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मोदी का 'ट्रंप' कार्ड

संपादकीय /  June 22, 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की आगामी सोमवार को होने वाली मुलाकात की कुछ खास चर्चा नहीं है। ऐसा मोटे तौर पर इसलिए है क्योंकि अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बने ट्रंप स्वभाव से थोड़े अस्थिर हैं, इसलिए उनसे उम्मीदें भी बहुत ज्यादा नहीं की जातीं। क्या मोदी उनके साथ भी वह व्यक्तिगत तालमेल कायम कर पाएंगे जो उन्होंने पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ किया था। जिसके चलते वह भारत और अमेरिका के रिश्तों में संप्रग सरकार के अंतिम दिनों में आने लगी गिरावट को थामने में कामयाब रहे थे। बल्कि कुछ हद तक उसे बदलने में भी सफल रहे थे। हालांकि दोनों नेताओं में कई चीजें साझा भी हैं। ट्रंप की नीतियों में काफी अस्थिरता है। उन्होंने कई नीतियों में एकदम कड़े बदलाव किए तो कई बार वह संदेहास्पद तथ्यों के भरोसे दिखे। भारत के साथ भी कई अहम मुद्दों पर अनिश्चितता साफ नजर आती है। इसमें एच1बी वीजा से लेकर लड़ाकू विमान, सीमा पार आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। व्हाइट हाउस के शीर्ष आर्थिक सलाहकार केनेथ जस्टर को भारत का राजदूत बनाया जाना बताता है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्तों को अहमियत देता है। हालांकि मोटे तौर पर नए प्रशासन से मिलने वाले संकेत अस्पष्टï ही रहे हैं। 

 
एच1बी वीजा पर सख्त रुख, भारतीय आईटी कंपनियों को काफी प्रभावित कर रहा है और अमेरिका का यह आरोप भी गलत है कि भारत और चीन गैरजिम्मेदाराना अंदाजा में उत्सर्जन कर रहे हैं और अपनी जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रतिबद्घताओं को पूरा करने के लिए विदेशी सहायता मांग रहे हैं। इससे दोनों देशों के रिश्तों की चुनौती स्पष्टï होकर सामने आती है। वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को लेकर सख्त रुख दिखाया है जिससे यह पता लगता है कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच निकट सहयोग की गुंजाइश है। लेकिन इस दिशा में एक व्यापक नीतिगत खाका अभी तैयार करना बाकी है। ट्रंप के दो रुख एकदम स्पष्टï हैं। वह विदेशी मुल्कों के साथ रिश्तों को लेनदेन की कारोबारी दृष्टिï से देखते हैं और अमेरिका में घरेलू स्तर पर रोजगार सृजन करना उनके लिए अहम है। मोदी पहले ही सफलतापूर्वक यह संदेश दे चुके हैं कि बहुपक्षीय विश्व में उनके लिए अपने देश के हित अहम हैं। हाल ही में यूरोप और रूस की अपनी यात्रा के दौरान मोदी ने भारत की जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रतिबद्घताओं के बारे में खुलकर बात की और अपने इरादे साफ जाहिर किए। उन्होंने संकेत दिए कि वह परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी पर रूस के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। 
 
गत सप्ताह कतर में राहत सामग्री भेजने के लिए सीधी शिपिंग लाइन खोलते हुए उन्होंने एक व्यापक संदेश दिया। अमेरिकी गठजोड़ वाली खाड़ी सहयोग परिषद ने वह लाइन बंद की है। इसके अलावा भारत-अमेरिका-जापान के नौसैनिक अभ्यास की भी योजना है। यह अपनी तरह की बड़ी पहल होगी जो इन देशों के बीच सैन्य गठजोड़ मजबूत करने में मदद करेगी। इससे चीन जैसी क्षेत्रीय ताकत के साथ शक्ति संतुलन कायम करने में भी मदद मिलेगी। वह वन बेल्ट वन रोड के तहत अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। एच1बी वीजा की बात करें तो उसे लेकर कुछ चर्चा जारी है लेकिन मोदी को ट्रंप को यह समझाना होगा कि यह अमेरिका में किस कदर रोजगार तैयार करने में मददगार हो सकता है। ट्रंप एफ-16 विमानों की खरीद पर जोर दे सकते हैं ताकि टैक्सस की लॉकहीड मार्टिन असेंबली लाइन शुरू हो सके। जबकि मोदी का जोर रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पर है। इस दिशा में दोनों अपने लक्ष्यों की ओर कैसे आगे बढ़ेंगे यह देखने लायक बात होगी और इस दौरान काफी कुछ आपसी तालमेल पर निर्भर होगा।
Keyword: america, ट्रंप, आईटी, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप आव्रजन सुधार नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,
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