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मोदी-ट्रंप ने सहयोग पर जताई प्रतिबद्धता

अजय शुक्ला / नई दिल्ली 06 27, 2017

मोदी-ट्रंप मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच सोमवार की मुलाकात से पहले दोनों पक्ष इसे महज शिष्टाचार भेंट बता रहे थे। लेकिन शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों ने साझा बयान जारी कर सबको चकित कर दिया। दोनों देशों ने साझा सुरक्षा हितों और रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया। पाकिस्तान से संचालित आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई से लेकर क्षेत्रीय मसलों जैसे अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया या अमेरिका-भारत रक्षा सौदे, न्यायोचित एवं बराबरी का व्यापार संबंध कायम करने पर दोनों देशों ने प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए भारत और अमेरिका ने उससे यह सुनिश्चित करने को कहा कि उसकी धरती का इस्तेमाल सीमा पार आतंकी हमलों के लिए नहीं हो।

चीन को लेकर ट्रंप के नरम-गरम रुख को देखते हुए चीन को रणनीतिक रूप से घेरने के लिए भारत के साथ संबंध कायम करने के पूर्व के प्रयास को अभी तक कमतर रहने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन साझा बयान ने इन अटकलों को खारिज कर दिया। बराक ओबामा की जनवरी 2015 में नई दिल्ली की यात्रा के दौरान 'संयुक्त रणनीतिक दृष्टिïकोण' पर काम करने की दोनों देशों ने प्रतिबद्धता जताई और अपने रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में भी कदम उठाने पर सहमति जताई गई। 

इसमें पूरे इलाके में जहाजों के परिवहन, हवाई उड़ान और वाणिज्य में आजादी को लेकर चीन के धमकाने वाले रवैये को भी शामिल किया और सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से सीमा और समुद्री सीमा के विवाद सुलझाने की अपील की। यह दक्षिण और पूर्वी चीन सागर पर चीन के दावे पर पेइचिंग पर निशाना साधा गया है। चीन इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसले को भी मानने से इनकार कर रहा है। व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी जोशुआ व्हाइट ने कहा कि साझा बयान को व्यापक संदेश के लिहाज से तैयार किया गया था। उन्होंने ट्वीट किया, 'इस मामले में संयुक्त रणनीतिक दृष्टिïकोण 2015 को अब भी बरकरार रहने के संकेत दिए गए हैं।'

पेइचिंग के बेल्ट एवं रोड पहल (बीआरआई) पर चीन को इशारों में संकेत देते हुए साझा बयान में कहा गया कि क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को मदद की जाएगी लेकिन ऐसा करते समय संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता, कानून और पर्यावरण का सम्मान करना जरूरी होगा। भारत क्षेत्रीय के उल्लंघन का आधार पर लगातार चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी बीआरआई को खारिज करता रहा है क्योंकि यह गिलगिट-बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगा और भारत का दावा है कि यह इलाका जम्मू कश्मीर का हिस्सा है।

आतंकवाद

ट्रंप ने भारत की उम्मीदों के अनुरूप पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। दोनों देशों के नेताओं ने आतंक की सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने की जरूरत पर बल दिया। दोनों देशों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने और सूचीबद्ध करने के प्रस्तावों पर नई परामर्श प्रणाली पर भी सहमति बनी। मोदी और ट्रंप ने ज्ञात और संदिग्ध आतंकियों की यात्रा पर निगरानी रखने के लिए जानकारी साझा करने के प्रस्ताव का स्वागत किया।

बड़ी रक्षा साझेदारी

अमेरिका ने भारत को हाल में एक बड़ा रक्षा साझेदार बताया और इसी कड़ी को और मजबूत करते हुए संयुक्त बयान में कहा गया, 'अमेरिका के करीबी सहयोगियों की तर्ज पर  ही अमेरिका और भारत एक समान स्तर पर  आधुनिक रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी पर मिलकर काम करेंगे।' उम्मीद के मुताबिक ही संयुक्त बयान में यह कहा गया कि अमेरिका ने भारत को गार्डियन ड्रोन का सौदा करने की पेशकश की है ताकि देश की क्षमता बढ़ाने के साथ ही साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा दिया जा सके। 22 गार्डियन ड्रोन का प्रस्तावित सौदा 2 अरब डॉलर से अधिक का होगा। 

इसके अलावा करीब एक अरब डॉलर वाले चार बोइंग पी-81 पोसीडन समुद्री विमान, 3 अरब डॉलर की कीमत वाले हेलिकॉप्टर जिनमें 22 एच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और 15सीएच-47एफ चिनूक हेवी लिफ्टर और 70 करोड़ डॉलर के ऑर्डर वाले 145 एम-777 बेहद हल्के तोप की डिलिवरी अभी पाइपलाइन में है। सोमवार को अमेरिकी कांग्रेस ने 36.6 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत वाले हेवी लिफ्ट ट्रांसपोर्ट विमान सी-17 ग्लोबमास्टर 3 की प्रस्तावित बिक्री की सूचना दी। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने यह खुलासा किया था कि अमेरिका की रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने एफ-16 तैयार करने के लिए उत्पादन प्रक्रिया का स्थानांतरण अमेरिका से भारत में करने का प्रस्ताव रखा था जिस पर चर्चा हुई लेकिन इसे संयुक्त बयान में शामिल नहीं किया गया। 

मोदी ने मीडिया से कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने द्विपक्षीय रक्षा तकनीक, व्यापार और विनिर्माण साझेदारी को मजबूत करने के बारे में बात की है जो हमारे लिए फायदेमंद होगा।' अगले महीने दोनों देशों की नौसेना मालाबार अभ्यास करेगी और अमेरिका भी हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) में हिस्सा ले सकता है जबकि यह कार्यक्रम तटीय देशों तक ही सीमित है। संयुक्त बयान में वैश्विक परमाणु-अप्रसार साझीदार होने के नाते अमेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, वासेनार संधि और ऑस्ट्रेलिया समूह में भारत की शीघ्र सदस्यता के लिए पुरजोर समर्थन दोहराया।
Keyword: नरेंद्र मोदी, डॉनल्ड ट्रंप, मुलाकात, सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी, पाकिस्तान, आंतकवाद, चीन,
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