बिजनेस स्टैंडर्ड - तेजी से घट रहा दवाओं का स्टॉक
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तेजी से घट रहा दवाओं का स्टॉक

अनीश फडणीस और सोहिनी दास /  June 26, 2017

एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले स्टॉक कम रखने की वजह से खुदरा बाजारों में 5 से 10 फीसदी ब्रांडों की दवाएं लगभग गायब हो सकती हैं। यह कहना है दवा उद्योग के उन कार्याधिकारियों और विशेषज्ञों का, जिनसे बिज़नेस स्टैंडर्ड ने बात की।  स्टॉकिस्ट कर से मिलने वाली चोट कम करने और कर प्रणाली में बदलाव के साथ आने वाली जटिलताएं कम करने के लिए दवाओं का स्टॉक कम से कम रख रहे हैं। इस समय दवाओं पर कर की दर करीब 9 फीसदी है, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद ज्यादातर दवाओं पर 12 फीसदी कर लगेगा। 

 
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स ऐंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) ने पिछले हफ्ते जब आंकड़े दिए थे तो स्टॉकिस्टों के बाद दवाओं का स्टॉक तेजी से कम हो रहा था। मई के अंत में उनके पास 40 दिनों की जरूरत भर की दवाएं थीं। लेकिन 14 जून को केवल 27 दिन के लिए जरूरी दवाएं बची थीं। दवा कारोबारियों को इस बात का भी सिरदर्द है कि जीएसटी प्रणली अपनाने के लिए अभी तक वे पूरी तरह तैयार नहीं हो सके हैं। 
 
स्वास्थ्य सेवा प्रदाता क्विंटाइल्सआईएमएस ने पिछले दिनों कहा था, 'नई कर प्रणाली की वजह से लघु अवधि की दिक्कतों से निपटना चुनौतीपूर्ण होगा। 50 से 70 फीसदी स्टॉकिस्ट और दवा दुकानदार असमंजस में हैं और उन्होंने अपने कारोबार में जीएसटी को लागू करने की पहल नहीं की है। स्टॉकिस्टों के 1 जुलाई तक स्टॉक को कम रखने से कुछ समय उपलब्धता की दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।'
 
हालांकि एआईओसीडी ने दवाओं की किल्लत से इनकार किया है। एआईओसीडी की बाजार अनुसंधान शाखा के निदेशक अमीश मसुरेकर ने कहा, 'जीएसटी लागू होने में जितना समय रह गया है, उससे दोगुने अरसे के लिए स्टॉक वितरकों के पास बचा है। इसीलिए चिंता की बात नहीं है क्योंकि मांग से ज्यादा स्टॉक है और उपभोक्ताओं को दवाओं की किल्लत होने के बिल्कुल भी आसार नहीं हैं।'
 
मसुरेकर का अनुमान है कि वितरक जीएसटी नेटवर्क पोर्टल पर जून के अंत तक पंजीकृत हो जाएंगे और उन्हें आपूर्ति में अवरोध पैदा होने की कोई वजह नजर नहीं आती है। एआईओसीडी के आंकड़ों से पता चलता है कि दवाओं की किल्लत के डर की वजह से इनकी हड़बड़ी में खरीद की जा रही है। अहमदाबाद की एक दवा कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'उपभोक्ता ज्यादा खरीद कर रहे हैं। इससे स्टॉक जल्दी खत्म होने के आसार हैं।'
 
ल्यूपिन के घरेलू कारोबार के पूर्व प्रमुख और इर्गोस लाइफ साइंसेज के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) शक्ति चक्रवर्ती ने कहा, 'आमतौर पर स्टॉकिस्ट जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखते हैं, इसलिए मुझे किल्लत पैदा होने के कोई आसार नजर नहीं आते हैं।' सिप्ला, एलेंबिक और सन फार्मा सहित दवा कंपनियां स्टॉकिस्टों को खरीद पर 6.5 से 8.5 फीसदी तक छूट दे रही हैं ताकि जून में उनके पास पर्याप्त स्टॉक रहे। वहीं सिप्ला और जीएसके फार्मा स्टॉकिस्टों को उधारी चुकाने के लिए अतिरिक्त समय की पेशकश कर रही हैं, लेकिन इन उपायों से उनकी चिंताएं दूर नहीं हो रही हैं। मुंबई के एक दवा स्टॉकिस्ट ने कहा, 'कुछ कंपनियों ने कहा है कि वे अप्रैल से जून के नहीं बिक पाने वाले स्टॉक को वापस नहीं लेंगी। केवल गुणवत्ता से संबंधित दिक्कतों वाले स्टॉक को ही वापस लिया जाएगा। इसके अलावा कंपनियों ने हमें खुदरा स्तर पर प्रोत्साहनों के वितरण का काम भी करने को कहा है।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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