Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 26, 2017 09:20 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम निवेश खबर

कृषि अर्थव्यवस्था चरमराने से बढ़ा असंतोष

संजीव मुखर्जी /  June 26, 2017

प्रकाश जावले कोई साधारण इंसान नहीं हैं। वह मध्य प्रदेश के उन लाखों किसानों में शामिल हैं जिनकी उपलब्धियों का बखान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल में नीति आयोग के समक्ष अपनी प्रस्तुति में किया था। जावले मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के हल्देपुर गांव के निवासी हैं। मुख्यमंत्री की प्रस्तुति में दावा किया गया था कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रति एकड़ उनकी आय में 43 फीसदी का उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। 

 
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने प्रस्तुति में दिए गए जावले के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन नंबर बंद था। राज्य सरकार की मानें तो जावले कोई काल्पनिक किसान नहीं हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जिस तरह किसान आंदोलन कर रहे हैं उसे देखकर तो जावले किसी परीकथा के ही पात्र लगते हैं। मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन एक जून को शुरू हुई लेकिन एक सप्ताह बाद उसने हिंसा का रूप अख्तियार कर लिया। मंदसौर से महज 15 किलोमीटर दूर पिपलियामंडी इलाके में पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों पर गोली चला दी। प्रदर्शनकारी किसान स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के मुताबिक अपनी फसल की बेहतर कीमत और उत्तर प्रदेश की तरह कर्ज माफी की मांग कर रहे थे। छह जून को पुलिस गोलीबारी में पांच किसान मारे गए जबकि एक ने कुछ दिन बाद दम तोड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यापारियों और किसानों के बीच संघर्ष हिंसात्मक हो गया था और पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों पर गोली चलाकर व्यापारियों का पक्ष लिया। स्थानीय प्रशासन की भूमिका और इस हिंसक संघर्ष के कारणों की जांच का जिम्मा उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को सौंपा गया है।
 
समस्या की जड़ें गहरीं 
 
मध्य प्रदेश में किसानों के संघर्ष के केंद्रबिंदु पिपलियामंडी सहित मंदसौर के कई हिस्सों में एक सप्ताह से अधिक समय तक कफ्र्यू रहा और अब धीरे-धीरे वहां स्थिति सामान्य हो रही है। लेकिन इस असहज शांति के पीछे किसानों की बदहाली की असलियत छिपी है। दरअसल इस इलाके में प्रमुख फसलों की कीमतों में भारी गिरावट आई है जिससे किसान कर्ज के जाल में फंस गए। इतना ही मंडी में व्यापारी भी अब नकद भुगतान नहीं करते हैं बल्कि चेक और इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से भुगतान करते हैं। इस वजह से भी किसानों का गुस्सा फूटा। पुलिस गोलीबारी में दिनेश पाटीदार का छोटा बेटा अभिषेक भी मारा गया था। दिनेश ने इस संवाददाता को बताया कि उन्होंने जिला सहकारी बैंक के 500,000 रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए फरवरी में अपनी जमीन बेच दी थी।
 
स्थानीय नेता महेंद्र पाटीदार ने कहा, 'प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने हमें चेक से भुगतान किया लेकिन बैंकों ने समय पर भुगतान नहीं किया। वे हमारे साथ अछूतों जैसा व्यवहार करते हैं और कभी-कभार तो हमें कर्ज देने से पहले ही ब्याज काट लेते हैं। मंदसौर और आसपास के इलाकों में होने वाली प्रमुख फसल से हाल में वर्षों में किसानों को लागत भी नहीं मिल पाई है जबकि कृषि लागत लगातार बढ़ती जा रही है।'
 
एजीमार्केट.एनआईसी.इन के आंकड़ों के मुताबिक इलाके की सबसे बड़ी थोक मंडी इंदौर में पिछले एक साल के दौरान लहसुन की कीमत में 65 फीसदी, प्याज की कीमत में 67 फीसदी, टमाटर की कीमत में 85 फीसदी और आलू की कीमत में 52 फीसदी की गिरावट आई है। इलाके की मुख्य फसल सोयाबीन की कीमत में इस दौरान 25 फीसदी की कमी आई है। कुल मिलाकर मुख्यत: सोयाबीन, गेहूं, प्याज, लहसुन और टमाटर पर आधारित मालवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पिछले एक साल में बुरी तरह चरमरा गई जिससे किसान बदहाली के कगार पर पहुंच गए। लेकिन किसानों के बीच पनप रहे इस असंतोष से राज्य सरकार बेखबर थी। मध्य प्रदेश के कृषि विभाग के पूर्व निदेशक जी एस कौशल ने कहा, 'पिछले साल 6 रुपये के भाव पर किसानों से प्याज खरीदा था। इस साल किसानों के प्रदर्शन के बाद इसे बढ़ाकर 8 रुपये कर दिया गया। सवाल यह है कि सरकार ने पहले इसकी योजना क्यों नहीं बनाई?' केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में लागू की गई योजनाओं का जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है। स्थानीय किसान ए पी गोस्वामी ने कहा, 'राज्य सरकार दावा करती है कि किसानों को हर दिन छह घंटे बिजली मिलती है लेकिन बिजली उल्टे समय आती है। ऐसे में खेती के कामों के लिए उसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।'
 
मध्य प्रदेश में कृषि की स्थिति पर इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) द्वारा अप्रैल में तैयार की रिपोर्ट के मुताबिक 2010-11 और 2013-14 के बीच राज्य सब्जी उत्पादन के मामले में नौवें से चौथे स्थान पर पहुंच गया। पहले तीन स्थानों पर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। देश के कुल सब्जी उत्पादन में मध्य प्रदेश का हिस्सा 2.8 फीसदी से बढ़कर 7.4 फीसदी हो गया। मध्य प्रदेश में प्रति हेक्टेयर सब्जी उत्पादन 20.4 टन है जो 17.4 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली सब्जियां प्याज, आलू और टमाटर हैं। लेकिन बागवानी में राज्य में जिस तेजी से प्रगति की वही उसके लिए मुसीबत का सबब बन गई। हालत यह है कि किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। यानी मध्य प्रदेश सरकार की नीतियां और घोषणाएं जमीनी वास्तविकता के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रही हैं।
 
किसानों में गुटबाजी
 
मध्य प्रदेश में कई संगठन किसान आंदोलन की अगुआई कर रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा और मुख्य संगठन राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ है जिसकी अगुआई आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता और भारतीय किसान संघ की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा कर रहे हैं। कक्काजी के नाम से लोकप्रिय 66 साल के शिव कुमार शर्मा मध्य प्रदेश में एक जून से शुरू हुए किसान आंदोलन का मुख्य चेहरा थे। उनका संगठन देश के 91 जिलों में फैला है लेकिन उसका ज्यादातर प्रभाव मध्य प्रदेश में ही है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार ने किसानों के आंदोलन से निपटने में कई गलतियां की। उनमें एक गलती आंदोलन खत्म करने के लिए भारतीय किसान संघ के साथ हुआ समझौता भी था। राज्य के किसान आंदोलन की अगुआई कर रहे राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने इस समझौते को विश्वासघात करार दिया और इसके विरोध में राज्यव्यापी बंद का आह्वïान कर दिया। कक्काजी की अगुआई में आंदोलन कर रहे संगठनों ने अब अपने आंदोलन को और तेज करने तथा इसे हरियाणा और राजस्थान में भी फैलाने का फैसला किया है। जाहिर बात है कि मंदसौर ने जो चिंगारी भड़काई है वह तेजी से पूरे देश में भड़क सकती है।
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या अर्थशास्त्रियों की नई टीम विकास को दे पाएंगे रफ्तार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.