बिजनेस स्टैंडर्ड - पुनर्विचार जरूरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, December 11, 2017 05:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

पुनर्विचार जरूरी

संपादकीय /  June 26, 2017

देश आगामी 1 जुलाई से नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को अपनाने जा रहा है। लेकिन यह बदलाव आसान साबित नहीं होगा। कंपनियों को अपनी प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव लाने होंगे। अनुपालन की लागत किसी न किसी स्तर पर अवश्य कम होगी लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का अंतिम डिजाइन खामी से भरा है और उसने पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। जीएसटी के लिए जो सहयोगी बुनियादी ढांचा बनाया गया है, वह भी इतना मजबूत नहीं नजर आ रहा है कि निजी क्षेत्र इस बदलाव को लेकर सहज महसूस कर सके। जैसा कि जीएसटी नेटवर्क के चेयरमैन नवीन कुमार ने इस समाचार पत्र से कहा, अगर उनको इसकी शुरुआत के पहले कुछ महीनों का वक्त और मिल जाता तो बहुत ही बेहतर होता। कूट रचना का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है और इसे तत्काल बहुत बड़े पैमाने पर काम से जूझना होगा। कुमार ने खुलकर यह स्वीकार किया कि अब कूट लेखन पूरा होने के बाद उसके परीक्षण के लिए जरा सा भी वक्त शेष नहीं है। 

 
ऐसे में जब कंपनियां जीएसटी के बदलाव को अपनाने की तैयारी कर रही हैं तो उनको ढेर सारी चिंताएं होना लाजिमी है। परंतु शायद सबसे बड़ी चिंता वह प्रावधान है जिसे सरकार ने अनावश्यक रूप से शामिल किया। नए जीएसटी कानून का एक पहलू कंपनियों के सर पर तलवार की मानिंद लटक रहा है। यह है तथाकथित मुनाफाखोरी रोकने संबंधी प्रावधान। यह प्रावधान सरकार को यह अधिकार देता है कि वह कंपनियों पर दबाव बनाए कि वे नई व्यवस्था के अधीन लागत में होने वाली किसी भी बचत को सीधे ग्राहकों को हस्तांतरित करे। गत सप्ताह जीएसटी परिषद ने इस बात को  रेखांकित किया कि कैसे मुनाफाखोरी रोकने की व्यवस्था व्यवहार में काम करेगी। इसके लिए एक प्राधिकार का गठन किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता सचिव स्तर के एक अधिकारी को दी जाएगी जिसके पास कीमत कम करने या कंपनियों को ग्राहकों को पैसे वापस लौटाने के आदेश देने का अधिकार होगा। इसके अलावा वह जुर्माना लगाने और कंपनियों का पंजीयन रद्द करने का अधिकार तक देने में सक्षम होगी। ये पुरातनपंथी कानून हैं जिनका आसानी से दुरुपयोग हो सकता है। 
 
इतना ही नहीं मुनाफाखोरी रोकने के लिए प्राधिकार का गठन करना अपने आप में एक बुरा विचार है। इसका अमल अवश्य दिक्कतें खड़ी करेगा। सैद्घांतिक तौर पर देखा जाए तो सरकार को बाजार में इस हद तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अगर कोई कंपनी कीमत बढ़ाने की आवश्यकता महसूस करती है तो उसके मामले में तब तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब तक कि वह प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन नहीं कर रही हो। जीएसटी का उद्देश्य है देश में कारोबार की व्यवस्था को आसान और सुगम बनाना। यह सुनिश्चित करना अपने आप में गलत है कि कारोबारियों के अनुकूल एक नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी कॉर्पोरेट मुनाफा बढऩे न पाए। व्यवहार में देखा जाए तो सरकार ने यह मान लिया है कि मुनाफाखोरी रोकने संबंधी प्रावधान को लेकर कई तरह की चिंताएं हैं। यही वजह है कि सरकार ने घोषणा की है कि नया प्राधिकार केवल शुरुआती दो वर्ष की अवधि के लिए गठित किया जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद बहुत बड़े स्तर पर मनमानेपन की आशंका बची हुई है। प्राधिकार के घटक को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि नया संगठन शायद मुनाफाखोरी साबित करने के लिए भी पूरी तरह तैयार नहीं हो। ऐसे में इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि उद्योग जगत से मनमानी मांग की जाए। जाहिर सी बात है, यह कंपनियों के लिए अच्छी खबर तो कतई नहीं। इस मसले पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.