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जीएसटी से लगेगा देसी मोबाइल विनिर्माताओं को झटका!

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली 06 27, 2017

जीएसटी का असर

आयात शुल्क पर ध्यान देने के बजाय मूल्यवर्धित स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहित करने की जरूरत
भारत का मोबाइल हैंडसेट बाजार लगभग 25 करोड़ यूनिट सालाना का है और इसमें बढ़ी है स्थानीय निर्माताओं की भागीदारी

नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था मोबाइल हैंडसेट के लिए सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा सकती है। तैयार हैंडसेटों पर 10-15 फीसदी के प्रस्तावित आयात शुल्क से जहां स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिए जाने की योजना है, लेकिन इससे स्थानीय निर्माताओं के लिए प्रोत्साहनों में कटौती हो सकती है। स्थानीय मूल्य वृद्धि 6 फीसदी से नीचे रहने के बावजूद भारत में निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन ढांचे के अभाव से उन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

जीएसटी के तहत जहां मोबाइल हैंडसेटों के लिए कर की दर 12 फीसदी तय की गई है, वहीं सरकार आयात पर अंकुश लगाने के लिए आयातित हैंडसेटों पर बेसिक कस्टम ड्ïयूटी (बीसीडी) लगाए जाने की योजना बना रही है। लेकिन इस पर अमल होने से आयातित मोबाइल हैंडसेटों और स्थानीय रूप से तैयार एवं निर्माण उत्पादों के लिए कर दर एक समान होगी। इससे हैंडसेट के निर्माण पर मिलने वाली रियायत समाप्त हो जाएगी।

इस मामले पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस उद्योग की संस्था मैट ने पिछले सप्ताह राजस्व सचिव हसमुख अधिया को ज्ञापन सौंपा। मैट मोबाइल निर्माताओं सैमसंग, ऐपल, एलजी, लेनोवो और आसुस जैसी कंपनियों का संगठन है। 22 जून को भेजे गए पत्र में मैट के अध्यक्ष नितिन कुनकोलिएनकर ने अधिया से इनपुट टैक्स क्रेडिट को उस वैल्यू की मात्रा से जोड़े जाने का अनुरोध किया है जो संभावित निर्माता जीएसटी व्यवस्था के तहत जोड़ेंगे। देश में मोबाइल हैंडसेट बाजार लगभग 25 करोड़ यूनिट सालाना का है।

स्थानीय निर्माण वर्ष 2014-15 (5.8 करोड़) और 2016-17 (17 करोड़) के बीच तेजी से बढ़ा। काउंटरपॉइंट रिसर्च और भारतीय प्रबंध संस्थान-बेंगलूरु द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए गए अनुमानों में कहा गया है कि मूल्य वृद्धि की रफ्तार कमजोर है। मौजूदा समय में प्रिंटिड सर्किट बोर्ड एसेंबली (पीसीबीए) में सिर्फ दो फीसदी मूल्य वृद्घि हुई है। पीसीबीए का हैंडसेट की लागत में 54 फीसदी से अधिक का योगदान है। वहीं डिस्पले (लागत में 16.4 फीसदी की भागीदारी), रियर कैमरा (5.7 फीसदी), फ्रंट कैमरा (1.4 फीसदी) और डिजाइन (1.3 फीसदी) में मूल्य वृद्घि नहीं दर्ज की गई है।

मूल्य वृद्घि को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें अधिक मूल्य वृद्धि के लिए ज्यादा कर छूट प्रदान करने की जरूरत है। एक ताजा रिपोर्ट में अकाउंटिंग एवं कंसल्टिंग कंपनी ईवाई ने कहा है कि सीमा शुल्क में संशोधन के बजाय हैंडसेट निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक अलग ऐसी व्यवस्था बनाना बेहतर तरीका होगा जिसमें निर्माताओं को जीएसटी के रिफंड के तौर पर राहत मिल सके। काउंटरपॉइंट रिसर्च में विश्लेषक तरुण पाठक का कहना है कि प्रमुख वैश्विक निर्माताओं को यहां निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। वह कहते हैं, 'उद्योग को दीर्घावधि परिदृश्य पर विचार करने और हैंडसेटों की एसेंबलिंग के बजाय आरऐंडडी और सीकेडी (कम्पलीट नॉक्ड डाउन) स्तर पर निर्माण में निवेश शुरू किए जाने की जरूरत है।'
Keyword: जीएसटी, आयात शुल्क, मोबाइल हैंडसेट, मेक इन इंडिया, कटौती, प्रोत्साहन, बीसीडी,
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