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कड़क हुई नेपाल की चाय

अभिषेक रक्षित / कोलकाता June 25, 2017

दार्जिलिंग में संपूर्ण बंद के कारण चाय पत्तियों की दूसरी सीजन की तुड़ाई न होने की वजह से यहां के चाय उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। इससे अगर कोई फायदे की उम्मीद कर रहा है तो वह भारत का पड़ोसी देश नेपाल है, जो दुनियाभर में पसंद की जाने वाली दार्जिलिंग चाय का विकल्प मुहैया कराता है। दार्जिलिंग में चाय के करीब 87 बागान हैं, लेकिन यहां चाय के दूसरे सीजन की तुड़ाई ही नहीं हो पाई। इससे दार्जिलिंग का चाय उद्योग यूरोपीय संघ, जापान और अमेरिका के साथ पहले से किए हुए निर्यात करार पूरे नहीं कर सकने के कगार पर है। यूरोपीय संघ, जापान और अमेरिका चाय की इस किस्म के मुख्य बाजार हैं। इन हालातों को देखते हुए दुनियाभर में दार्जिलिंग की चाय की किल्लत पैदा हो सकती है, लेकिन नेपाल की इलम चाय इस कमी को पूरी कर सकती है। 

 
चाय के प्रमुख विनिर्माता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें दार्जिलिंग की पहाडिय़ों में संपूर्ण बंद की वजह से पहले ही करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है और इसका चाय तुड़ाई के अगले सीजन और वर्ष भी असर पड़ सकता है। ऐसे हालात का नेपाल सबसे ज्यादा फायदा उठाने की कोशिश करेगा। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के महासचिव कौशिक बसु ने कहा कि जब कभी बागान दोबारा से खुलेंगे तब तक झाडिय़ां ज्यादा बड़ी हो चुकी होंगी, जिनमें भारी कटाई-छंटाई की जरूरत पड़ेगी और ये पत्तियां बिकने लायक नहीं होंगी। जब तुड़ाई लायक नई पत्तियां फूटने लगेंगी, तब तक मॉनसून आ जाएगा और उसके बाद पतझड़ आ जाएगा। 
 
बारिश और पतझड़ के मौसम में आने वाली पत्तियों की गुणवत्ता पर भी असर पडऩे के आसार हैं। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'तुड़ाई के मुख्य सीजन (जून की शुरुआत) में बागान का महज एक पखवाड़े बंद रहना गुणवत्ता और पूरे साल के उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करने के लिए काफी है।' इसके नतीजतन इस साल दार्जिलिंग की चाय की गुणवत्ता कमजोर रहेगी और इसलिए उसकी कीमत लागत जितनी भी नहीं मिल पाएगी। 
 
कुर्सियोंग के एक चाय उत्पादक ने कहा कि जब तक उनके बागान से जर्मनी के चाय विनिर्माताओं को आपूर्ति बहाल होगी, तब तक कीमतें घटकर 6.7 डॉलर प्रति किलोग्राम पर आ जाएगी। ये इस समय 13.41 डॉलर प्रति किलोग्राम हैं। इतनी कम कीमत मिलने से लागत की भरपाई भी नहीं हो पाएगी, जो प्राप्त औसत कीमत से 1.5 डॉलर अधिक होगी। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'दार्जिलिंग चाय की आपूर्ति बहुत कम रहेगी, इसलिए नेपाल की चाय दार्जिलिंग की चाय के प्रमुख वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बना सकती है।' नेपाल की इलम चाय का निर्यात मुख्य रूप से भारत, जर्मनी, चेक गणराज्य, अमेरिका और जापान को होता है। यह चाय दार्जिलिंग चाय का निकटवर्ती विकल्प है और इसका स्वाद और सुगंध दार्जिलिंग चाय जैसी है। 
 
उत्पादक इस बात को लेकर चिंतित है कि जर्मनी की चाय विनिर्माता कंपनियां नेपाल की चाय को तरजीह दे सकती हैं क्योंकि कुछ समय दार्जिलिंग की चाय बाजार में उपलब्ध नहीं होगी। भारत की एक प्रमुख चाय कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अगर जर्मनी के चाय विनिर्माता अपने पैकेटों पर दार्जिलिंग की जगह हिमालय की चाय मुद्रित करना शुरू कर देंगे तो यह इस उद्योग पर घातक चोट होगी।'
 
अब तक दार्जिलिंग की चाय अपने अनोखे भौगोलिक संकेतक के टैग, सुनिश्चित आपूर्ति की प्रतिबद्धता और कम कीमतों के कारण यूरोपीय बाजारों में दबदबा बनाए हुए थी। वर्ष 2016 में भारत ने जर्मनी को 105.5 लाख किलोग्राम चाय का निर्यात किया, जिसकी औसत कीमत 3.55 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। वहीं नेपाल ने 1 लाख किलोग्राम चाय का निर्यात किया, जिसकी औसत कीमत 10.81 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। अधिकारी ने कहा, 'लेकिन अब दार्जिलिंग की चाय की भविष्य में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता है, इसलिए यूरोपीय संघ, जापान और अमेरिका के आयातक इसका विकल्प तलाशेंगे और नेपाल इसका सबसे बड़ा विकल्प है। स्वाभाविक है कि नेपाल के बागान उन बाजारों को आपूर्ति बढ़ाएंगे, जहां हमारा दबदबा था।'
Keyword: tea, दार्जिलिंग चाय,
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