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'जीएसटी अनुपालन के लिए बने शहरी व ग्रामीण निकाय'

सुदीप्त दे /  June 28, 2017

हरियाणा में पांचवें राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन मुकुल जी अशर जुलाई में जीएसटी लागू होने तक दिल्ली में हैं, जब देश नए अप्रत्यक्ष कर के दौर में प्रवेश करेगा। अशर ने सुदीप्त दे से बात की। प्रमुख अंश...

 
जीएसटी को लेकर राज्य व सरकार की तैयारियां कैसी हैं?
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पेश किया जाना मील का पत्थर जैसी पहल है। यह उल्लेखनीय है कि इसे लेकर केंद्र सरकार, 20 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहमति बनी और इसका डिजाइन, ढांचा व इसे लागू करने के नियम तैयार हुए। कोई भी हिस्सेदार 1 जुलाई तक पूरी तरह तैयार नहींं होगा। वैश्विक अनुभवों से पता चलता है कि किसी भी बड़ी सार्वजनिक नीतिगत सुधार के मामले में एक विशेष क्षण और वक्त आता है और अगर उसमें कोई चूक या देरी होती है तो सुधार में देरी हो सकती है। जीएसटी के दौर में चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन उनका प्रबंधन संभव है। जीएसटी के लिए मनोदशा में बदलाव जरूरी है। जिनकी यथास्थिति वाली धारणा होती है और डिजिटल तकनीक से सक्षम कर प्रशासन का विरोध करते हैं, उनके लिए जीएसटी का दौर ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। 
 
जीएसटी लागू होने के बाद कीमतों पर लगाम लगाने में मुनाफाखोरी रोधी नियम कितने प्रभावशाली रहेंगे?
 
अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से पता चलता है कि जिन देशों में वृहद आर्थिक प्रबंधन तुलनात्मक रूप से मजबूत है, वहां जीएसटी (या वैट) पेश किए जाने या मौजूदा जीएसटी (वैट) दरें बढ़ाए जाने से 6-12 महीने की अवधि में उतने प्रतिशत ही दाम बढ़ते हैं, जितना कर बढ़ाया जाता है। लेकिन इससे महंगाई दर अपरिवर्तित रहती है। अगर एकबारगी लागत में बढ़ोतरी होती हैतो इससे परिवार पर असर होता है। इस समस्या से निपटने के लिए ज्यादा तर देशों, उदाहरण के लिए मलेशिया, में कदम उठाए गए हैं, जिससे जरूरी सामानों के दाम नियंत्रण में रहें और उनकी आपूर्ति में बाधा न पहुंचे। सीमित अवधि तक जीएसटी में राहत देकर ऐसा किया जाता है। मुनाफारोधी प्रावधान आम नहीं है। ऐसे प्रावधान का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब उसका वाणिज्यिक साक्ष्य हो।  
 
शहरी व स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों पर जीएसटी के असर के बारे में आपका क्या आकलन है?
 
शहरी व स्थानीय निकाय जीएसटी से कई तरीके से प्रभावित होंगे। पहला, कुछ सामान, सेवाएं और परिसंपत्तियां, जो वे खरीदते हैं वे जीएसटी के दायरे में होंगे। इनपुट जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल सकता है। ऐसे में शहरी व ग्रामीण निकायों को जीएसटी अनुपालन के लिए तैयार रहने की जरूरत होगी। राज्यों के वित्त एवं कर विभाग उचित एजेंसियां हैं, जो उन्हें तैयार कर सकती हैं। इससे एकरूपता आएगी। दूसरे, शहरी व स्थानीय निकायों द्वारा मनोरंजन कर लगाने की अनुमति की जांच हर राज्य को करने की जरूरत होगी। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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