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ई-कॉमर्स कंपनियों को टीसीएस पर राहत

करण चौधरी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली June 26, 2017

सरकार ने एमेजॉन, फ्लिपकॉर्ट और स्नैपडील जैसी ई कॉमर्स कंपनियों को राहत देते हुए स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) करने का प्रावधान टाल दिया है, जो पोर्टल पर सामान की बिक्री करने वाले कारोबारियों से इन कंपनियों को 1 प्रतिशत की दर से वसूलना था। इसके साथ ही सरकार ने ई-कॉमर्स के माध्यम से बिक्री करने वाली छोटी इकाइयों को जीएसटी नेटवर्क में पंजीकरण कराने के लिए और वक्त दिया है। 
 
ई-कॉमर्स कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि इससे वेंडरों का नकदी प्रवाह बना रहेगा, लेकिन कंपनियां टीसीएस को पूरी तरह से खत्म किए जाने के  पक्ष में हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) का प्रावधान कब से लागू किया जाएगा, इसके बारे में बाद में सूचना दी जाएगी।' इसमें आगे यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति स्रोत पर संग्रह के लिए जवाबदेह होगा, वह पंजीकरण के लिए भी जवाबदेह होगा, लेकिन संग्रह की जिम्मेदारी उस तिथि से बनेगी, जब उसे लागू किया जाएगा। 
 
केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) कानून के तहत अधिसूचित इकाइयों को 2.5 लाख रुपये से अधिक की वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के लिए भुगतान पर एक प्रतिशत टीडीएस संग्रह की आवश्यकता है। एमेजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हम टीसीएस के प्रावधान को टाले जाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे मार्केटप्लेस पर कारोबार की निरंतरता बहाल होगी, लेकिन इसमें सबसे अहम है कि हमारे विक्रेताओं के नकदी प्रवाह पर असर ऐसे समय पर न पड़े जब से नए कर के दौर में जाने वाले हैं। हम सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने उद्योग जगत के निवेदन को स्वीकार किया, जो अभी शुरुआती दौर में है।'
 
दिल्ली की एक ई कॉमर्स कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार के इस फैसले से हमारी जिंदगी बहुत आसान होगी, लेकिन असर राहत तभी मिलेगी जब टीसीएस हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए। ई-कॉमर्स कारोबारी जीएसटी के तहत प्रस्तावित 1 प्रतिशत टीसीएस के खिलाफ हैं। बहरहाल सरकार का पक्ष है कि वे हर वेंडर को नहीं तलाश सकते, जो ई कॉसर्म मार्केटप्लेस के माध्यम से बिक्री कर रहा है और ई-कॉमर्स पर यह कर लागू किए जाने से ई-कॉसर्म कंपनियां उन्हें चिह्नित कर लेंगी। बहरहाल पहले यह कर 2 प्रतिशत प्रस्तावित था, जिसे अब घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है। 
 
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि व्यापार एवं उद्योग से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर सरकार ने सीजीएसटी, स्टेट जीएसटी कानून, 2017 के तहत टीडीएस (धारा 51) तथा टीसीएस (धारा 52) से जुड़े प्रावधान को आगे टालने का निर्णय किया है। सरकार ने धारा 52 और धारा 24 (आई) नहीं लागू किया है, इसलिए ई कॉमर्स के छोटे वेंडरों को राहत मिलेगी। इस धारा में ऐसे वेंडर भी आते हैं, जिनका कारोबार 20 लाख रुपये से कम है या अगर वे दूसरे राज्य में आपूर्ति नहीं करते हैं। अन्यथा जिन कंपनियों का सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से कम है, उन्हें जीएसटी में पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं है। बयान के मुताबिक, 'यह कदम स्रोत पर कर कटौती के पात्र व्यक्तियों  ई-वाणिज्य कंपनियों और उनके आपूर्तिकर्ताओं को इस ऐतिहासिक कर सुधार के लिए तैयार होने के वास्ते उठाया गया है।'
 
क्लियरटैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं कि इन कंपनियों को अपने विक्रेताओं को जीएसटी के बारे में समझाने और 100 प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने में बहुत कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा, 'इनमें से हर कारोबारी मौजूदा दौर के पंजीकरण में शामिल नहीं है और कुछ तो ऐसे कारोबारी हैं, जिनका कारोबार महज कुछ लाख का है। जीएसटी के शुरुआती दिनों में ऐसी कंपनियों के लिए यह राहत अहम होगी।'
 
जीएसटी के विरोध में पटाखा विनिर्माता हड़ताल पर 
 
पटाखों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 28 प्रतिशत रखे जाने के विरोध में तमिलनाडु में पटाखा विनिर्माता 30 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। तमिलनाडु फायरवक्र्स ऐंड अमोरसेस मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशंस के अध्यक्ष ए. असैथांबी ने कहा कि जीएसटी की 'अत्याधिक' दर का इस उद्योग से जुड़े आठ लाख श्रमिकों पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे घटाकर 15 प्रतिशत किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य की 811 पटाखा विनिर्माण इकाइयां इस अनिश्चितकालीन हड़ताल में हिस्सा लेंगी। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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