी परिसंपत्तियों को अपनी मर्जी से बेचकर यथासंभव मुनाफा कमा ले। फंसी हुई संपत्तियों से निपटने का यही सबसे बेहतर तरीका है। जाहिर सी बात है कि लॉक इन की अवधि की शर्त प्रतिबंधात्मक है और यह ऐसी कंपनियों की दोबारा बिक्री की संभावना को सीमित करती है। 
 
एक खास प्रस्ताव की स्वीकृति का विचार इसलिए सामने आया ताकि अल्पांश हिस्सेदारी रखने वाले अंशधारकों के हितों की रक्षा की जा सके। बहरहाल, यह प्रावधान जटिल है और इसका फायदा निहित स्वार्थ वाले तत्त्वों को मिल सकता है। हालांकि अंशधारकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए लेकिन ऋणदाताओं के अधिकारों के साथ भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सेबी को अल्पसंख्यक हिस्सेदारों के हितों का बचाव करना चाहिए। इसके लिए वह यह सुनिश्चित कर सकता है कि किसी तरह का भेदभाव न किया जाए। कर्ज के निपटान के बाद जो भी बचा हो उसे सभी अंशधारकों में बराबरी से साझा किया जाना चाहिए। फंसे हुए कर्ज की हालत तो दशकों से खराब है और अब वह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि निपटना अनिवार्य है। इसे बिना ऋणदाताओं और अंशधारकों को शामिल किए हल नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में नियामक को चाहिए कि वह तेज निपटान सुनिश्चित करने का प्रयास करे। 
Keyword: sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अस्पतालों के शुल्क पर लगना चाहिए अंकुश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.